Saturday, 20 June 2026

अहाँ बस चमकैत रहू

मैथिली गीत
लोग त' जरि-जरि मरत,अहाँ बस चमकैत रहू, अपन डगर पर पैर बढ़बैत रहू । दुनियाकेँ जे कहक छै कहे दियौ, अहाँ अनकर बात पर कान नहि दियौ, बस अपन भाग्य खुद लिखैत रहू... लोग त' जरि-जरि मरत, अहाँ बस चमकैत रहू ।
अहाँ अपन भीतरक खूबी क' खोजू, कमी गढ़बाक लेल त' लोग छेबे करैक । कदम हम्मेशा आगू बढ़बैत चलू, पैर पाछू खींचबाक लेल त' लोग छेबे करैक । लोग त' जरि-जरि मरत, अहाँ बस चमकैत रहू...
सपना देखू त' अम्बर क' छुबै क', नीचा देखेबाक लेल त' लोग छेबे करैक । मन में अपन जुनूनक दीप बारू, ईर्ष्यासँ जरबाक लेल त' लोग छेबे करैक । लोग त' जरि-जरि मरत, अहाँ बस चमकैत रहू...
जिन्दगी में सुंदर यादक महल बनाऊ, बात क' बतंगी बनेबाक लेल त' लोग छेबे करैक । प्रेम करब त' पहिने खुद स' करू, दुश्मनी निभबाक लेल त' लोग छेबे करैक । लोग त' जरि-जरि मरत, अहाँ बस चमकैत रहू...
कड़ा मेहनत करू, अपन मुकाम पाबी, ताना मारबाक लेल त' लोग छेबे करैक । रुकब नै कतौ, बस बढ़ैत चलू, अपन मंजिल तरफ डेग बढ़बैत चलू ।
लोग त' जरि-जरि मरत, अहाँ बस चमकैत रहू, अपन डगर पर पैर बढ़बैत रहू...।
@दिनेश_यादव,
कलंकी,काठमाण्डू (नेपाल)।

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