Saturday, 15 August 2026
मैथिली कहिया शुधरत ? Maithili Kahiya Shudhrat ?)
मैथिली भाषाक लेखन शैली आ शुद्धाशुद्धि दिनानुदिन गिरैत जा रहल अछि । एतेह मानकक गप्प नै कऽ रहल छी, एकैह सामग्रीमें फरक-फरक शैलीकेँ बात हम कऽ रहल छी । हमर ई ब्लग भाषागत शुद्धता आ शब्दक औचित्य पर आधारित अछि । सामाजिक संजालमे हरेक दिन कथित मैथिली विद्वानक सामग्री सबसँ साक्षात्कार होइत रहैछ । हुनका लोकनिसँ मैथिली भाषाकेँ जाहि तरहे मानमर्दन होइछ, ओ आन भाषामे असभंव छैक । एतेह एकटा नमुना प्रस्तुत अछि (तस्बिर आ ओहिमे लिखल विषयवस्तु देखू) । ई निमंत्रण पत्र (मैथिली भाषामे) देखला पर व्याकरण, शब्दावली आ सामाजिक-साहित्यिक शिष्टाचारक दृष्टिकोणसँ निम्नलिखित मुख्य त्रुटी आ विवादास्पद बिन्दु सब स्पष्ट रूपसँ नजरि आवैत अछि :
१. भाषागत आ व्याकरणीय त्रुटी (Language & Grammatical Errors)
'श्रद्धाञ्जली कार्यक्रम' क औचित्य :
मृत्यु भेल व्यक्तिकेँ स्मरण आ आदर देबाक लेल आयोजित शोक आ सम्वेदना व्यक्त करै वाला सभा केँ 'श्रद्धाञ्जली सभा' कहब उपयुक्त आ मानक होइछ । 'कार्यक्रम' शब्द सामान्य वा औपचारिक उत्सव, गोष्ठी वा कार्यसँ सम्बद्ध बुझाइछ, जे शोकक गम्भीरताकेँ किछु कम कऽ दैछ ।
पुनरावृत्ति (Redundancy / Repetition):
मुख्य शीर्षकमे 'श्रद्धाञ्जली कार्यक्रम' लिखल गेल अछि । पुन: विवरणक वाक्यमे लिखल अछि - "श्रद्धाञ्जली कार्यक्रम इयह साओन ३१ गते..."।ओकरा ठीक नीचाँ विवरणक बक्सा (Box) पर पुन: 'कार्यक्रम' लिखल गेल अछि । एहि तरहक शब्द पुनरावृत्तिसँ लेखन शैली असंतुलित आ अशुद्ध प्रतीत होइछ ।
वर्ण विन्यास आ कारकगत अशुद्धि:
"साओन" / "श्रावण": तिथिक विवरणमे उपर 'श्रावण' लिखल अछि आ नीचाँ 'साओन'। एकरूपता (Consistency) होएबाक चाही ।
२. शिष्टाचार, आदर आ मृत्युपरान्त 'जी' क प्रयोग (Honorific Terms Post-Decease)
मृत्युपरान्त 'जी' क प्रयोग (विमल जीक (?) / विमलजी(?)):
मैथिली आ संस्कृत परम्परामे दिवंगत (मृत्यु भऽ गेल) व्यक्तित्वक लेल 'जी' सँ बेसी 'स्वर्गीय', 'दिवंगत', 'पुण्यात्मा' वा 'शोकसन्तप्त स्मरणार्थ' जकाँ शब्दक प्रयोग कएल जाइछ ।
'जी' जीवित व्यक्तिक आदरार्थ प्रयोग होइछ । मृत्योपरान्त 'जी' कहब भाषाशास्त्र आ परम्पराक दृष्टिकोणसँ अपूर्ण आ अनुचित मानल जाइछ । ओहोमे कतौहू ‘जी’ के जोडि देब आ कतौहू अलग कऽदेब ?, ई मैथिलीके तोहिन भेल !
३. शब्दावलीक औचित्य आ वैचारिक विवाद (Controversial Titles & Metaphors)
'महामना' उपधिक औचित्य:
'महामना' (उदात्त आ महान् मन भेल) ओहन व्यक्तित्वक लेल प्रयोग होइछ जे समाजमे सर्वमान्य, निष्कलंक आ महान् योगदान देने होथि (जेना महामना मदन मोहन मालवीय) ।
यदि ककरो जीवन वा विचार विवादास्पद रहल होइन, तँ ओहन व्यक्ति लेल सार्वजनिक वा संस्थागत सामग्रीमे 'महामना' जकाँ सर्वोच्च आदरसूचक विशेषण लिखब सर्वसाधारण वा समालोचक लोकनिक लेल विचारणीय आ प्रश्नवाचक बनि जाइछ ।
'ऐंजेरू' (परजीवी/Parasite) आ संघर्षक तुलना:
मधेशमे पहिचान, अधिकार आ सम्मानक लेल भेल जन-संघर्ष वा जन-आन्दोलन केँ 'ऐंजेरू' (जे दोसर गाछक रस चुसि कऽ बाँचैछ) सँ तुलना करब वा ओहि सँग जोडब अत्यन्तै अनुचित आ अपमानजनक अछि ।
पहिचान आ अधिकारक सङ्घर्ष समाजक सजीव आ मौलिक सङ्घर्ष थिक । ओकरा नकारात्मक वा परजीवी (ऐंजेरू) रूपमे प्रस्तुत करब सामाजिक आ ऐतिहासिक सत्यक उपहास थिक ।
जे स्वयं कतेक बेर एहि विवादकेँ मिडिया मार्फत् स्वीकार कऽचुकल छलाह । जे स्वयं ‘हम विवादित छी’ कहैत छलाह, हुनका लेल ‘महामना’ उपाधि कतेक उचित ?
"...साहित्यिक वरिष्ठ साहित्यकार" लिखब शब्दावलीक अतिशयोक्ति (Exaggeration) आ मुद्रण अशुद्धिक प्रतीक थिक । ओतय 'साहित्यक' दुई बेर प्रयोग भेल अछि जे भाषिक संरचनाक त्रुटि अछि ।
अन्तमे , ई निमंत्रण पत्र भाषागत शुद्धता (व्याकरण), शब्द-चयन आ आदर-सूचक परम्पराक हिसाब सँ त्रुटिपूर्ण अछि । श्रद्धाञ्जली सभा जकाँ गम्भीर अवसर पर शब्दक चयन आ व्याकरणक स्वच्छता पर विशेष ध्यान देब आवश्यक होइछ । दिवंगत डा राजेन्द्र विमलप्रति भावपूर्ण श्रद्धाञ्जली ....! हम सभ शुद्ध मैथिली लिखि, हुनका लेल सबसँ पैग श्रद्धा आ सम्मान होएत ।
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