मैथिली भाषा
१= उठू यौ मैथिल भेलैय भोर ,
चुनमुन चिरैया करैय शोर,
कोशी कमला अमृत जलधारा,
आलस छोडु कहे भुरुकुवा तारा .....
–विनित ठाकुर
२= हम छी मैथिलबाबु, मेड इन मिथिला...
–डिजे मैथिल
३= चल–चल रे अपन देश,
स्वर्ग स सुन्दर अपन मधेश.....
–कालीचरण वैठा
- दिनेश यादव(DINESH YADAV)
नेपालक मिथिला क्षेत्र गीत÷संगीत मे कतेक धनि अछि, तकर प्रमाण थिकैह यी उपर देल गेल तीन रचना । पहिल गीत मे समग्र मिथिलाबासी के उठबाक आग्रह अछि, दोसर मे पहिचान आ तेसर में अपन भूमि के बखान कयल गेल अछि । कोनो आन भाषा÷भाषी से ई बेजोड सिर्जना कनिको दुबर नए अछि । ऐहन रचना कएनिहार स“ भरल–पुरल अछि नेपालक मिथिला क्षेत्र । गाम–गाम आ जन–जन के बोली एही“ मे समटल गेल अछि । त“ईयो मिथिला कुहरी काट्बाक बाध्य अछि । एकर कारण बहुतो अए, आ भ“ सकैत छैक ।
मिथिला क्षेत्र मे ‘देवराज’ सभहक कमी, ‘दैत्यराज’ आ ‘दानवराज’ सभ बढि गेला के कारण समस्या अछि । ‘भगवती’ नए ‘अग्गती’ सभ बड बेसी भ“ गेल छन्हिन, मिथिला क्षेत्र में । त“ई हरेक क्षेत्र में सम्पन्न रहितौ मिथिला हुक्कहुक्की ल“ रहल अछि । नेपालक मिथिला क्षेत्र मे टक्का के“ लेल बेसी आ मैथिली गीत÷संगीत, साहित्य÷संस्कृति आ कला÷परम्पराक उन्नति आ प्रगतिक लेल कम काज भ“ रहल छैक । आजू मिथिलाक जन–कोकिलकवि विद्यापति किछु खास वर्ग, जाति आ धर्म विशेषक बैन (तन्खाह) कमेबाक माध्यम बनल अछि । बनिहारी सभ एतेक बेसी भ“ गेल अछि जे हुनका सभ के मात्र बैन चाही, आर किछु नए । एहेन गतिविधि नेपालक मिथिला क्षेत्र मे मात्र नए, भारतक मिथिला क्षेत्र मे सेहो ओतबे भेटत ।
एतेह विद्यापति के नाम पर करोड टाकाके“ अक्षयकोष खडा सरकार केने छए, मुद्दा नाताबाद, कृपाबाद, गुटबाद आ जातिबाद के कारण कोष स्थापना काले स“ विवाद मे फसल अछि । त“ई आब विद्यापति के नाम पर घोषणा होमेवाला पुरस्कार÷पदक मे ग्रहण लागल बुझाएत अछि । पुरस्कार प्राप्त कएनिहार सभ के ‘मन–कोत’ भ“ जाए छन्हि, ओ सभ मन स“ पुरस्कार लेबाक अवस्था मे नए थिकैह । मिथिला रत्न, वरिष्ठ गायक एवं संगीतकार गुरुदेव कामत एहीं विषय पर निक प्रतिक्रिया देने छन्छि । ओ कहैथ छन्हि, ‘महाकवि विद्यापति के प्रख्याति आ बेजोड चिनारी गायन÷गायक क्षेत्र स“ भेल रहैए । गायक सभ हुनक गीत गाबी–गाबी के हुनका चर्चा मे अनने रहन्हि । हुनक नाम मे स्थापना भेल पुरस्कार अखनधरि गायक आ संगीतकार के नय, साहित्यकार आ अनुवादक के मात्र भेटलइए । ई दुखद बात थिक ।’ कामत कहैथि छन्हि, ‘पा“च विद्या मे ७ वर्ष स प्रदान कयल जा रहल इ पुरस्कार स्थापना काल स विवाद मे अछि । हम सभ सक्रिय रुप स“ एही क्षेत्र मे वर्षौ स लागल छि , नए भेटल त नया“ पीढी के इ पुरस्कार भेटनाए मुस्किल अए ।’ विद्यापति के नाम भजेनाए असल मिथिलाप्रेमी के आब बन्द करै पडत । कम स कम आबो मिथिला गीत÷संगीत मे दशकों लागत आ सक्रिय लोकन्हि के खोजि होबाक पक्ष मे ओ छथि । वरिष्ठ गायक कामत आगा कहैथि छन्हि जे किछु लोक पोखरी मे जन्मल जलकुम्भी जका बनि बसल अछि । कनिको हावा बहल त एही महार कात स ओही महार कात चलि जाएत अछि । एहा“ दुखद बात अछि । हुनक बात किनको बेजाय लागि सकैत छन्हि । मुदा वास्तम मे मिथिला क्षेत्र मे पाछा स“ पैर(खुट्टा) खिचनिहार सभहक कारण मैथिली गीत÷संगीत के जतेक प्रगति होबाक चाही से नए भ रहल अछि । किछु स्वनामधारी ‘कलाकार’ सभ वर्षौवर्ष अही क्षेत्र मे लागल लोकन्हि सभ के छुत जका व्यवहार क“ रहल छन्हि । एहेन अवस्था मे बहुतो के मन खिन्न होनाए स्वाभाविक छए ।
एतह के मैथिली गीत÷संगीत क्षेत्र मे मुठ्ठीभरी लोकनिक हालीमुहाली छए, ओ सभ के गरिब, दरिद्र आ कलुषित एवं संकिर्ण मानसिकताक कारण ‘कार्टेलिङ’ के स्थिति देखबा मे आबि गेल अछि । एक–दोसर के सम्मान त दुरक बात, पुछोताछो होनाए बर्जित जका भ गेल छैक । युवा पीढि सभ फेसनक लेल अहीं क्षेत्र के प्रवेश क“ रहल अछि , व्यवसायिक दिस किनको चिन्ता नए । सभ के सभ मैथिली भाषाक नाम पर अपन–अपन खेति मे लागल अछि । त“ई कोनो लोकविशेष बेसी काल धरि एही मे टिकबाक हिम्मत नए जुटा पाबि रहल अछि । अपना के ‘सुपरमेसी’ मानएवला लोकन्हि सभ के कारण यी क्षेत्र दिनानुदिन दरिद्र, निसहाय आ मसोमात आ मुहदुब्बरा के श्रेणी मे पहु“चल जा रहल अछि । एक कहबी अछि जे अपन सिर्जना के टक्का स“ तौलबाक प्रयास नए होबाक चाही । मुदा ई बात बुझत के <
दोसर बात, विवादास्पद व्यक्ति सभ स“ नेपालक मैथिली गीत÷संगीत जकरल अछि । त“ई एकर उथान आ प्रगतिक धरातल कमजोर भ“ गेल छैक । एकेटा मनुस जे ‘जेटिए’ पद मे रही सरकारी सेवा क“ रहल छन्हि आ गीतकार, संगीतकार, नाटककार, विज्ञापनकार, गायक, पत्रकार, रेडियोकर्मी, लेखक, विश्लेषक, अधिकारकर्मी, अभियानकर्मी, संस्कृतिकर्मी, राजनीतिकर्मी, भाषाकर्मी, एनजीओकर्मीबनि मिथिलाक के नाम पर बनियागिरी क“ रहल अछि । अहिठाम ई कही दिई जे ओ हुनक बहुआयामिक प्रतिभा भ सकैत छन्हि , मुद्दा हुनक ‘सिन्डीकेट प्रथा’ अहिठाम बर्जित होनाए अति आवश्यक अछि । किएत त हुनक ई ‘दुलर्भ प्रतिभा’ मिथिला के गीत÷संगीत के क्षय दिश उन्मुख क रहल छैक । मिथिला के ऐतिहासिक गौरव गाथा आ प्रतिष्ठा मे आ“च पहु“चा रहल छैक । प्रचार के लेल प्रचार मे जुटल लोक सभ ‘अलकत गगरी छलकत जाय’ से उपर नए उठि सकैति छैन्हि । त“ई आब कम से कम ई बनियागिरीक अन्त्य होमाक चाही । रेडियो मे अपने प्रस्तोता,अपने गायक आ अपने गीत बजोनाए जौ बन्द भ जाए त मिथिला सटसिन आ सुहगनगर रुप से उपर उठि जाएत ।
नेपालक मिथिला क्षेत्र सप्तरी मे जन्मनिहार उदितनारायण झा मैथिली गीत÷संगीत स“ बेसी भारत मे हिन्दी गायक के रुप मे परिचित अछि । सिरहा के मुरलीधर मैथिलीक धरोहर थिकैह, मैथिली गीत÷संगीत मे हुनक योगदान अतुलनीय छैक । मैथिली फिल्म स“ ल“के मिथिला कला÷संस्कृति के जगेर्ना मे हुनक जोडा नए । मुद्दा ओहो मिथिला क्षेत्र मे पिछला समय देखल जा रहल गलत परिपाटी स दुखित छन्हि । किछु वर्ष पहिले काठमाण्डू के एक बेर भेट मे ओ कहने छलाह, ‘अपन माटीपानी के मौलिक पहिचान आ बोली जाधरि मिथिलाकर्मीक जूनुन नए बनत, मैथिली के विकास, प्रर्वधन, उन्नति आ प्रगति असम्भव अए । मिथिला मे नटवरलाल सभ बढि रहल अछि, एकरा रोकबाक दिस पहल जरुरी भ चुकल अछि ।’ एही बेरक विद्यापति पुरस्कारक लेल हुनकर नाम सेहो सिफारिस भेल । मुद्दा जे विद्या मे ओ कहियो काज नए केने रहन्हि ओई के लेल हुनका पुरस्कार देबाक निर्णय भेल । भाषा अनुवादक लेल हुनक नामक चयन कएल गेल । मुद्दा मुरलीधर मात्र एहन मिथिलापुत्र आ योद्धा निकलल जे लाख टका के ओ पुरस्कार प्रदान कएनिहार सभ के विरोध केलन्हि ।
अहिपारक मैथिली गीत÷संगीत मे महत्वपूर्ण योगदान कएनिहार मे गुरुदेव कामत के नाम सबसे उपर अछि । ओ नेपालक शास्त्रिय संगीतक एक धरोहर थिकैह । मिथिला क्षेत्र के दुर दराज गाम मे जन्मि के नेपालक राजधानी मे अखन एक स्थापित कलाकार बनल अछि । बहुतो मिथिलाबासी के ओ अपन शिष्य बना के“ मैथिली गीत÷संगीतक उथ्थान आ प्रगतिके अभियान मे जुट छन्हि । कामत काठमाण्डू मे गुरुकूल संगीत महाविद्यालय खोली बहुतो के संगीत आ गायन क्षेत्र मे अएबाक लेल निपुण बनबति दिक्षित केने अछि । हरेक वर्ष आ हरेक कार्यक्रम मे अपन माय के बोली मैथिली मे ओ गीत गेबेटा करैति छथि । तहिना नेपाली गीत÷संगीत स“ अपना के स्थापित कएनिहार वरिष्ठ गायक रामा मण्डल के मैथिली भाषाक गायन मे बड बेसी योगदान अछि । हुनक हमेसा प्रयास रहैत छैक जे मैथिली गीत÷संगीत आगा बढए, मुद्दा किछु मिथिला अभियान हुनका साथ छुत के व्यवहार करैति छन्हि । आधा दर्जन स बेसी मैथिली सिडी÷एलबम मे हुनक आबाज लोकप्रिय मात्र नए संग्रहणीय छन्हि । उपर उल्लेख कयल गेल लोकन्हि सभ व्यावसायिक रुप स एही क्षेत्र मे लागि अपन मु“हक लेल माड(रोटी) जुटा रहल अछि । अहीं पार मैथिली गीत÷संगीतक श्रीबृद्धि करबा मे गायक हरिशंकर चौधरी, कमल मण्डल, सन्तोष कुमार, अभास लाभक योगदानक चर्चा नय केनाए अन्याय होइत । एही क्षेत्र मे नवप्रवेशी सभ सेहो पंक्तिबद्ध भ टाड अछि । भागवत मण्डल, कैलाश झा, अन्जू यादव, अन्जली पटेल, रञ्जित शर्मा, संजय यादव, अरुण बिजया, तनुजा चौरसिया, वीरेन्द्र झा सनक गायक सभ नेपालक मैथिली गीत÷संगीत क्षेत्र मे बेजोड योगदान क रहल अछि । ओना त धिरेन्द्र आ रुपा सेहो गायन क्षेत्र मे अए, मुद्दा हुनक गायन ‘स्वप्रचार’ अभियानक कारण मात्र चर्चा मे अछि । पुरान लोक होइतो ई दुइ गोटा के गीत÷संगीत घर–घर के नए बनि सकल अछि । हेल्लो मिथिला कार्यक्रम आ हुनक चिनह जानल लोकन्हि के एफएम बाहेक मे हिनका सभहक गीत नहिए के बराबर बजाओल जाएत छैक ।
अही पारक मैथिली गीत÷संगीत के विषय मे चर्चित गीत एवं संगीतकार कमल मण्डल के कहबी अए जे ई क्षेत्र स्थिति सन्तोषजन नए छैक । नवप्रवेशी के प्रोत्साहन कएनिहार लोकन्हि के बड अभाव छैक । गीत÷संगीत के नशा लागल लोक सभ कोनो धरानी एही क्षेत्र मे प्रवेश त करैत छैक मुद्दा बेसी दिन टिक नए पायब रहल अछि । कारण रेडियो÷टेलिभिजनलगायतक के संचार माध्यम मे स्थानीय कलाकार सभ प्रस्तोता के रुप मे रहला स ओ सभ अपन आ चिन्ह्ल लोकन्हि के मात्र स्थान दैति छथि । ओ कहथि छन्हि, ‘मैथिली भाषा क्षेत्र मे धमाधम रेकर्डिङ स्टुडियो सभ खुजि रहल अछि । एकरा सकारात्मक रुपमा ल सकैत छि । अही“ क्षेत्रक भविष्य इजोत अछि ।
नेपालक मिथिला भूमि मे“ मैथिली साहित्यकार, गीतकारक सेहो कमी नए अछि । हुनका सभक योगदान मिथिलाक अनुपम पु“जि कही सकैत छि । कालिकान्त झा ‘तृषित’, विनित ठाकुर, सागरवीर कडारी, अर्जून गुप्ता, डिजे मैथिल,जेएन झा, कालीचरण वैठा सभ के मैथिली गीत रचनामे अतुलनीय योगदान रहलैए आ अइछे । हिनका सभहक गीत में जन–जन के जिभक आबाज सुनल जाएत छैक । ओना त मैथिली गीतकार मे आन लोक सेहो छैथि । ओही मे प्रमुख नाम राजेन्द्र विमल, अशोक दत्त, सुनिल मल्लिक आ धिरेन्द्र प्रेमर्षी के ल“ सकैत छि । मुद्दा ओ सभ मैथिली भाषी के लेल कम सरकारी आ गैरसरकारी संस्था के लेल बड बेसी गीत लिखैत छन्हि । ‘पैसा फेकु आ तमासा देखु’ बला भूमिका मे अही मे स“ किछु गोटा के ल सकैत छि । अही म स एकटा मान्यवर मिथिला क्षेत्र मे रही के नेपाली भाषा÷साहित्यक मे योगदान करबाक लेल लाख टका के पुरस्कार सेहो ग्रहण क चुलक अछि । रेडियो मे हिनका सभहक पकड भेला के कारण हुन सभक बजाओल जायत अछि मुद्दा मैथिलीजन के मन स“ गुनगुनाय के कोटी मे नए रहैत छैक ।
युवा गीतकार विनित ठाकुर मिथिला क्षेत्रक एक संभावनायुक्त आ प्रतिभाशाली हस्ताक्षर अए । हुनक गीत सभ ‘इभर ग्रीन’ आ मन के झक्झोरै बाला कोटी मे रहैत छन्हि । हुनक कहब अछि जे नव–नव गायक सभ के इन्ट्री के बाबजूदो नेपाल मे मैथिली गीत÷संगीतक अवस्था सन्तोषजनक नए छैक । किएक त बिना प्रशिक्षण के ओ सभ अहीं क्षेत्र मे प्रवेश कर रहल छन्हि । विचौलिया सभ स नवप्रवेशी तंग भरहल अछि, कम पाई मे एलबम आ गीत÷संगीत उपलब्ध करा देब कही के ठगि सेहो भ रहल छैक । त“ई नव शब्द आ गीतक विन्यास मे कमजोरी भेला के कारण अश्लिल सब्द सभ सेहो पसरल जा रहल अछि । मैथिली गीत÷संगीतक मौलिक टेस्ट आ फ्लेभर मे हिन्दी, भोजपुरी आ अंग्रेजी भाषा के प्रभाव सेहो बहुत बढी गेल छैक । त“ई मैथिली गीत÷संगीत संक्रमण अवस्था मे छैक ।
ठाकुर आगा कहैथि छन्नि, ‘उपर उठेबाक लेल मिडिया के महत्वपूर्ण हात होयत छैक । मुद्दा मिडिया मे मैथिली के नाम पर किछु गलत व्यक्ति के पहु“च भेला स“ समस्या मे पडल अछि । व्यक्तिबादी सोच हाबी भेला के कारण अपने गीत÷संगीत के प्रचार मे किछु मनुस लागल रहैत छैक । एफएम और केन्द्रिय रेडियो मे काज कएनिहार सभ ‘हमही सबा सेर छी, अउर सभ किछु नए’ तेहेन अभियान मे छथि । केन्द्रक ई रोग नेपालक तराई–मधेस मे संचालन भ“ रहल रेडियो सभ मे से हो पैसरी गेल अछि, देखल जा रहल अछि । अधिकांश स्थानीय एफएम रेडियो म“े ओतएह के गायक सभ प्रस्तोता भेला के कारण अपन गीत÷संगीत बाहेक दोसर के बजेनाए मुनासिब नए मानैत छैक ।’ एक मुखी हैकम के कारण मैथिली गीत÷संगीत के विकास मे समस्या छैक । त“ई एकरा तोडबाक दिस सबगोटा अग्रसर हउ ।
-विदेह पत्रिकामें ई आलेख प्रकाशित अछि _

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