काठमाण्डुमे किछु दिन पहिले मिथिला आ मैथिली पर एकटा कार्यक्रमक आयोजन भेल छल । नेपालक प्रथम राष्ट्रपति डा. रामबरण यादवके कार्यक्रमक प्रमुख अतिथि बनाओल गेल रहै । कार्यक्रम विवादरहित नय भँ सकल से बात सामाजिक संजाल सभ मे खुबे चर्चा मे आयल । अपन–अपन इन्ट्रेस्ट अनुसार लोक सभ कार्यक्रमक विषय पर सामाजिक संजाल में प्रतिक्रिया लिखलक । लेकिन अपनाके मैथिली भाषा आ संस्कृति कें सुच्चा अभियानी मानैय बला प्रविणनारायण चौधरी अपन अनलाइनमे जे लिखने छथि, ओईमे विशुद्ध ब्राह्मणवादकेँ पक्षपाति देखबामे आयल अछि । प्रमुख अतिथि डा.यादव पर लिखल गेल हुनकर टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण अछि । पूर्व महामहिम राष्ट्रपति पर केन्द्रित हुनक प्रहार मिथिला आ मैथिलीके किन्नौह नय जोडत । आलेखमे, हुनक आक्रोशपूर्ण प्रस्तुति गैर–ब्राह्मण पर बेसी देखल गेल अछि । तेँ पूर्व राष्ट्रपतिके मातृभाषाक मौलिकताक ज्ञान नहि रहल पात्रके रुपमेँ ओ प्रस्तुत केने छथि । तहिना नेपालक राजनीतिक विश्लेषक एवं विद्वान प्रदिप गिरीके आलेखमें ‘कथित’ पात्रकें रुपमे उल्लेख केने छथि । हुनके आलेखमे गिरीकेँ उदृत कँके लिखल अछि ‘मैथिली भाषा ब्राह्मण–कायस्थ मे सिमटल छैक, ताहि हेतु मिथिलाक राजनीति गौण छैक’ । इ कडबा सच कोनो मैथिल ब्राह्मणवादीके पचत से असंभव अछि । तेँ एकटा विद्वान कें प्रविणजी ‘कथित’ कहि केँ निचा देखा रहल छथि । ऐतह हम ई कहि दि जे, हम प्रदिप गिरीजी केँ अहि बिचार सँ विल्कुल सहमत छि । ऐहने बिचार वरिष्ठ नेता एवं प्रखर वक्ता रामचन्द्र झा रखलन्हि । झाजी के कहब रहैन्हि, ‘ब्राह्मण–कायस्थक मैथिलीक मानक सही आ अन्य केर गलत छैक’ आलेखमें उदृत केल गेल अछि । ऐहन कडबा सच्च कियो उगैल देत, बहुत दुर्लभ घटना थिक । तइयौ प्रविणजी के लेल रामचन्द्र झाजी ‘रामचन्द्र बाबु’ छथि । यौ श्रीमान्, मिथिला आ मैथिली ओहिना पाछा नय छए, किछु गोटा केँ ऐहने दरिद्र मानसिकता र संकिर्ण विचारक कारण एकर उन्नति अपेक्षाकृत नए भँ पाबि रहल अछि । हाँ, किछु गोटाके रोजीरोटी आ चाँदी कटाई सेहो अहि नामपर भइये रहल अछि । लेकिन अहि सँ मिथिला आ मैथिलीके प्रगति असम्भव आ असम्भव अछि ।
| Caption ::नेपालके राजधानी काठमाण्डुमे ‘चनमा’ नामक विवादास्पद कार्यक्रम पर ‘मैथिली जिन्दावाद’ अनलाईनमें मई ३० में प्रकाशित आलेखक एक अंश । |
100% right
ReplyDeletethanks Deepak jee !
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