मैथिली भाषा
- दिनेश यादव (DINESH YADAV)
| File Photo. |
राज्य सत्ता के संचालक सब मिथिला के ऐतिहासिकता सँ जोडि के ‘मिथिला प्रदेश’ होमाक चाही कहि रहल अछि । ओकरा सब केँ शब्दकोष में अखनो मधेस ‘कतह’ छहि बला बात छैक । हा, राज्य सँ बेर–बेर फाइदा लेनिहार सब सेहो अहि पंक्ति मे ढाड छथि । मिथिला केँ ऐतिहासिकता त अइछे , मुदा अहि भितर बहुत रास बात सब लुकल छहि । ओ सब मधेस शब्द आ पहिचान केँ मटियामेट करबा मेँ लागल छथि । अहि मेँ एहा चाहना लुकल देखबा मेँ आबि रहल अछि जेँ मधेसिया कहियो एकताबद्ध नहि भँ सकैय ?
पुर्व मेची सँ पश्चिम महाकाली धरि तराई–मधेस केँ जोडैवला भाषा हिन्दी अछि(हमर अहि बात केँ आशय मैथिली भाषाक विरोध केनाहि किन्नौह नै अछि) , इ बात नेपालक प्रमुख पार्टी आ राज्यसत्ता के संचालक सब निक जका बुझि रहल छहि । तेँ ओ सब ओकरा निस्तेज आ निस्क्रिय करबा मे मात्र केन्द्रित छहि , ओ सभ मिथिला आ मैथिली के कायापलट होय से सोच मे कहियो नहि रहल आ रहत । इ बात सब केँ बुझले अछि ।
मैथिली, मिथिला आजुक पहिचान नहि, प्राचिन पहिचान आ अन्तर्राष्ट्रिय पहिचान अछि । एकरा कियो मिटा नहि सकैत अछि । मुदा मधेस आ मधेसी के पहिचान मिटेबाक लेल शासनक केन्द्र बिन्दु मेँ रहल दल आ नेता सब सदखनि लागले अछि । मिथिला ऐतिहासिकता सँ जुडल बात थिक । मुदा आजुक युग में ऐतिहासिकता मात्र नामाकरणक पर्याबाची नहि भ सकैत अछि । ‘मधेस’ शब्द ऐतिहासिकता आ सहिद के बलिदान आ शोणित सँ सेहो जुडल छहि । कहबी छहि, विजेता इतिहास लिखैत छहि, मधेसी सब प्रदेश २ के विजेता भेला केँ कारण अपन इतिहास ‘मधेस’ शब्द सँ लिखौत ।
मिथिला ओहूपार छहि, अन्तर्राष्ट्रिय सीमा एकरा बखरा केने छहि, ओमहर दरंभंगा महाराजबला मिथिला छहि, जहि मिथिला में तथाकथित उच्च जाति के लोक सब के देवतुल्य बनाओल गेल छहि, ओकरे संस्कृति, पहिरन आ पहिचान के ओमहरका मिथिला केँ धरोहर केँ रुप मेँ प्रचार कके थोपल जा रहल छहि, अहू पार मेँ सेहा प्रवृति देखल गेल अछि । इ अनुचित अछि । अहिपार जनक आ सीयाजी के मिथिला छहि, तें हमर इ दू विभूति बला मिथिला मेँ अपन पहिचान केँ स्थापित होमाक चाही, दरिभंगा आ मधुबनिया मिथिला केँ अपनेनाई आ पिछलग्गू बननाइ दुर्भाग्य थिक । तहिना मिथिला में जातिबाद देखल गेल अछि , जातिय वर्चस्प सेहो देखल गेल अछि । तेँ ओहोन मिथिला के परिकल्पनाकार लोकन्हि सँ हमर आग्रह जे विगत किछु वर्ष एमहर मिथिला प्रदेश नामाकरण कारबाक प्रवृति मैथिलीजनक आत्मा सब के प्रदुषित कँ देलौ , निक संकेत नहि देखल गेल । अहू कारण सँ मिथिला सँ सुन्दर ‘मधेस प्रदेश’ नामाकरण होय ।
मधेस मेँ मिथिला, भोजपुरा, अवध, मगध सब समाहित आ रुपान्तरित भँ सकैत अछि । मुदा मिथिला मेँ इ बात सब नहि समटल जा सकैत अछि । तें मधेस नाम पर प्रदेश २ के नामाकरण होय, हमर तर्क अछि । मधेस युनिक शब्द थिक, मधेसिया त पहिचान बनिए गेल अछि । विश्व केँ कोनो राज्य आ प्रदेशक नाम एक दोहर सँ मिलल नहि भेटत । भारतीय मिथिला आ नेपालिय मिथिला सँ निक रहत मधेस प्रदेश । इ बड सुहनगर चयन होयत ।
पहिने तराई, तकरबाद मधेस फेर तराई–मधेस आब तँ ऐहो शब्द प्राचिन घटनाक्रम के इतिहास के पन्ना मेँ सीमित भँ गेल बुझमा मेँ आबि रहल अछि । राजनीतिक दल सब ‘मधेस’ शब्द सँ पत्ता नहि किएक सम्बन्ध विच्छेद कँ लेलक ? तें संघिय समाजवादी फोरम आ राष्ट्रिय जनता पार्टी बनल अछि । अहि दुदू मे मधेस नहि छहि । तें कम सँ कम प्रदेश २ के मधेस प्रदेश नामाकरण कँके जनता मे इ दल सब केँ सकारात्मक संदेश दियै पडतैह । तहिना, प्रदेश २ के जिल्ला सब मधेसी केँ कोर जनसंख्या बहुल जिल्ला भेला केँ कारण प्रान्तक नाम मधेस राखब उचित आ उपर्युक्त अछि ।
मिथिला शब्द मेँ क्रान्तिकारिता नहि, इतिहासि छहि । मधेस आ मधेसी शब्द में क्रान्तिकारिता, संघर्ष, त्याग, बलिदानक इतिहास छहि । तेँ प्रदेश २ केँ नाम ‘मधेस’ रखनाहि न्यायसंगत रहतैय । मिथिला राज्य केँ तर्ज पर भेल ५ मैथिलीजन केँ सहादत केँ सम्मान करैत छी, मुदा ओहू सँ बड बेसी गुणा मधेसीजन केँ मधेसक नाम पर बलिदान आ सहादत भेलन्हि, देल गेल । अहू कारण प्रदेशक नाम ‘मधेस’ रखबाक उचित छैक ।
मिथिला मेँ ‘मैथिल’ शब्द(दरभंगिया महाराजक ट्याग बोली) आ किछु जाति विशेषक पहिरन ‘पाग’पर विवाद चलि रहल अछि । मुदा मधेस केँ नाम पर तेहेन विवाद नहि देखल गेल छहि । अविवादित शब्द पर सर्वसम्मति होमाक चाहि । नेपालक दोषर भाषा मैथिली थिक । परन्च ओकर दुरगति आ दुर्भाग्य जगजाहेर अछि । प्रदेश २ ‘मिथिला’ नामाकरण कयलौ केँ बाद इ दुरगति निश्चित, सुनिश्चित देख रहल छी । तेँ इ प्रदेश ‘मधेस प्रदेश’ बनौ । ( १३ भदौ २०७५ मेँ मिथिलाञ्चल एफएम १०५मेगाहर्ज जनकपुर केँ ‘दलान’ कार्यक्रम मेँ देल गेल हमर प्रतिक्रियाके संपादित अंश)
नोट : अहि कार्यक्रम में रमेशरञ्जन झा आ हमर प्रतिक्रिया लेल गेल रहि, हम मधेस नामाकारण के पक्ष मेँ अपन तर्क प्रस्तुत केने रहियै । अठारह श्रोता सबहक सहभागिता रहिन्ह । ओही मेँ एक–एक गोटा श्रोता ‘जनकपुरधाम प्रदेश’ आ ‘मिथिला प्रदेश’ केँ पक्ष मेँ आ बाँकी सोह्र गोटा श्रोता लोकन्हि मधेस प्रदेश केँ पक्षपाति रहन्हि ।
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