मैथिली कविता
- दिनेश यादव
मैदान कयला केँ बाद पैइनछुवा तँ रिते छैक,
पुलही लोटा नई सहीँ, मिनेरल बोटल मेँ पानि भइरते छैथ,
खेतक आईर काँत, गालपर हात राखि केँ लोग बैसबे करैत छैथ,
मिथिला केँ ई त पुराने रित छैक ।
पछुवा रोटी खेनिहार सभ आगा कहियो नै बढैत छैक,
मोटका रोटी खेनिहार सभ हर बहै छैथ,
छत्ता तर बैस मालिक,हाथ पर आंगुरक घुँस्सा दइते छैथ
मिथिला केँ ई त पुराने रित छैक ।
तेलमालिस करै बलासभ गुलाम त होबे करैत छैथ,
भूँइया मेँ बइठईबाला सभ जी–हजूर,मालिक करिते छैथ,
ननकिरहबा विमार छई, तईयो दरबाजा पर हाजिर छैथ,
मिथिला केँ ई त पुराने रित छैक ।
रोटीपर नूनबुकनी,प्याजक चटनी खेनिहार सभ जनबनिहार होइते छैक,
दुई/चारि शेर बनि भेटल, साँउझका जोगाड भइये जाय छैक,
एकचुल्हिया पचरल, मरमसला केँ जोगाड में फाँड मेँ धान लँके दोकान दौडय छैथ,
मिथिला कें ई त पुराने रित छैक ।
माथ पर ठोप आ त्रिपाइत डाइढ तानैवला सभ ब्रह्मनालक अवतार मानबे करैत छैथ,
प्रणामपाति करि, आर्शिवाद त भेटबे करत छैक,
दान, दक्षिणा लेबे करत, नय त मनमनिया श्राप सुनय पडैत छैक
मिथिला केँ ई त पुराने रित छैक ।
रौद मे पगडी आ युद्धभूमि मेँ मुरेठा केँ प्रचलन मिथिला मेँ लोकप्रिय छैक,
यज्ञोपवितोउपरान्त लगबैय बला पागक भारी जबरजस्ती आब माथ पर अछि
बुद्ध केँ बहिष्कार कएनिहार सभ पेरबा आ छागड के हलाली कइरते अछि
मिथिला केँ ई त पुराने रित छैक ।
सोलह श्राद्ध पर गोदान करबा केँ मृत्तआत्मा सभ स्वर्ग मेँ दूध पिविते छैथ,
डर ,त्रास आ धार्मिक आडम्बरी के अस्त्र बना,
सभा नय सही गाम मेँ भोज बलजोरी करबैते छैथ,
मिथिला केँ ई त पुराने रित छैक ।
दिनांक :२०७४ पुस ३० रविबार
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