Friday, 13 June 2025

मैथिली भाषा : पृष्ठ एक, शैली अनेक

राष्ट्रिय दैनिक गोरखापत्रमें मासिक रूपसँ प्रकाशित होएवाला मैथिली पृष्टमें बेर-बेर भँ रहल अक्षम्य त्रुटी पुन: दोहराओल गेल अछि । निचा देल गेल २०८२ जेठ २ गते शुक दिनक मैथिली भाषा पृष्ठ एक साक्षात प्रमाण थिक । एकैह पृष्ठमें अनेकन शैली फेरसँ पुनरावृत्ति भेल छै (पृष्ठ देखू) । फोटो क्याप्सन सहितके पाँचटा सामग्रीमे पृथ्थक-पृथ्थक शैली देखाइत अछि । मुख्य सामग्रीमे शीर्षकमें उल्लेखित शब्दाबली एकर विषयवस्तुके प्रायः हरेक वाक्यमें दोहराओल गेल छै । एहि सामग्रीमें भाषाशैली विरोधाभाषपूर्ण आ कमजोर छै । उदाहरण : 'बिराजमान' शब्दक प्रयोग निर्जीवताक भाष्यमें प्रयोग भेल अछि । तहिना कतौहू 'देश/विदेश', कतौहू 'देश-विदेश' आ 'देश या विदेश' लिखल छै ? कतौहू 'नई'कतौहू 'नहि'के प्रयोग छै । 'सभ' आ 'सब'के प्रयोग व्याकरणीय दृष्टिसँ बेमेल छै । ई शब्दक प्रयोग समग्र पृष्ठमें फरक -फरक भेटैछ..।
समग्र पृष्ठमे, 'मे','के', 'सँ' आदिके प्रयोगमे एकरूपता नहि छै । कतौहू 'छन्हि',कतौहू 'छनि'...लिखल भेटैछ । 'जनकविताक कालजयी शिल्प:भगैत'शीर्षक सामग्रीमे 'देवपुरूष'शब्दक प्रयोग लोकजन आ लोकमैथिलीसँ बेमेल अछि .....'गोसाईं' या 'देवतापित्तर' चलनक शैली अछि..। एतेह,समग्र पृष्ठमे चिन्हित अक्षरसब प्रमाणके लेल प्रस्तुत् अछि । ...बाँकी बुद्धिजीवि आ सुधि पाठक लोकैन पर निर्णय करबाक हक हस्तान्तरण कए रहल छी ।

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