Saturday, 12 April 2025

'मिथिला' बनाम 'लोकमैथिली भाषी क्षेत्र' !

दिनेश यादव
अखन 'मिथिला' नय 'प्राचीन मिथिला'शब्दावलीक प्रयोग उचित अछि । आब उपयुक्त शब्दावली त 'लोकमैथिली भाषी क्षेत्र' होबाक चाहि । किएक त,'मिथिला' आब रहिए नै गेलछ! वर्तमान सीमा,भूगोल आ सरकारी दस्तावेज सबमे सेहो 'मिथिला' नै भेटैत छैक...एही विषयपर हमर एकटा विश्लेषणात्मक आलेख-
परिचय:
‘मिथिला’शब्द 'लोकमैथिली भाषी क्षेत्रक सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आ साहित्यिक परिदृश्यमें गहन महत्व राखैछ । प्राचीन काल में 'मिथिला' एक समृद्ध राज्य छल, जे विदेह, तीरभुक्ति या तिरहुत नामसँ सेहो जानल जाइत छल । एकर सांस्कृतिक आ बौद्धिक परंपरा, विशेष रूप सँ लोकमैथिली भाषा आ साहित्य, आजुक दिन धरि जीवित छै। मुदा प्रश्न उठैछ जे की आधुनिक संदर्भमें ‘मिथिला’ शब्दक प्रयोग उचित छै, या फेर ‘लोकमैथिली भाषी क्षेत्र’ शब्दावली बेशी उपयुक्त होयत ? एकर कारण छै जे वर्तमान भौगोलिक, प्रशासनिक आ सरकारी दस्तावेजसबमें ‘मिथिला’नामक कोनो स्वतंत्र इकाई नै भेटैछ । नेपालक मधेश प्रदेशमे 'मिथिला' शब्द जोडिके 'मिथिला बिहारी पालिका जरूर बनल अछि । मुदा स्वतन्त्र अस्तित्वमे 'मिथिला' मात्र नय बनि सकल । ई बाहेक 'मिथिला'सँ जुडल आधिकारिक नाम वर्तमान संदर्भमें कतौहू उल्लेख कयल नय भेटैक छैक । हाँ, किछु लोकसभ जबर्दस्ती 'मिथिला' लिखि आ बोलि रहल छैथ । विषेष:ब्राह्मणवादी मानसिकता रहल लोकसभ एही शब्दक प्रयोग बलजोरि करि एकर प्रचार-प्रसारमें अपन छठिहारक दूध पीबिक करि रहल छैथ !
प्राचीन मिथिला: ऐतिहासिक संदर्भ :
प्राचीन मिथिला एक शक्तिशाली राज्य छल, जकर उल्लेख शतपथ ब्राह्मण, वाल्मीकीय रामायण, महाभारत, पुराण आ जैन-बौद्ध ग्रंथसबमें भेटैछ। ओ मिथिला, जे विदेह राजाक राजधानी छल, बौद्धिक आ सांस्कृतिक केंद्रक रूपमें विख्यात छल। शतपथ ब्राह्मणक अनुसार, मिथिला नदीक बहुलताक कारण दलदली भूमि छल, जे अग्निदेवक आशीर्वाद सँ रहबा योग्य बनल । वृहद्विष्णु पुराणमें मिथिला-माहात्म्य खंड मिथिलाक पवित्रता आ सीताक जन्मभूमिक रूपमें एकर महिमा वर्णन भेटैक छैक । मुदा ई सबटा के आधार अवैज्ञानिक मात्र अछि ।
जहाधरि सीमाक बात अछि- प्राचीन मिथिलाक भौगोलिक सीमा विशाल छल। एकर पश्चिममें गंडकी, पूबमें महानंदा, दक्षिणमें गंगा आ उत्तरमें हिमालयक तलहटी(नेपालक वर्तमानमधेश प्रदेश आ कोशी प्रदेश किछु भूभाग) तक विस्तार छल। ई क्षेत्र वर्तमान बिहारक उत्तरी हिस्सा, नेपालक मधेश आ झारखंडक संथाल परगना तक फैलल छल । मुदा, मध्यकालसँ मिथिलाक राजनीतिक इकाईक रूप धीरे-धीरे लुप्त भ’ गेल, आ तिरहुत सरकारक रूपमें एकर उल्लेख आयनी-अकबरी में भेटैछ।
वर्तमान संदर्भ: मिथिला कत’ गेल ?
आजुक दिनमें ‘मिथिला’ कुनो प्रशासनिक या सरकारी इकाईक रूपमें अस्तित्वमें नय छै। पडोसी देश भारतक संविधान, भौगोलिक मानचित्र, या सरकारी दस्तावेजसब में ‘मिथिला’ नामक कुनो जिला, प्रखंड या राज्यक उल्लेख नहिं भेटैछ । नेपालमे त छहिए नय । बिहार में तिरहुत, दरभंगा, कोसी, पूर्णिया आ मुंगेर जकाँ प्रमंडल भौगोलिक रूपसँ मिथिलाक पुरान सीमासँ मेल खाइछ, मुदा प्रशासनिक रूपसँ एहि सबहक अलग-अलग पहचान छै। उदाहरणक लेल, बिहारक जिला जकाँ दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सुपौल, सहरसा आ मधेपुरा मैथिली भाषी क्षेत्रक प्रमुख हिस्सा छै, मुदा सरकारी दस्तावेजमें एहि सबकें मिथिला नय, बल्कि अलग-अलग जिला कहल जाइछ।
पहिने ही उल्लेख कए चुकल छी जे, नेपालमें सेहो मधेश आ कोशी प्रदेशक तराई क्षेत्र मैथिली भाषी छै, मुदा एकर प्रशासनिक नामकरण मिथिलासँ संबंधित नय छै। भारतक 2011 जनगणनाक आधार पर, मैथिली भाषी जनसंख्या बिहारक उत्तरी हिस्सा आ नेपालक मधेशमें केंद्रित छै, मुदा ‘मिथिला’ नामक कुनो आधिकारिक क्षेत्र नय भेटैछ।
‘लोकमैथिली भाषी क्षेत्र’क उपयुक्तता:
‘लोकमैथिली भाषी क्षेत्र’ शब्दावली वर्तमान संदर्भमें बेशी उपयुक्त प्रतीत होइछ, किएक त ई मैथिली भाषा आ एकर बोलनिहार समुदायक सांस्कृतिक एकता पर जोर दैछ, बिना कुनो लुप्त राजनीतिक या भौगोलिक इकाईक दावा करबाक । मैथिली, जे भारतीय संविधानक आठवीं अनुसूचीमें शामिल छै, बिहारक लगभग 12% आ नेपालक मधेशक एक बृहद हिस्साक मातृभाषा छै। ‘लोकमैथिली भाषी क्षेत्र’ शब्द एकर सांस्कृतिक पहचानकें जीवित राखैछ, जेना जे विद्यापति, मिथिलाक्षर (तिरहुता) लिपि, आ मिथिला चित्रकला जकाँ परंपरासब।
उदाहरण - मिथिला चित्रकला (मधुबनी पेंटिंग) आजू विश्वविख्यात छै, आ एकर पहचान मधुबनी जिलासँ जुड़ल छै,नय कि कुनो ‘मिथिला’ नामक प्रशासनिक क्षेत्रसँ । ताहि तरहें, मैथिली साहित्यक संरक्षण आ प्रचार मिथिलाक्षर लिपि आ साहित्यिक संस्था जकाँ विद्यापति सेवा संस्थानक माध्यमसँ भ’ रहल छै, जे क्षेत्र विशेषक बजाय महाकवि, भाषा आ संस्कृति पर केंद्रित छै।
‘मिथिला’ शब्दक प्रयोग: पक्ष आ विपक्षमें तर्क:
सांस्कृतिक निरंतरता: मिथिला शब्द सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक गौरवकें प्रतिबिंबित करैछ । मिथिलाक बौद्धिक परंपरा, जेना जे याज्ञवल्क्य, गार्गी, आ विद्यापति, आजू सेहो प्रासंगिक छै।
लोकमानसमें स्वीकार्यता: सामान्य लोक मिथिलाकें सीताक जन्मभूमि आ मैथिली संस्कृतिक प्रतीकक रूपमें देखैछ।
प्रतीकात्मक महत्व: मिथिला शब्द एकर साहित्य, कला, आ दर्शनक समृद्धिक प्रतीक छै, जे क्षेत्रीय सीमासँ परे छै।
विपक्षमें तर्क:
प्रशासनिक असंगति: आधुनिक भूगोल आ सरकारी दस्तावेज सबमें मिथिला कुनो स्वतंत्र इकाई नय छै। एकर प्रयोग भ्रम पैदा करैछ, जेना जे मिथिलाकें एक अलग राज्यक मांग सँ जोड़ल जाइछ।
सीमित भौगोलिक प्रासंगिकता: मिथिलाक प्राचीन सीमा आधुनिक जिला-प्रमंडलसँ मेल नय खाइछ। उदाहरण, कोसी प्रमंडलक किछु हिस्सा मिथिलाक अंतर्गत गनल जाइछ, मुदा एकर संस्कृति अंगिका या अन्य प्रभाव सँ सेहो जुड़ल छै। गण्डक क्षेत्र बज्जिका आ भोजपुरी या अन्यसँ जुडल छै ।
लोकमैथिली भाषी क्षेत्रक समावेशिता: ई शब्द मैथिली बोलनिहारसभकें एकजुट करैछ, चाहे ओ बिहार, नेपाल, या अन्यत्र रहै। ई शब्द मिथिलाक ऐतिहासिक बोझसँ मुक्त छै।
उपयुक्त शब्दावली कोन छै?
‘मिथिला’ शब्दक प्रयोग सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक संदर्भ में उचित छै, जखन कि प्रश्न एकर गौरवमय अतीत, साहित्य, या धार्मिक महत्वसँ संबंधित हो। मुदा, जखन बात आधुनिक भौगोलिक, सामाजिक, या प्रशासनिक परिदृश्यक होइछ, त ‘लोकमैथिली भाषी क्षेत्र’ बेशी उपयुक्त छै। कारण:
समकालीन प्रासंगिकता: ई शब्द मैथिली भाषी समुदायकें समेटैछ, बिना कुनो भौगोलिक या राजनीतिक दावाके ।
स्पष्टता: सरकारी दस्तावेज आ जनगणनाक आधार पर मैथिली भाषी क्षेत्रक पहचान साफ छै, जखन कि मिथिला शब्दक भौगोलिक सीमा अस्पष्ट छै।
समावेशिता: ई शब्द बिहार, नेपाल, आ अन्य क्षेत्रक मैथिली भाषीसभकें एक मंच दैछ।
उदाहरण: जखन मिथिला चित्रकला (मधुबनी पेंटिंग)क बात होइछ, त ‘मिथिला’ शब्द सांस्कृतिक रूपसँ प्रासंगिक छै, मुदा एकर उत्पादन आ प्रचार मधुबनी, दरभंगा, या अन्य जिलासँ जुड़ल छै नय कि कुनो एकीकृत ‘मिथिला’ क्षेत्रसँ।
मैथिली साहित्यक संदर्भ में, विद्यापति सेवा संस्थान या मिथिलाक्षर लिपिक प्रयास ‘लोकमैथिली भाषी क्षेत्र’क अवधारणाकें मजबूत करैछ, जे बिहार आ नेपालक सीमा पार करैछ।
बिहारक शिक्षा विभागक 2024क एक दस्तावेजक अनुसार, मैथिली भाषाक पठन-पाठन बिहारक उत्तरी जिला - दरभंगा, मधुबनी, आ सुपौल में होइछ, मुदा एकर लेल ‘मिथिला’ शब्दक बजाय ‘मैथिली भाषी क्षेत्र’क उल्लेख भेटैछ।
निष्कर्ष
‘मिथिला’ शब्दक प्रयोग ऐतिहासिक आ सांस्कृतिक संदर्भमें अपन गहन महत्व राखैछ, मुदा आधुनिक भौगोलिक आ प्रशासनिक परिप्रेक्ष्य में ‘लोकमैथिली भाषी क्षेत्र’ शब्दावली बेशी उपयुक्त छै। ई शब्द नय केवल मैथिली भाषा आ संस्कृतिक जीवंतता कें प्रतिबिंबित करैछ, बल्कि आधुनिक सीमा आ सरकारी दस्तावेजसबसँ सेहो मेल खाइछ। मिथिलाक प्राचीन गौरवकें संजोय राखल जरूरी छै, मुदा एकर वर्तमान पहचान ‘लोकमैथिली भाषी क्षेत्र’क रूपमें बेशी स्पष्ट आ समावेशी छै।
संदर्भ :
शतपथ ब्राह्मण आ वृहद्विष्णु पुराण, मिथिलाक ऐतिहासिक विवरण।
भारतीय संविधान, आठवीं अनुसूची।
विद्यापति सेवा संस्थान आ मिथिलाक्षर लिपि, मैथिली साहित्यक संरक्षण।
बिहार आ नेपालक मैथिली भाषी क्षेत्रक जनगणना आ भौगोलिक विवरण।
सामाजिक मंच पर मिथिलाक सांस्कृतिक उल्लेख।
मधेश प्रदेशक दस्तावेज । (नोट: ई हमर नितान्त निजी विचार अछि)

8 comments:

  1. निक विश्लेषण !

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  2. मिथिला आ मैथिलीके रट लगेनिहार सभके लेल आँइख खोलि देबाक लेल बेजोड दवाई ई आलेख भँ सकैत अछि ।

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  3. प्रणाम ! हम दरिभंगा सँ मनोज झा , मधेशनामा पर अपने के आलेख पढैत रहैत छी । अपनेके विषयवस्तु विश्लेष्णात्मक रहैत अछि । अई तरहे आलेख अई पार के लेखकगण सँ कमे उमिद अछि । चलू निक बहसक सुरूआइत केलौहू, धन्यवाद । आशा अछि जे ई आलेख प्राचीन मिथालाके फेर सँ जोड़बाक काज मे मिलक पाथर बनौक । जय मिथिला ! ● मनोज झा, दरभंगा, मिर्जापुर, बिहार (भारत) !

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  4. मान्यवर ! दिनेश जादो जी, अपने मिथिला मे जकड़ल ब्राह्मणवाद के सक्त विरोधी छी , से जनितब हमरा हेल्लो मिथिलावालासँ भेटल छल । मुदा अई लेख पढ्लाक बाद तेहेन नई लागल । कहुना के मैथिली के बचाउ ! ●मनमोहन मिश्रा, कोइलख, मधुवनी (भारत)

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  5. Nice a piece ! #Madheshiya Pankaj, UAE

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  6. नई बहस ! @राम मनोहर आर्य, मुंबई भारत ।

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  7. मिथिला पर कैला अहाके मथापिप्चि हबे ? रामदरश कोईरी , बर्दिबास, महोत्तरी , मधेश प्रदेश

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  8. देखियौ ई पतलकार के काम ! नव नव बहस के जनम दैत ऐछ । @सीता मैया, सीतापुर , सिरहा ।

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