इतिहास विजेता सभ लिखैत छथि, ई कहबी पुराने अछि । मुदा टटका–टटकी सेहो ऐहने अनुभव हमरा भँ रहल अछि । कोनो ऐतिहासिक पहिचान, संस्कृति आ धरोहर सभकें जौ बिना आधारक आ सन्दर्भ सामग्रीक उल्लेख करैत अपना अनुकूलकेँ व्याख्या कयल जाय या कियो करत त बुझियौं ओ कोनो ‘बाद’सँ अभिप्रेरित अछि । सन्दर्भ एक विद्वान पत्रकारक स्टेटस सँ सम्बन्धित अछि । ओ ‘मिथ’ आ ‘इला’ केँ जोडि मिथिलाकें (अ?)व्याख्या केने छथि । ‘मिथ’ आ ‘इला’ पर हुनक तर्क मौलिक जरुर छन्हि, ओ अपन वाक स्वतन्त्रताकेँ उपयोग केलन्हि तेकर सम्मान करी । मुदा हुनक तर्क विभिन्न ऐतिहासिक दस्ताबेज सँ मेल नय खाए छैक । हाँ मिथिलाकेँ किछु कथित पण्डित सभ ऐहने व्याख्या कएने हेताथ त ओ अलग बात भँ सकैत अछि । ओहुना, मिथिलाकेँ इतिहास ‘मिथक’ आ ‘भाषण’ पर बेसी आधारित रहल बात बहुत रास विद्वान सभ कहि आ लिख चुकला अछि । लेखक, विद्वान आ वरिष्ठ पत्रकार सुजित झाजी हमरा लेल सम्मानित लोक छथि, हुनका सँ हमरा कोनो आग्रह या पूर्वाग्रह नए । सामाजिक संजालमेँ आयल हुनक अभिव्यक्ति पर लक्षित हमर ई व्यक्तिगत प्रस्तुति सेहो अछि । अपन अभिव्यक्ति सार्वजनिक कयल जेबाक बाद ओहि पर सकारात्मक बहसक आवश्यकता रही जाएत छैक । हमर अहि बहसकेँ कियो कोनो जाति विशेषक विरोधी केँ रुपमेँ लैत छथि त ओ ओहिकेँ लेल स्वतन्त्र छैथि । अहिमेँ हमर दोस किन्नौह नए । हम मिथिलाकेँ छी, हमर माईकें बोली मैथिली छी, तेँ अहि विषय पर आयल सकारात्मक या नकारात्मक टिप्पणीपर अपन धारणा प्रस्तुत करबाक हक रखैत छी आ हक राखबेटा करब । एतह मित्र सुजितजी केँ स्टेटस आ ‘मिथ’ आ ‘इला’ पर उपलब्ध सामग्री हुबहू रखबाक प्रयास केने छी । अहि विषयपर मैथिली लेखककेँ धारणा हमरा लग उपलब्ध नइ अछि, जौ किनको लग हुए त उपलब्ध करावल जाए, अभारी रहब । एतह देलगेल सामग्री सभमें ‘मिथ’कें अर्थ प्रशस्ति, गुणगान आ ‘इला’क अर्थ बुद्धि आ शक्ति कतौह नए छैक । ‘मिथ’ जखने अंग्रेजी भाषाकेँ माइथ या मिथ केँ समअर्थी भँ जाए त बुझु, ओकर अर्थ बृहत भँ गेल । किएक त जतह कतौह शाब्दिक विवाद उब्जलईये ओत अंग्रेजिया सन्दर्भ सामग्री मध्यस्थकर्ताकेँ रुपमेँ देखल गेल छैक । व्याख्या गलत नइ छैक, ओना अहि सँ किनको घाटा आ नाफा सेहो नय मिलैय बला छय । तहियौँ सत्य आ यथार्थपरक बात एबाक चाही, से मात्र हमर आशय अछि । ओना मनमर्जी व्याख्या करबाक लेल सबगोटेकेँ छुट अछि । इतिहासक लेखक सभ त मनमौजी अपना अनुकूल व्याख्या अतितमेँ केनैहिए रहता आ आब अहा हम सेहो ओही पथमेँ गमन करय लागब त मिथिला आ मैथिलीकेँ कि होयत । ओना अहि सभ सँ उभर उठि सभकेँ जोडि केँ लँ जेबाक बात होयत त उत्तम ।

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