नेपाली कांग्रेसक 5 कमजोरी
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| –दिनेश यादव |
नेपाल मे“ सब स“ बेसी सत्ताधिश रहल दल, नेपाली कांग्रेस अछि । मुद्दा देश के“ निकास देबा मे सदखरि ओ चुकैत आबि रहल अछि । प्रधानमन्त्री स“ ल के“ मन्त्रि धरि सब स“ बेसी कांग्रेसीजन बनल इतिहास साक्षी छैक । एतबी नए सब स“ पैघ मतदाता मधेसी रहितौ मधेसीजन पार्टी मे सबदिन वहिष्करण मे“ मात्र रहल । कांग्रेस पाटी कहियौं मधेस मैत्री नए रहल । जए पार्टी मे सब स बेसी मसेसी रहितौं मधेस के कल्याण नए हुए त ओकरा निक संकेत नए कहि सकैत छि ।
- २०१५ साल मे“ नेपाली कांग्रेस १०९ स्थान में चुनाव जितलक । अति कमजोर प्रतिपक्ष के“ साथ सत्तामे गेल । ई पार्टी ओही समय तत्कालीन सत्ता के“ मूल विषय बनौने छल । दबि के“ रहल सामन्ती राजतन्त्र के“ कमजोर बनेबाक लेल संसद् मे उपस्थित नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी लगायत अन्य दलस“ग सहकार्य कएबाक आवश्यकता नए ठानलक । तत्कालीन अन्तर्राष्ट्रिय परिस्थिति मे“ दुई पडोसी देश के“ साथ बिपी कोइरालाक नेतृत्व मे“ बनल नेपाली काग्रेसक सरकार सन्तुलित व्यवहार कएबाक विषय मे“ चुकि गेल ।
- २०१७ साल मे“ राजा महेन्द्र के द्वारा कएलगेल ‘कू’ के“ रोकबा मे“ कांग्रेस असमर्थ भेल छल । कारण छल जे चार सिट मे विजयी रहल तत्कालिन संसद मे“ उपस्थित नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी के संग ओ सहकार्य कएके ओकरा रोकि सकैत छल , मुदा चुकि गेल । ओही“ समय के“ जनताक भावना के“ जौ विश्लेÈण्ँ कएल जाए त राण्ाँ वा राजाक निरंकुशता किनको मान्य नए छल । संसदीय राजनीति के“ मजबुत बनेबाक आ सामन्ती निरंकुशता के परास्त करबाक लेल एतक सभ प्रजातन्त्रप्रेमी राजनीतिक पार्टी स“ सहकार्य कएबाक लेल नेपाली कांग्रेस के“ प्रस्ट बहुमतसहित नेतृत्व प्रदान कएने छल । मुदा, ओही“ जनादेश के“ नेपाली कांग्रेस अपव्याख्या केलक, परिण्ाँमस्वµप ३० वर्Èक पञ्चायती तानाशाही व्यवस्थाक सिकार नेपालीजन के“ बनए पडल ।
- २०४६ साल मे“ जनआन्दोलनक सफलताक पश्चात नेपाली जनता पुन ः कांग्रेस के“ बहुमत आ एमाले के“ सशक्त प्रतिपÔक भूमिका प्रदान कएने छल । जनआन्दोलन के“ दबाब मे“ सम्झौतामार्फत एक कदम पाछा घुसकल सामन्ती निरंकुश राजतन्त्र के“ जनआन्दोलनकारी राजनीतिक शक्ति सहकार्य करैत समाप्तिक दिशादिश लजेबाक अवस्था रहैए । मुद्दा नेपाली कांग्रेस फेर सत्ता के“ अकंटक मानलक । प्रतिपÔ के“ कोनो धरानी पेलनाए अप्पन रण्ँनीति अवलम्बन केलक , ई बात जनादेशक प्रस्ट अपमान र अपव्यख्या छल । परिणाम स्वरुप बहुमत प्राप्त कांग्रेस अपन कार्यकाल पुरा नए क“ सकल, मध्यावधि निर्वाचन मे मुलुक के“ दौडा देलक । एतबी नए, ओ, तत्कालिन कट्टर राजाबादी सूर्यबहादुर थापा के“ का“धक टेका बनाके सत्ता भोग के उन्माद मे“ फ“सी गेल ।
- २०६२÷०६३ सालक तुमुलकारी आन्दोलन सामन्ती निरंकुश राजतन्त्र के“ मात्र अन्त्य नए कएकल, जनयुद्ध, जनआन्दोलन, मधेस आन्दोलनक तिमिर स“ उठल संविधानसभा, संघीयता आ समावेशीकरण्ँक मुद्दा आत्मसात करैति देश के“ आगा बढएबाक विषय मे“ सेहो कांग्रेस चुकि गेल । ते“ संघियताक लेल मधेस आ मधेसिया के“ दु बेर आन्दोलन कएबाक विवशता आबि गेल । कांग्रेसक नेता गिरिजाप्रसाद कोइरालाक नेतृत्व मे“ रहल सरकार मधेसी जनताक संघियताक मुद्दा के“ खुद्रा मे“ सम्बोधन कएलक, एहो ओकर बहुत पैघ चुक छल । २४० वर्È स“ जारी सामन्ती राजतन्त्रक विधिवत् अन्त्यक लेल ऐतिहासिक कार्यभार पूरा त कांग्रेस कएलक मुद्दा संविधानसभा स“ संविधान जारी करबाक दोसर प्रमुख कार्यभार कांग्रेसक अवरोधक कारणे सम्पन्न नए भ“ सकल ।
- २०७० साल मे“ अनेक आशंका, भय आ असहमति के बाबजूद दोसर संविधानसभाक निर्वाचन सम्पन्न भ“ नेपाली कांग्रेस के जनता सब स“ बडका दल बनौलक । आ ओ अखन सत्ताक मू“ह मे“ पहु“ल अछि । सत्ता के छिनाझपटी मे ओ अखन एनाक“ ओझरागेल अछि जे ओकडा कोनो आन विषय अनसुहात लागि रहल छैक । ओ“ मात्र अपने नेतृत्वक सरकार के पक्षपाती बनि बैसल अछि । ते“ कांग्रेस संविधानसभा गठन आ वर्तमान खिलराज रेग्मी नेतृत्व के“ गैर–दलिय सरकारक वर्हिगमन मुद्दा के“ बन्धकी रखैत फेर अपने नेतृत्व के“ सरकार बनएबाक दाऊेपेच आ मकडजाल मे“ ओझाएल अछि । एही“ स“ गैर–कांग्रेस पार्टी स“ मात्र टकराब कायम नए भेल अछि कांग्रेस भित्तर सत्ताक नेतृत्व के लेल अन्तर पार्टी नोकझोंक ओतबे बढल अछि । सरकारक नेतृत्व के कर्ता ? विषय मे कांग्रेस के“ ‘थ्रि इडिएट्स’ नेतासभ मे“ जुधमबद्ध आ मलयुद्ध भ“ रहल अए । कथोकंथचित नेपाली कांग्रेस के कोनो नेता के“ नेतृत्व मे“ एमाले के“ साथ मिलजुलि के“ सरकार बनएबाक स्थिति जौ आएत, ओ सरकार त सञ्चालन करत मुदा संविधान निर्माण्ँ दिल्ली दूर होएबाक अवस्था देखबा मे“ आबि रहल अछि । आ सहमति नए भेलाक कारणे जए धरानी पिछला संविधान सभाक विघटन भेल , फेर ई बात नए दोहराएत तकर गैरान्टी नए छैक । किएक त अखन के परिस्थिति आ पहिल के स्थिति मे कोनो तात्विक भिन्नता नए छैक । बिना सहमति के“ संविधान निर्माण्ँ सम्भवे नए छैक, सबटा दल के समेट के“ नेतृत्व देबाक अवस्था मे सेहो कांग्रेस तत्काल नए अछि । एही“ विषय मे कांग्रेस नेतृत्व चुकि रहल अछि । यदि एहा स्थिति रहल त शोषित, पीडित, उपेक्षित वर्ग, जाति, लिंग आ धर्म आब चुप्पी सा“धि के नए बैसता, ओ आन्दोलन के आगा बढौता , ई बात कांग्रेस नेतृत्व के“ बुझ पडत । किएक त, नेपाली कांग्रेस कें जनता स“ प्राप्त जनादेश राष्ट्रपति बचेबाक लेल आ प्रधानमन्त्री पद सेहो अपने पोल्टा मे“ रखबाक लेल नए अछि, सहमति मे“ अपन बाचा पुरा करैत निर्धारित समय मे“ संविधान जारी कएबाक लेल अछि । मुद्दा कांग्रेस नेतृत्व एही“ के सशक्त रुप स“ आगा नए बढा सकि रहल अछि । (काठमाण्डू स“ प्रकाशित भ“ रहल अपन मिथिला मासिक पत्रिका के“ लेल ई आलेख २०७० , पुस–माघ माह अंक के“ लेल लिखने रही )
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