Monday, 11 May 2026
जानकी मन्दिरक वास्तुकला आ मिथिला शैलीक प्रश्न ? (Questions about the architecture of Janaki Temple and Mithila style?)
■ दिनेश यादव मिथिला संस्कृतिकेँ सम्मानित करबाक लेल वास्तुकला आ सांस्कृतिक प्रभावक बीच स्पष्ट भेद बुझब आवश्यक अछि । मिथिला शैलीक वास्तुकलाकेँ ऐतिहासिक रूप सँ सही परिभाषित करब आ जानकी मन्दिरक वास्तविक मिश्रित शैलीकेँ स्वीकार करब, ई सांस्कृतिक ईमानदारीक प्रतीक अछि । मन्दिरक वास्तुकलाकेँ जानकारी अभावमे किछु ‘मिथिला शैली’ कहि प्रचार करैत छथि । नेपालक एकटा राष्ट्रिय दैनिकमे प्रकाशित आलेखमे सेहो ओहे गल्ति दोहराओल गेल अछि । ऐतिहासिक दृष्टिकोण सँ ई विश्लेषण शुद्ध नहि अछि । वास्तुकला विशेषज्ञ आ ऐतिहासिक दस्तावेजक आधार पर ई मन्दिरक निर्माण हिन्दु-राजपूत, मुगल आ राजस्थानी शैलीक मिश्रण अछि ।
प्रमुख वास्तुकला शैलीक तत्व
●हिन्दु-राजपूत शैली: भव्य गुम्बज, विस्तृत आँगन, सजावटी झाल।
●मुगल शैली: रंगीन काँचक प्रयोग, गुम्बजक सौन्दर्य ।
●राजस्थानी शैली: झरोखा (ओभरह्याङ्गिङ बाल्कनी), कलात्मक स्तम्भ ।
ई मिश्रणक कारणे मन्दिरक रूप भव्य आ अद्वितीय बनल अछि ।
परम्परागत मिथिला वास्तुकला माटि, काठ आ स्थानीय कलात्मक ढाँचामे आधारित रहैत अछि । छोट-छोट घर, आँगनक चारिपटि सजावट आ स्थानीय सामग्रीक प्रयोग मिथिला शैलीक मूल विशेषता अछि । जानकी मन्दिरमे ई ढाँचा मूल रूप सँ नहि भेटैत अछि । ऐतिहासिक ‘मुरली चौक’ केँ ‘विद्यापति चौक’ नामकरण करबाक तर्ज पर जानकी मन्दिरके मिथिला शैली कहि देनाई अनुचित अछि।
यद्यपि वास्तुकला दृष्टि सँ ई मन्दिर मिथिला शैलीक उदाहरण नहि अछि, मुदा सांस्कृतिक दृष्टि सँ ई मन्दिर मिथिला क्षेत्रक गहिरा प्रभाव सँ भरल अछि । मन्दिरक भित्तिमे मधुबनी चित्रकला आ मिथिला प्रतीकक प्रयोगके मिथिला शैली कहि देनाई ईतिहासके साथ भद्दा मजाक बाहेक आओर किछु नहि भए सकैत अछि । अन्नपूर्ण पोष्टके आलेखमे ‘जनकपुरधामक ईतिहास’ पुस्तकके हावाला दैत उल्लेख कएल गेल ‘माछक सन्दर्भ’ जानकी मन्दिरके मिथिला शैली होबाक पुष्टि नहि अछि ।
अहि आधार पर जानकी मन्दिरक वास्तुकला केँ "मिथिला शैली" कहल ऐतिहासिक दृष्टि सँ गलत अछि । फेर कहैत छी जे ई मन्दिर हिन्दु-राजपूत, मुगल आ राजस्थानी शैलीक मिश्रण अछि । तथापि, मधुबनी चित्रकला आ सांस्कृतिक प्रतीकक कारणे ई मन्दिर मिथिला संस्कृति सँ गहिरा रूपेँ प्रभावित अछि ।अतः उचित परिभाषा ई होयत—'जानकी मन्दिर मिथिला संस्कृति सँ प्रभावित, मुदा वास्तुकला दृष्टि सँ हिन्दु-राजपूत, मुगल आ राजस्थानी शैलीक मिश्रण अछि।'
अन्तमे, मिथिला संस्कृतिकेँ सम्मानित करबाक लेल वास्तुकला आ सांस्कृतिक प्रभावक बीच स्पष्ट भेद बुझब आवश्यक अछि । मिथिला शैलीक वास्तुकलाकेँ ऐतिहासिक रूप सँ सही परिभाषित करब आ जानकी मन्दिरक वास्तविक मिश्रित शैलीकेँ स्वीकार करब, ई सांस्कृतिक ईमानदारीक प्रतीक अछि । ##दिनेश_यादव##
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


No comments:
Post a Comment