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| Dinesh Yadav |
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पडोसी भारतक प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी केँ किछु दिन पहिल सम्पन्न नेपाल भ्रमण केँ सम्बन्ध मे बहुत बेसी टिक्काटिप्पपणी भ चुकल अए आ अखनो जारीए अछि । खास ककेँ नेपाली मिडिया में बहुत बढिचढि के विचार प्रवाह, विवेचना, चर्चा÷परिचर्चा, आलोचना आ गन्थन÷मन्थन भेल । इ सब एना के आएल जे नेपालक मिडिया के काज या उद्देश्य मात्र नरेन्द्र मोदी के स्तुतिगान मात्र छैक । संचार माध्यम सभ मे परसल गेल सामग्री सँ नेपालक पाठक केँ मोन ओकिया गेल रहए, बोर–बोर सेहो भँ गेल छल । तेँ नरेन्द्र मोदी (नमो) केँ जए ढंगे कभरेज भेल, ओ उचित छल या नए, सेँ बात महत्वपूणर््ा आ पैघ मात्र नए, अनुशन्धानक विषय सेहो बनबाक चाही । किएक त नमो के बोली नेपाल केँ राज्यसत्ता संचालन कएनिहार सभहक बोली सेहो रहए । बेर–बेर ओ गोर्खाली के चर्चा अपन संबोधन मे केलैत । जे एतह के शासक सभहक हिया जोडए बाला बात अछि । तहिना भारत के अमूक मिडिया से बारम्बार उचालक गेल गौतम बुद्ध के जन्म स्थल कँे बारे मेँ नमो के टिप्पणी नेपाली शासक सभ के मन्त्रमुग्ध करए वाला दोसर अस्त्र रहए । मुद्दा हमर माटी÷पानी सँ जुडल कोनो धरोहर के कियो अपन होबाक दाबी करता , जकर कोनो प्रमाण ओकरा पास नए छैक, मात्र चर्चा के विषय रहल अछि , ओही विषय मेँ पक्षपाति भए आनक टिप्पणी अस्वीकार्य होएत अछि । अहा के कान मे सोन अछि , कि इ अहा के छि से बात दोसर के कह परतै ? बुद्ध त हमर सोनित सँ जुडल विभूति छथि, देश÷विदेश में बुद्ध केँ जन्मभूमि नेपाल थिक से इतिहास मे स्वर्ण अक्षर मे लिखा चुकल अछि । एही विषय के पक्ष मे नमो बजला त कोन अनहेर आ चमत्कार भ गेल ? मुद्दा एतके बुद्धिजीवि आ संकिर्ण मानसिकता बाला लोक सभ एकरा बड पैघ विषय बनौलक । हमर सोनित के दोसर लोक के कह पडतै कि इ अहा के छि ? इ एकटा विचित्र सवाल अछि । नमो महासय जे सत्य थीक ओहे बोलला तेँ एही सँ कोनो पहाड नए खसि पडल । एही विषय मे मिडियाकर्मी आ नेपाली भाषी सभ के चिचिएबाक कारण नए छल । एही सँ एहा पुष्टि होएत अछि जे नेपालक नेता, सभासद, जनता, मिडिया सभ के सभ भेडिया धसान मे लागल अछि । दोस बात, नेपाल सार्वभौमसत्ता देश अछि, एही विषय मे आन देशक नेता के बजबाक बात कोनो आश्चर्य जनक नए छैक । आश्चर्य जनक त इ बात भेल जे नमो कहलतै जे नेपाल सार्वभौम राष्ट्र छि , सभासद सँ मन्त्री धरि सभ के सभ ताली टेबुल थोकता आ ताली पिटता । इ त एकता अनहेर बात से हो भेल । नेपाल सार्वभौम त ऐछे , अहिँ मे ककरो किछु बजबाक जरुरत नए । नमो के अधिकांश बोली राज्य संचालक सभ के खुश करैवाला मात्र रहए । ओ नेपाली भाषा मेँ अपन बात राखि ओकरा खुशि केलक, बाँकी ओही मे किछु लैस नए रहए । मुद्दा दु सप्ताह धरि नमोमय रहल एतह के मिडिया, चौक चोरहा, बजार आ गाम । अधिकांश में जय–जयनामा आ जय–जयकार कएल गेल । एकर दोसर कारण जीतबहादुर सेहों बनल । मिडिया मे अप्पन प्रभाव आ प्रचार कँ कोना के आगा बढाओल जाए से जानकारी नमो के निक जका रहए । तेँ ओ जीतबहादुर के एकटा टुल्स के रुप मेँ प्रयोग कएलक । आ सफल से हो भेल । ओकर परिवार सँ भेटघाट एही मे महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह केलक ।
नमो के संविधानसभा मेँ संवोधन के प्रसंग के बहुत अर्थ रखैत अछि , ओह बहुते बात ‘डिप्लोमेटिक’ ढंग सँ राखवा मेँ सफल सेहो भेल । मधेश के उच्चारण नए ककेँ पहाड आ तराई मे मात्र सीमित रहला सँ एतह के खस नेपाली भाषी (एकल भाषी संस्कार आ संस्कृति के प्रचार मे लागल लोक) के मोन आनन्दित करबाक हेतु मसाला बनल । मधेसिया केँ शत्रु सभ के आर कि चाही ? मुद्दा नमो के द्विअर्थी सम्बोधन के एहाटा अर्थ नए छल आ नए भ सकएत अछि । एकर एहो अर्थ रहए जे ओ एतह के शासक वर्ग के चिढेबाक पक्ष मेँ किमार्थ नए रहए, तें ओ अपन शालिन भाषा मे कहलैथि जे पहाड आ तराई के जोडबाक चाही । एतैहु ओ फुलक गप्प सेहो राखि देलैथ । संविधान निर्माण मे ‘कोमा’ तक के निर्णय आपसी सम्झदारी मे होबाक चाही से बात ओ खुलि के कहलैत । हुनकर ई भनाई ‘एक तीर सँ दुई सिकार’ करबाक सोच सँ ओतप्रोत रहए । ओहीँ मे ओ थपि केँ बजला जे बगैचाक सब फूलक सुगन्धक सम्मान होबाक चाही । कोनो देशक भूगोल (बगैचा) मे रहनिहार सबके महत्व केँ बुझि के अगा बढबाक बात से हो बैज के गेला ।
गोर्खाली समुदाय स“ लगाव
गोर्खाली समुदाय स“ नमो के लगाब के बहुत अर्थ निकालल जा सकैत अए । भारतक स्वतन्त्रता संग्राम के सफलता के“ बाद ओतह के नेता सब कहियौं पडोसी देशक उपेक्षित, पीडित, शोषित, दमित वर्ग, क्षेत्र, समुदाय आ सम्प्रदाय के पक्ष में रहल हेता से इतिहास नए अए । श्रीलंका एकर एकटा निक उदाहरण मात्र भ सकैत अछि । नेपाल, म्यान्मार, बंगलादेश, पाकिस्तान,अपगानिस्तान, भूटान एक अपबाद नए भ सकैत अए । जहाधरि भारतीय सरकारक बात नेपाल के सन्दर्भ मे अछि, ओ सब दिन नेपालक शासक वर्ग के करीब रहल आ ओकरे सभ के हित मे काम करैत आबि रहल अए । चाहे ओ ब्युरोक्रेट स्तर स होए आ दिल्ली के नेता स्तर स । एकडा पुष्टि करबाक लेल बहुत दुर नए जाए पडत, दूताबास के छात्रबृत्ति मे भारत मे“ पढैवाला अधिकांश विद्यार्थी के“ नेमलिस्ट जौ देखल जाए त, ओ सब दिन शासक वर्ग आ शक्तिशाली के मात्र सहयोग करैत आबि रहल अछि, से पुष्टि होएत । खास कके“ नेपालक एक जाति विशेष के भारत बड बेसी प्राथमिकता मे“ रखने अछि । अर्थात्, ब्युरोक्रेट्स स्तर से ऊपर आ राजनीतिक शक्ति केन्द्र स“ बाहर भारत कहियौं निकलि नए सकल अछि । इ एकटा तित यथार्थ थिक । नेपाल मे“ सब स पीडित समुदाय मधेसी अछि, मधेस आ मधेसी के नाम पर भारत सब दिन अपन बार्गेनिङ पावर बढबैति आबि रहल अछि । किछ चम्चा नेता सभ के कारण समग्र मधेस आ मधेसी सभ दिन पाछा रहल । ते“ गोर्खाली सभ के भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी बहादुर देखैत, मुद्दा स्वतन्त्रता संग्राम मे भारतक सेनानी सब के सहयोग कएनिहार सभ सँ बेसी मधेसीया लोकनि छल, ओ नमो के ह्दय मे नए अटा सकल, इ पैघ दुखद बात अछि । ते“ नमो के सम्बोधन पूर्ण नए रहल से कही सकैत छि । जौ स्वतन्त्र भारत बनेबाक कालखण्ड मे मधेसीया के योगदान के ओ उच्च मुल्यांकन नए केलक त, मधेसी लोक सभ के एही बात स सिख लेबाक चाही । भारत मे सेहो गोर्खाली अए, आ गोर्खा रेजिमेन्ट इतिहास काल से ओतए अछि । भारतक महत्वपूर्ण मन्त्री आ मन्त्रालय स ल के सम्वेदनशिल क्षेत्र के शान्तिसुरक्षा के जिम्मेवारी गोर्खाली के सुम्पन गेल अछि । एहन स्थिति मे ओ कोनाक विपक्ष मे जा सकैत अए । ते“ नमो कहलैत जे ओ समग्र देश के सम्बोधन कएलक, एतह इ बात बुझनाए अति आवश्यक अछि जे इ मुलुक गोर्खालीएटा के नए थिक, सय सँ बेसी जाति÷समुदाय के सेहो थिक ।
धर्मनिरपेक्षताके बहस
अपना के विश्व के सार्वाधिक लोकतान्त्रिक देश दाबा कएनिहार धर्मनिरपेक्ष भारत के प्रधानमन्त्री नमो तिर्थाटन मे माहिर अछि । ते“ ओ नेपालक आराध्य देव पशुपतिनाथ मन्दिर मे उधार दर्शन नए केलक, करोडौ मूल्य के चन्दन भेटी चढा के गेल । भेटी ओइ देश मे चढौलक जतह संविधान मे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के घोषणा होबाक तयारी भँ रहल अछि, अन्तरिम संविधान मे ओ शब्द लिखा चुकल अछि । विश्व के“ एक मात्र हिन्दु राष्ट्र के रुप मे विगत मे परिचित रहल नेपाल मेँ फेर सँ ओकर गन्ध आबए लागल, नमो के भ्रमण के बाद । ओना, हिन्दू अतिवादी नारा दए के प्रधानमन्त्री बनल मोदी धर्मनिरपेक्षता भर्सेस धर्म के लडाई मे ओ जीत हासिल कएलक । विकास स पैघ धर्म होएत अछि, से सन्देश प्रवाह कएनिहार नमो बिहार मे नितिश कुमार के विकास मोडेल के से हो चुनौति देलक आ हुनक पार्टी ओतए अपन बर्चस्प कायम कएबाक सफल भेल अछि । धर्मवाद, जातिवाद, सम्प्रदायबाद दीर्घकालिन राजनीतिक एजेण्डा नए भ सकैत अछि । तेँ नमो के धर्मबाद के जन्मगुँटी बड बेसी दिन नए टिक सकैत अछि । गुजरात मे दंगाफसाद मच्चेनिहार नमो के सफलता के बहुतो कारण मे एकटा अछि ओ असल वक्ता अछि आ जन–जन के बोली बोलबाक लेल माहिर अए, ते“ ओ चुनाव जित गेल । राजनीति नारा आ भाषण स“ नए चलएत अछि । विकास के पथ मे“ राजनीति के आबैटा पडै छए । धर्मनिरपेक्ष देश के नेता धर्मनिरपेक्ष मुलुक मे“ जाके धार्मिक क्षेत्र मे जौ सहयोग करैत अए त ओ गम्भिर विषय थिक । एतह के मिडिया एही बात के कतौह नए उठौलक । इ एकटा गम्भिर त्रुटि भेल अछि, एतह के मिडिया सँ ।
भाषण मे सीमित तराई
नमो के भ्रमण स बहुत दिन पहिने ओ तराई भूभाग मे अवस्थित जनकपुर आ लुम्बिनी के भ्रमण कर्ता से प्रचार मे छल । मुद्दा अन्तिम क्षण मे यी दु स्थल के भ्रमण रद्द भेल । रद्द के कारण सुरक्षा के बताओल गेल । नेपाल के तराई भूभाग में ७० प्रतिशत स बेसी सुरक्षाकर्मी गोर्खाली समुदाय के अछि , जए समुदाय के नमो बेर–बेर बहादुर कही चुकल अछि , मुद्दा ओइ बहादुर पर हुनकर विश्वास नए रहल बात भ्रमण रद्द भेला स पुष्टि भ चुकल अए । अर्थात नमो दोधार के बात कहलति,से प्रमाणित होएत अछि । समग्र नेपाल के बात करैवाला नमो के सुरक्षा के कारण किएक मधेस जाए सँ रोकल गेल ? आजु इ एकट यक्ष प्रश्न अछि । जे बहादुर के प्रशंसा के पुल बधिनिहार अपने नए गेल आ हुनका रोकल गेल से अखनौधरि स्पष्ट नए भ सकल अछि । मुद्दा सुरक्षा थ्रेट के कारण ओ तराई मधेस मे नए गेला से विश्वास योग्य बात नए अछि । जनकपुर आ लुम्बिनी त भारत स परापुर्व काल स जुडल अछि । जौ नमो के कनिको जानकारी रहितिए त ओ जरुर ओतए के भ्रमण मे जाएत । नए गेल इ जनकपुर आ लुम्बिनी के प्रति आस्था रखनिहार तमाम सरोकार पक्ष के अपमान से हो थिक । जब इ मुद्दा जोरसोर स उठल त आब नमो के सहयोगी सभ कहि रहल अछि जे अगामी सार्क सम्मेलन के दौरान ओ ओइ क्षेत्रक भ्रमण करत । एकर प्रचार अखने स शुरु भ चुकल अछि । स्रोत के अनुसार नेपाल मे भारतीय दुताबास के सहयोग मे नमो के तराई के ओइ क्षेत्रक भ्रमणक योजना बनेबाक लेल समिति काज क रहल अछि । ओ समिति जौ सिफारिस कर्ता तबे नमो मधेस क्षेत्र मे जेता से बात समाचार माध्यम मे आबि रहल अछि । अर्थात अखनो निश्चित नए भेल अछि , नमो के भ्रमण तराई क्षेत्र मे । एकर अर्थ अछि जे ओ तराई मधेस के ओतेक प्राथमिकता मे नए रखने अछि ।
मधेसी के साथ एक ढिक्के भेट
नमो नेपाल के नेता सब के एक एक क के भेटल छल । मुद्दा मधेसी नेता के एक ढिक्के भेटलाह । इ जानि जानि के या नए जानि जानि के केलक ओ से त नही कही सकैत छि मुद्दा इ निक सन्देश संचार केलक । मधेसिया के पहिचान के लेल इ बड पैघ विषय अछि । ओ मधेसवादी नेता आ प्रमुख तीन दलक के मधेसी नेता के एकठे भेटला अहि स इ सन्देश गेल जे मधेसी नेपाल मे एकता शक्ति अछि । भेट मे ओ कहलैत जे मधेसी सब के एक ढिक्का होमे पडत । इ महत्वपूर्ण बात थिक ।
सन्धि सम्झौता
भ्रमण के समय सन्धि सम्झौता के बात से हो जोड तोड से उठल । मुद्दा सर्वसाधारण के लेल ओइ सन्धि सम्झौता के कोनो अर्थ नए अछि । सीमा क्षेत्र मे सहज अवागम, दैनिक उपभोग्य बस्तु के आपूर्ति , रोजगारी सर्वसाधारण के इन्ट्रेस्ट के विषय अछि । कोशी , गन्धकी सम्झौता बहुत पहिने भेल मुद्दा जनता त अखनो धरि असुविधा मे अछि । तेँ सीमा क्षेत्र मे मधेसी जनता के अवागम सहज हुए ओए दिश ध्यान देबाक चाही , भारु रुपैया के सरल उपलब्धता महत्वपूर्ण विषय अछि , एकरा सुगम बनेबाक दिश नमो के नेतृत्व मे रहल सरकार के ध्यान दिए पडत । ( Apan Mithila, 2071 Badhau 09 )

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