Monday, 3 July 2017

मिथिला क्षेत्र मेँ नटवरलालक हालीमुहाली

संस्मरण 
–दिनेश यादव  
१९८६–१९९५ धरि हम दरभंगा मे बितेलौह । मारवारी कलेज सँ इन्टर केला के बाद सिएम साइन्स कलेज में हमर नामांकन भेल । एही कलेज में श्रीरामपुर दरभंगा के विनोद मिश्र (विद्यार्थी) नेता सँ हिमचिम बढल । नेता साथी पाबी हम बढ हर्षित भेलौह । एक दिन ओ कहलैत जे बाबा बैजनाथ चौधरी ‘बैजू’ मिथिला राज्य के आन्दोलनक लेल महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह मेमोरियल
कलेज में बैसार केने छथि , चलु हम सभ । मैथिली के अपन माय के बोली ठानि हम हुन्का साथ ओतए पहुँच गेलौं । विद्यार्थी सभहक उपस्थिति निक रहए । विनोद जी हमरा कहलैत जे आजुक बैसार मे बेसी बाभन भ गेलए, अहा गैर–बाभन छि, प्रतिनिधि के रुप मे रह पडत । हम ‘हाँ’ कहि देलियै । तकर बाद विनोद जी के नेतृत्व मे सज्जन चौधरी, अवधेसकुमार झा, बच्चाजी, बौआजी झा, मनोरञ्जन ठाकुर, दिग्विजय झासहित बहुत रास मित्र लोकन्हि संगैह बेर–बेर मिथिला राज्य के लेल विद्यार्थी आन्दोलन मे सरिक भेलौह । आन्दोलनक क्रम में बाबा बैजुसंग मात्र एक बेर साक्षात्कार भेल रहए । हुनक ओजपुर्ण अभिव्यक्ति आ जोशगर भाषण हमरा मोही लेले रहए । हम क्रान्तिकारी मिथिला आन्दोलन में सक्रिय भँ गेहौह । मुदा हमर क्रान्तिकारिता बेसी दिन नए टिकल, कारण जे ओतेह गैर–ब्राहमण के दोसर दर्जा के आदमी जका व्यवहार होमे लागल । कार्यक्रम सभ मे जेनाइए हम छोडि देलौह । मुदा मैथिली भाषाप्रति के हमर मोह भंग नए भेल छल, अखनौ नए भेल अछि । तँई हमर दरभंगा मे रहती काल आकाशवाणी दरभंगा सँ प्रसारण होमेवाला कृषि कार्यक्रम मे ‘खुरखुर भैइया’ के सुनैत रहौं, मैथिली के गीतनाद हमरा बड निक लागैत अछि । बाद मे खुरखुर भैइया के कार्यक्रम मे प्रतिक्रिया आ मैथिली गीतक फरमाईस पत्र पठबति छलौह । ई क्रम आठ वर्षधरि जारी रहल । स्वदेश नेपाल फिर्ला के बाद राजधानी सँ प्रसारित एकटा एफएम में सेहो मैथिली मेँ पत्र पढाबे लगलौं ।  इन्जिनियरिङ कलेज मे एक गोटा मैथिली कविता गोस्टि के आयोजन नियमित रुप मे करैत रहए, ओहू मे हमर सक्रियता किछु दिन निके रहल । ओतेह मैथिली मे गितो गेने रही हम । २०५२ साल मे रेडिया नेपाल मे मैथिली भाषा मे गीत सेहो गेने रही हम । ओतैह किछ अउर मैथिली भाषी सँ सम्पर्क बढ्ल । मुदा जतेक भेटल किछु अपवाद के छोडि दिऔ त सभटा ठगे भेटल । ओकर वाद हम अपन डेग रसे रस पछा करए लगलौह । एही बीच मे वागमति मे बहुत राश जल बहि चुकल अछि । नटवरलाल सभ सेहो बढि गेल अछि । सबटा के अपनेटा मात्र सुझ लगलए । आजु २५ वर्ष बित गेल मुदा मिथिला आ मैथिली ठामेठाम अछि । हाmँ एही क्षेत्र मे संचार माध्यम मे बृद्धि के कारण प्रचारप्रसार मे बढोतरी जरुर भेल छईक । किछु गैर–ब्राहमण के छोडि अतिबाद ब्राह्मणवादी सभ मैथिली आ मिथिला के नाम मे ठिकेदारी मे जुटल देख मोन कलुषित भँ जाएत छईक । आब फेर मिथिला आन्दोलनक बात भँ रहल अछि, मुदा हमर मन मे एकेटा जिज्ञासा सदैब रहलए जे कि मैथिली ब्राह्मणवादी सोच रखनिहार लोकन्हि के मात्र थिकैह ? आन मिथिलावासी ओकर पछुवा मात्र छैक ? यदि नए, त एकैह जाति विशेषक परिहन के किएक मिथिला के शान ब्राह्मणवादी सभ मानि रहल छैक आ ओकेरे प्रचार मे अपन ऊर्जा किएक फुँइक रहल छैक ? २५ वर्ष के दौरान मे हमरा सम्पर्क मे आजुधरि दलित या सिल्पीकार, मुस्लिम समुदाय के प्रतिभा सभ मैथिली साहित्य आ आन विषय मे किएक नए उभरि के आएल छैक । भँ सकैत अए जे हम गल्ति कही रहल छि । मुदा ई एकटा यथार्थ आ यक्ष प्रश्न आजुक दिन मे मिथिलावासी के समक्ष मुँह बोने ठाड अछि । कि मैथिली आ मिथिला व्यापार करबाक सामग्री छि, जे किछु लोग एकरा अपन चाँदी कटाई के विषय बनबैति आबि रहल अछि ।
अन्त मे, मिथिला आ मैथिली के जोडबाक अछि त ओछपन आ दरिद्र मानसिकता सभ के त्यागि आगा बढए पडत , नई त मिथिला के नाम पर नेमचुस दए फुसलाबय बाला सभ के कोनो कमी नए छैक । सचेत आ सावधान रही आगा बढी, जातिपाति के अलग राखि अग्रगमन दिश जौ नए पढव त मिथिला माय हक्कन सदैब एहिना कानैति रहती । जय हो ।

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