Thursday, 14 May 2026

विश्वासक बीज (मैथिली लघुकथा )

न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहि, बल्कि विश्वास आ सहकार्यक फल अछि । प्रहरी आ नागरिक मिलिकेँ जखन पारदर्शिता, उत्तरदायित्व आ सहभागिताक संस्कार गढ़ैत अछि, तखन समाज अपराधमुक्त आ सभ्य बनैत अछि ।
✍ दिनेश यादव
सिम्रौनगढक ऐतिहासिक धरती पर नव भवन बनल । दू तल्ला संरचना, चमकैत रंग आ भित्तिपर टाँसल पोस्टर–गामक लोकसभक नजर खींचि लेने छल । उद्घाटनक दिन भीड़ उमड़ल । महिला, बाल–बालिका आ ज्येष्ठ नागरिकसभक मुंह पर उत्सुकता झलकैत छल ।
प्रहरी महानिरीक्षक दानबहादुर कार्की मंच पर ठाढ़ छलाह । हुनकर आवाज गंभीर मुदा आत्मीय छल । ‘तराई–मधेशमे एखनहु ‘पञ्चायती’ सोच आ ‘बिचौलियाक’ जालमे पीडÞित न्याय पाबयमे कठिनाइ झेलैत अछि,’ कार्की कहलाह । भीड़मे किछ लोक माथ हिलेलाह, मानू अपन अनुभव याद करैत ।
ओ आगू कहलाह, ‘प्रहरी कार्यालयमे समस्या राखय लेल ककरो सहारा नहि चाही । चिनजानक नाम पर रकम असुलबाक प्रवृत्ति आब सह्य नहि अछि । पीडÞितक गोपनीयता आ सुरक्षाक उच्च प्राथमिकता देल जायत ।’
गामक वृद्धा उर्मिदा देवी नजिके बैसल सुनैत छलि । हुनका लागल–शायद आब प्रहरी लग जायमे डर नहि रहत ।
‘कानूनसँ ऊपर कियो नहि, सुख–दुखमे प्रहरी साथी’–ई नाराक संग वातावरणमे नव आशा फैलि गेल । कार्की भवनक महत्त्व बतौलाह–ई केवल सरकारी संरचना नहि, नागरिकक साझा सम्पत्ति अछि । स्थानीयसभक सक्रिय सहभागिता बिना ई संरचना अधूरा रहत ।
कार्यक्रमक अन्तमे किछ व्यक्तित्वकेँ प्रशंसापत्र देल गेल । भीड़ उत्साहित भेल । मुदा सभसँ पैघ प्रशंसा नगरवासीकेँ मनमे जन्मल–प्रहरी आ नागरिकक बीच विश्वासक बीज रोपल गेल ।
ई बीज केवल शब्द नहि छल, बल्कि प्रहरी प्रमुखक आत्मस्वीकृति आ सुधारक संकल्पक प्रतीक छल । जे दिन प्रहरी स्वयं अपन कमजोरी स्वीकारि ओकरा सुधारबाक वचन दैत अछि, ओहि दिन समाजमे नव भरोसाक जन्म होइत अछि ।
शिक्षा : एहि लघुकथा सँ स्पष्ट संदेश भेटैत अछि जे न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहि, बल्कि विश्वास आ सहकार्यक फल अछि । प्रहरी आ नागरिक मिलिकेँ जखन पारदर्शिता, उत्तरदायित्व आ सहभागिताक संस्कार गढ़ैत अछि, तखन समाज अपराधमुक्त आ सभ्य बनैत अछि ।

2 comments:

  1. एहि लघुकथा सँ स्पष्ट संदेश भेटैत अछि जे न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहि, बल्कि विश्वास आ सहकार्यक फल अछि । प्रहरी आ नागरिक मिलिकेँ जखन पारदर्शिता, उत्तरदायित्व आ सहभागिताक संस्कार गढ़ैत अछि, तखन समाज अपराधमुक्त आ सभ्य बनैत अछि । @Dhiraj Dheer, USA .

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  2. जे दिन प्रहरी स्वयं अपन कमजोरी स्वीकारि ओकरा सुधारबाक वचन दैत अछि, ओहि दिन समाजमे नव भरोसाक जन्म होइत अछि . #Ram Manohar Baitha, Jhanjharpur, Madhubani .

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