Monday, 27 April 2020

मिथिला क्षेत्रक लेखिकाक मानसिकता

मैथिली भाषा
सर्वप्रथम फणीश्वरनाथ रेणुक जन्मशती पर हुनका कोटी–कोटी नमन आ शब्दश्रद्धा अर्पण । प्रभाव खबरके पटना संस्करणमे रेणु के बारे मे उषाकिरण खान के एक गोटा आलेख पढबाक मौका भेटल । रेणु आ खान दुनू गोटे हमर मनपसिन लेखक थिकाह । हिनक साहित्यिक रचना आ पुस्तक खोइज खोइज के पढयैत रही छी । 
श्रद्धेय लेखिका उषाकिरण के अहि आलेख मे दोहरा चरित्र देखबा मे अबैत अछि । आलेख मे हरियर रंगसँ चिन्हित कयैल गेल वाक्य सब पढल जाए त स्पष्ट होइत छयैक । 
लेखक महोदया अपन आलेख मार्फत् रेणुक विरासत अपना के मानई मे भगमग्दूर प्रयत्न कएने छथि । अन्त्यमे अपना के मिथिला के हिन्दी लेखिका कहैत आलेख के विश्राम देल गेल अछि । मैथिली भाषी क्षेत्र मे अहि तरहे मानसिकता बहुत जगह भेटयैत छहि । जौ अपने हिन्दी लेखिकाक कोटी मे अपना के रखबाक धृष्टता रखैत छि त फेर मैथिली आ मिथिलासँ जोडनाई के की तुक अछि । महोदया , मिथिला के हिन्दी लेखिका आ हिन्दी के मैथिली लेखिकाक बात फराक होइत छहि । मिथिला के सुच्चा मैथिली बनबाक जाधरि प्रयास नहि होएत, मैथिलीक दुर्गति होइत रहत ।


No comments:

Post a Comment