Thursday, 10 February 2022

मैथिलीक' दुर्गति कियैक?

दिनेश यादव
आजू हम मैथिली आ मिथिलाके दशा आ दिशा पर बात कँ रहल छी । हम अपन एकगोट तित अनुभवसँ अई विषय पर चर्चक अनुमति मागैत छी - सन् १९८६–१९९५ धरि हम दडिभंगामे बितेलौहूँ । मारवारी कलेजसँ इन्टर कयलाके बाद बिहारके चर्चित आ धरोहर रहल सीम साइन्स कलेजमे बीएस्सी भौतिक शास्त्र (प्रतिष्ठा) मे नामांकन भेल । एही कलेज में श्रीरामपुर दरभंगा के विनोद मिश्र(विद्यार्थी) नेतासँ हिमचिम बढल । नेता साथी पाबी हम बढ हर्षित भेलौहूँ । एक दिन ओ कहलैत जे बाबा बैजनाथ चौधरी मिथिला राज्यके आन्दोलनक' लेल महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह मेमोरियल कलेजमें बैसार केने छथि , चलु हमसभ लोक । मैथिली के अपन मायके बोली ठानि हम हुनका संगे विदा भँ ओतए पहुँच गेलौहूँ। ओतेह, विद्यार्थी सभहक उपस्थिति निक रहन्हि । विनोद जी हमरा कहलैत जे आजुक बैसारमे बेसी बाभन भँ गेलैनि,अहॉ #ब्रह्माणेत्तर छी, प्रतिनिधिके रुपमे रह पडत । हम 'हा' कहि देलियै । तकर बाद विनोद जीके नेतृत्वमे सज्जन चौधरी, अवधेसकुमार झा, बच्चाजी झा , बौआजी झा, मनोरञ्जन ठाकुर, दिग्विजय झासहित बहुत रास मित्र लोकन्हि संगैह बेर–बेर मिथिला राज्यके लेल विद्यार्थी आन्दोलनमे सरिक भेलौहूँ । आन्दोलनक क्रममें बाबा बैजुसंग मात्र एक बेर साक्षात्कार भेल रहए । हुनक ओजपुर्ण अभिव्यक्ति आ जोशगर भाषण हमरा मोही लेले रहए ।
हम क्रान्तिकारी मिथिला आन्दोलनमे सक्रिय भँ गेलौहूँ । मुदा हमर क्रान्तिकारिता बेसी दिन नए टिकल, कारण जे ओतेह गैर–ब्राहमणके दोसर दर्जाके आदमी जका व्यवहार होमे लागल । तक्कर बाद हम कार्यक्रम सभमे जेनाइए छोडि देलौहूँ । मुदा मैथिली भाषाप्रतिके हमर मोह भंग नए भेल । हमर ई मोह आकाशवाणी दरभंगा दिशि बैढ गेल । ओतेह सँ प्रसारण होमेवाला कृषि कार्यक्रम मे खुरखुर भैइया के सुनैत रहौं, मैथिलीके गीतनाद हमर बड निक लागैत छल, अछि । बादमे खुरखुर भैइयाके कार्यक्रममे प्रतिक्रिया आ मैथिली गीतक फरमाईस पत्र पठबति छलौहूँ । ई क्रम आठ वर्षधरि जारी रहल । स्वदेश नेपाल फिर्ला के बाद राजधानी सँ प्रसारित एकटा एफएममे सेहो मैथिलीमे पत्र पढाबै लगलौं । इन्जिनियरिङ कलेजमे एकगोट मैथिली कविता गोस्टिके आयोजन नियमित रुपमे होइत रहए, ओहूमे हमर सक्रियता किछु दिन बढिया रहल । ओतेह मैथिलीमे गीतो गेने रही हम । २०५२ सालमे रेडिया नेपालमे मैथिली भाषामे गीत सेहो गेने रही हम । ओतैह किछ अउर मैथिली भाषी लोकसभसँ सम्पर्क बढ्ल । मुदा जतेक भेटल किछु अपवादके छोडि दिऔ त सभटा ठगे भेटल । ओकरा बाद हम अपन डेग रसे रस पछा करए लगलौहूँ । एही बीचमे वागमतिमे बहुत राश जल बहि चुकल छल ! नटवरलाल सभ सेहो बढि गेल छल,अछि । सभटाके अपनेटा मात्र सुझैय लागल छल ।
आजु २५ वर्ष बित गेल मुदा मिथिला आ मैथिली ठामेठाम अछि । हा एही क्षेत्रमे संचार माध्यममे बृद्धि के कारण प्रचारप्रसारमे बढोतरी जरुर भेल छई । किछु गैर–ब्राहमणके छोडि अतिबाद ब्राह्मणवादीसभ मैथिली आ मिथिलाके नाममे ठिकेदारीमे जुटल देख मोन कलुषित भँ जाएत अछि । आब फेर मिथिला आन्दोलनक बात भँ रहल अछि, मुदा हमर मनमे एकेटा जिज्ञासा सदैब रहलए जे कि मैथिली ब्राह्मणवादी सोच रखनिहार लोकन्हि के मात्र थिकैह ?, कि आन मिथिलावासी ओकर पछुवा मात्र थिकैह ? यदि नए, त एकैह जाति विशेषक परिहनके कियैक मिथिलाके शान ब्राह्मणवादीसभ मानि रहल छैक आ ओकेरे प्रचारमे कियैक अपन ऊर्जा फुँइक रहल छैक ? २५ वर्षके दौरानमे हमरा सम्पर्कमे आजुधरि दलित या शिल्पीकार, मुस्लिम समुदायके प्रतिभासभ मैथिली साहित्य आ आन विषयमे कियैक नए उभरिके आएल छैक? भँ सकैत अए जे हम गल्ति कही रहल छि ! मुदा ई एकटा यथार्थ आ यक्ष प्रश्न आजुक दिन मे मिथिलावासीके समक्ष मुँह बोने ठाड अछि । कि मैथिली आ मिथिला व्यापार करबाक सामग्री छी? किछु लोग एकरा अपन चाँदी कटाई के विषय बनाओत अछि । अन्तमे, मिथिला आ मैथिलीके जोडबाक अछि त ओछपन आ दरिद्र मानसिकता सबके त्यागि आगा बढए पडत , नई त मिथिलाके नाम पर नेमनचुस दए फुसलाबय बलासभके कोनो कमी नए छैक । सचेत आ सावधान रहि आगा बढि, जातिपातिके अलग राखि अग्रगमन दिशि जौ नए बढव त मिथिला माय हक्कन सदैब एहिना कानैति रहती । जय हो ।

No comments:

Post a Comment