Saturday, 20 June 2026

मैथिलीसँ हिन्दी अनुवादमे त्रुटि : मूल कथाकार स्वयं अनुवादक रहल एकटा कथा

अनुवाद भाषाक विभिन्न रूपक' एकटा ईन्द्रधनुष जेकाँ रंगीन होएत अछि । भाषाशास्त्री डा. भोलानाथ तिवारीक कथन अछि— 'अनुवाद शिल्प सेहो होएत अछि, कला आ विज्ञान सेहो ।' ई विचार अनुवादक लेल सिद्धान्तनिष्ठ आ वस्तुपरक मार्गदर्शन प्रदान करैत अछि । अनुवादकमे मूल भाषाक गहन ज्ञान, स्पष्टता, शुद्धता, सरसता, प्रवाहमय शैली, पदक्रमक समझ आ दायित्वबोध रहबाक अपेक्षा होइत अछि । मैथिली सँ अन्य भाषामे भेल अनुवादमे एहि गुणसबकेँ कमी प्रायः देखाइत अछि । हालक उदाहरण दीपिका झाक व्यंग कथा ‘एक ही पंथ’ अछि । कथाकार स्वयं अनुवादक रहला, मुदा अनुवादित रूपमे त्रुटि भेटल । दोसरक कृतिक अनुवादमे त्रुटि क्षम्य भए सकैत अछि, मुदा अपन लिखल कथाकेँ अपने अनुवादमे त्रुटि करब अक्षम्य मानल जाएत अछि ।‘अंतरंग’ पत्रिकाक अंक 37–38 (जनवरी–जुन 2026) मे प्रकाशित झाक अनुवादमे तेहने त्रुटि देखाइत अछि । ई उदाहरण स्पष्ट करैत अछि जे अनुवादक लेल केवल भाषाज्ञान पर्याप्त नहि, बल्कि जिम्मेदारी आ सूक्ष्मता सेहो अनिवार्य अछि ।
दीपिका झाक मैथिली व्यंग्य-कथा "एक ही पंथ" क हिंदी अनुवादक समीक्षाकेँ मैथिली भाषामे नीचाँ विश्लेषण कएल गेल अछि । ई अनुवाद स्वयं कथाकार द्वारा कएल गेल अछि, जाहिमे किछु व्याकरणिक (Grammatical) आ शैलीगत (Stylistic) त्रुटि वा सुधारक गुंजाइश देखि पड़ैत अछि:
1.व्याकरणिक त्रुटि (Grammatical Errors)
सर्वनामक असंगत प्रयोग (Pronoun Inconsistency):
​त्रुटि: पहिलहि पंक्तिमे लिखल अछि— "मेरे एक मित्र हैं, उनका नाम राजवीर शेखर है । वो जब भी..."
सुधार:
आदरसूचक बहुवचन 'हैं' आ 'उनका' केँ प्रयोग कएलाक बाद अचानक 'वो' (एकवचन/अनौपचारिक) केँ प्रयोग व्याकरणक दृष्टिकोणसँ सही नहि अछि । एतेह 'वे' केँ प्रयोग होबाक चाही छल । ई त्रुटि आगू सेहो कतेक जगह दोहड़ायल गेल अछि (जेना: "वो अपनी बात को...") ।
​काल (Tense) आ क्रियाक असंगति:
​त्रुटि: "मेरे यूं कहने पर राजवीर को बड़ी संतुलित हँसी आ जाती । कहते— ..."
​सुधार: एतेह भूतकालक कोनो आदत वा बार-बार होमए वाला घटनाक वर्णन अछि । "आ जाती" केँ बाद "कहते" केँ जगह "वे कहते थे" वा "कह उठते" भेल रहैत तँ वाक्यक प्रवाह बेसी नीक रहितै ।
​कारक चिह्न (Case Markers) संबंधी त्रुटि:
​त्रुटि: "बात भी सही है । वैसे भी तकों में उलझकर लेखक और कलाकार से भला कौन जीत सका है !"
​सुधार: एतेह "लेखक और कलाकार से" केँ जगह "लेखकों और कलाकारों से" (बहुवचन) होबाक चाही छल, कियाक तँ ई एकटा सार्वभौमिक (Universal) कथन अछि ।
2. शैलीगत त्रुटि आ प्रवाह (Stylistic & Flow Issues)
​तद्भव आ बोलचालक शब्दक बेसी घालमेल:
​पाठमे 'यूं', 'वो', 'हिसाब' जकाँ बेसी अनौपचारिक आ बोलचालक शब्दक प्रयोग भेल अछि । यद्यपि व्यंग्यमे बोलचालक भाषा चलैत अछि, मुदा जखन लेखक "मनमुताबिक संदर्भ", "प्रकट", वा "विधाओं" जकाँ तत्सम शब्दक प्रयोग कऽ रहल छथि, तखन अचानक 'यूं' वा 'वो' खटकैत अछि । 'यूं' केँ जगह 'इस तरह' वा 'ऐसा' बेसी परिष्कृत लागैत ।
​वाक्य विन्यास (Sentence Structure):
​त्रुटि: "पिछले वर्ष मैं तबादला होकर उसी शहर में आया जहाँ राजवीर रहते हैं । बड़े लेखक माने जाते हैं, दिल्ली में रहते हैं, उनके बारे में अब तक इससे अधिक मुझे कुछ ज्ञात नहीं था ।"
​विश्लेषण: ई भाग शैलीक दृष्टिकोणसँ किछु बिखरल बुझाइत अछि । जखन कथाकार कहि रहल छथि जे ओ "उसी शहर में आया जहाँ राजवीर रहते हैं", तँ ठीक ओकरा बादक पंक्तिमे लिखल अछि "दिल्ली में रहते हैं" । ई विरोधाभास पैदा करैत अछि जे राजवीर आखिर कतय रहैत छथि ?
​सुधार: वाक्यकेँ बेसी स्पष्ट होबाक चाही छल, जेना— "मुझे बस इतना ज्ञात था कि वे दिल्ली में रहते हैं और बड़े लेखक माने जाते हैं..." । एकरा छोड़ि, छोट-छोट वाक्यकेँ जोड़बाक लेल अल्पविराम (,) केँ बेसी प्रयोग कएल गेल अछि, जाहिसँ वाक्यक सौंदर्य कम भऽ जाइत अछि ।
​पुनरुक्ति (Redundancy):
​त्रुटि: "वो अपनी बात को मोड़कर मनमुताबिक संदर्भ पर ले जाते..."
​सुधार: 'अपनी बात को मोड़कर' मे 'को' केँ आवश्यकता नहि अछि । एकरा सोझे "वे अपनी बात मोड़कर..." लिखल जा सकैत छल, जे पढ़बामे बेसी सहज लागत ।
निष्कर्ष
ई मैथिलीसँ हिंदीमे स्वयं कथाकार द्वारा कएल गेल अनुवाद थिक, एहि कारण एहिपर मैथिली भाषाक वाक्य-गठन (Syntax) क प्रभाव साफ देखि पड़ैत अछि । जँ सर्वनाम ("वो" केँ जगह "वे") आ विराम चिह्नक प्रयोगमे किछु सुधार कएल जाए, तँ एहि व्यंग्यक मारकता आ पठनीयता और बेसी बढ़ि जायत ।

6 comments:

  1. वाह ! गजब समिक्षा, सुन्दर शैली ! दिनेश बाबु अपनेप्रति विनम्र आभार आ धन्यवाद । ## विश्वभर मिश्र 'विश्व', मिर्जापुर दरभंगा

    ReplyDelete
  2. आह ! अहि तरहे समिक्षा जौ मैथिलमे होयत रहत त मिथिला आ मैथिलकेँ कल्याण सुनिश्चि अछि । ■अपरिजीता झा, संयुक्त राज्य अमेरिका ।

    ReplyDelete
  3. ई त थईहर-थईहर कए देलौहू । अनुवादक लेल अनुवाद किन्नौहू नहि होमाक चाहि । 'अंतरंग' पत्रिकाकेँ सेहो ई पैघ बेज्जैत अछि । पत्रिका केहन तरहकेँ अनुवाद छपैत अछि तकर गजबकेँ दृष्टान्त । चिन्हापरचिकेँ बल पर बलधकेल करैवालाकेँ मूँहप पर कसगर तामाचा सेहो बात भेल ई । ●जयनेन्द्र जय, मधुवनी बेहटा (बिहार)

    ReplyDelete
  4. ई समिक्षा मैथिलीकेँ युवा हस्ताक्षर दीपिका झाकेँ सेहो सम्प्रेषण कयल जाए । हुनको सुधारक मौका भेट जेतन्हि । @भवेश भुमिहार, दलसिंहसराय, समस्तीपुर, बिहार ।

    ReplyDelete
  5. सद्धेय दिनेशजी, सादर नमन ! अपनेकेँ हम नियमित पाठक छी । अपनेकेँ प्रत्येक आलेख, रचना आ विचार मनोयोगसँ पढैत छी । ई आलेख मैथिली भाषाकें उन्नयनमे एकगोट मिलकेँ पाथर अछि । धन्यवाद ! ■■रामचरितर साह, जनकपुरधाम , मधेश प्रदेश (नेपाल)

    ReplyDelete
  6. ई समीक्षा मनुस्मृतिकेँ अध्याय २ केँ श्लोक १३५ केँ विरूद्ध अछि । बाभनकेँ विरोध अहाँ कएने सकैत छी । कियैक त मनुबाबा ओहि श्लोकमे लिखने छथि - "ब्राहमणं दशवर्ष तु शतवर्ष तु भूमिपम् । पितापूत्री विजानीयाद्वाह्मणस्तु तयो:पिता ।।"... जय हो ! ■■■ जगजीवन सदाय, बाबुबरही , मधुवनी, (बिहार )■■

    ReplyDelete