Thursday, 11 December 2025

जनकपुरधामक इतिहास लेखनमे प्रमाणिकता आ चुनौती (Authenticity and Challenges in Writing the History of Janakpur Dham)

–दिनेश यादव
उपेन्द्र नागवंशीक समीक्षा कठोर भेलाक बाद ई आवश्यक छल । एहि समीक्षा सँ जनकपुरधामक इतिहास लेखनमे भेल त्रुटि उजागर भेल आ भविष्यमे प्रमाणिक, खोजमूलक आ व्यवस्थित इतिहास लेखनक आवश्यकता स्पष्ट भेल। शशिक पुस्तक आधुनिक जनकपुरधामक सामाजिक–राजनीतिक आयाम केँ जीवन्त बनबैत अछि, मुदा प्राचीन मिथिला–विदेह–तिरहुतक इतिहासमे ठोस साक्ष्यक अभाव आ तथ्याङ्कीय त्रुटि पुस्तक केँ कमजोर बनबैत अछि । जनकपुरधामक इतिहास लेखन आब अनुमान आ किवदन्तीमे सीमित नहि रहि, प्रमाणिक अनुसन्धान पर आधारित होबाक चाही ।
विदेह–मिथिला–तिरहुत क्षेत्रक ऐतिहासिक महत्व अत्यन्त गहिरगर अछि । एहि भूभागक सांस्कृतिक, धार्मिक आ सामाजिक योगदान दक्षिण एशियाक सभ्यताक विकासमे विशेष स्थान रखैत अछि । मुदा एहि क्षेत्रक प्रमाणिक इतिहास लेखनमे आजुक दिन धरि ठोस साक्ष्यक अभाव देखाइत अछि । प्राचीन मिथिला वा जनकपुरधामक इतिहास लेखनमे श्रुति, ब्राह्मणवादी साहित्य आ किवदन्तीक प्रभाव हावी रहल अछि, जे तथ्यपरक अनुसन्धान केँ कमजोर करैत अछि ।
शशिक पुस्तक आ नागवंशीक समीक्षा:
श्यामसुन्दर शशिद्वारा लिखित जनकपुरधामके इतिहास जनकपुरधामक ऐतिहासिक आयाम केँ समेटबाक प्रयास अछि । प्रयास प्रशंसनीय अछि, मुदा पत्रकार उपेन्द्र नागवंशी जनकपुर टुडेक विचार पृष्ठमे प्रकाशित समीक्षा मे पुस्तकक विभिन्न कमजोरी उजागर कएलनि ।
तथ्याङ्कीय त्रुटि आ विरोधाभासः
जनक वंशक कालावधि (३००–६०० ई.पू. बनाम ७२५ ई.पू.) मे असंगति ।
महाभारत युद्धक समय ई.पू. ९५० उल्लेख, जे ऐतिहासिक दृष्टि सँ असंगत ।
नगर पञ्चायत गठन वर्ष (२०१६ बनाम २०१७) आ रेल्वे सञ्चालन वर्ष (१९८२ बनाम १९९२) मे विरोधाभास ।
शैलीगत कमजोरी :
पत्रकारितामुखी भाषा प्रयोग सँ इतिहास भ्रमित भेल अछि ।
पहिल भागक प्रसंग दोसर भागमे पुनः दोहरायल ।
जनकपुर उपमहानगरपालिकाक प्राचीन स्थलसभक इतिहास पर्याप्त रूपेँ समाविष्ट नहि भेल ।
प्रमाणिक इतिहास लेखनक आवश्यकता:
नागवंशीक टिप्पणी अनुसार, पुरातात्त्विक उत्खनन, अभिलेखीय अध्ययन, मौखिक परम्पराक व्यवस्थित संकलन आ प्रमाणिक स्रोतक पुष्टि बिना लिखल इतिहास अमूर्त भऽ जाइत अछि । कालक्रम, वर्ष, वंशावली आ घटनाक्रम केँ प्रमाणिक स्रोत सँ पुष्टि नगरी प्रस्तुत करब पाठकप्रति अन्याय अछि ।
भविष्यक लेल सुझाव:
विश्वविद्यालय, अनुसन्धान संस्था आ स्थानीय निकाय सँ सहकार्य कए प्रमाणिक इतिहास लेखन केँ प्रोत्साहन देब जरुरी अछि । तथ्याङ्कीय त्रुटि केँ सुधार करतै आगामी संस्करण केँ व्यवस्थित बनाबक आवश्यक अछि । पत्रकारितामुखी शैली सँ अलग, सरल आ खोजमूलक इतिहास लेखन शैली अपनाबक सेहो जरुरी अछि । प्राचीन स्थलसबके इतिहास केँ पर्याप्त रूपेँ समाविष्ट करब अति आवश्यक अछि ।
उपेन्द्र नागवंशीक समीक्षा कठोर भेलाक बाद ई आवश्यक छल । एहि समीक्षा सँ जनकपुरधामक इतिहास लेखनमे भेल त्रुटि उजागर भेल आ भविष्यमे प्रमाणिक, खोजमूलक आ व्यवस्थित इतिहास लेखनक आवश्यकता स्पष्ट भेल। शशिक पुस्तक आधुनिक जनकपुरधामक सामाजिक–राजनीतिक आयाम केँ जीवन्त बनबैत अछि, मुदा प्राचीन मिथिला–विदेह–तिरहुतक इतिहासमे ठोस साक्ष्यक अभाव आ तथ्याङ्कीय त्रुटि पुस्तक केँ कमजोर बनबैत अछि । जनकपुरधामक इतिहास लेखन आब अनुमान आ किवदन्तीमे सीमित नहि रहि, प्रमाणिक अनुसन्धान पर आधारित होबाक चाही । एहिके लेल मिथिला–विदेह–तिरहुत क्षेत्रक गौरवशाली इतिहास केँ विश्वसामु विश्वसनीय रूपेँ प्रस्तुत कएल जा सकैत अछि ।

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