Sunday, 23 June 2024
अपनी बात (#गरीबों की जिंदगी से)
अतुकांत कविता ने जहां बहुत लोगों को अपनी बात काव्य शैली में कहने का अवसर दिया वहीं कविता को विभिन्न विचारों से और समृद्ध करता रहा हैं। कविता का वितान फूला-फला तो कई शैलियों में काव्य सृजन होने लगा। इसी पृष्ठभूमि और यथार्थ के करीब है मेरी यह कविता संग्रह -
कविता को सबसे गहन साहित्य विधा कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह मौलिक भाषा, शैली, लय, प्रस्तुति और बिंबों के साथ अपने हर पाठ में अलग तरह से खुलती है। अलग मनःस्थिति में मानस पर अलग छाप छोड़ती है और प्राचीन होने पर भी नित नवीन होती रहती है।
अतुकांत कविता ने जहां बहुत लोगों को अपनी बात काव्य शैली में कहने का अवसर दिया वहीं कविता को विभिन्न विचारों से और समृद्ध करता रहा हैं। कविता का वितान फूला-फला तो कई शैलियों में काव्य सृजन होने लगा। इसी पृष्ठभूमि और यथार्थ के करीब है मेरी यह कविता संग्रह।
मै पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि यह कविता संग्रह पढ़ते हुए आप सभी को मेरा कवित्व मनोभाव और मनोविज्ञान समझने मे सरल होगा। आमजन के पीडा, बेदना और दर्द को मैने करीब से देखा हैं। उसी के इर्दगिर्द रहकर मैने अपनी भाव और भंगिमा को कविता के माध्यम से सरल, सुरम्य, सौम्य और शिष्ट शैली में पाठक समक्ष दर्ज किया हैं। मुझे आशा ही नही पूर्ण विश्वास हैं कि मेरी यह अनुपम काव्यात्मक शैली आप सभी को जरुर पसंद आएगी।
मेरी मातृभाषा मैथिली, स्कूल में शिक्षा का माध्यम नेपाली, काँलेज में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी, रोजगारी की भाषा नेपाली और अंग्रेजी रही हैं। परन्तु साहित्य सृर्जना की माध्यम मैथिली, नेपाली, हिन्दी आदि भाषाएँ हैं। इन भाषाओं मे मै अपनी साहित्यिक रचना करता आ रहा हूँ। अनुशन्धानमुलक कृति सहित कविता, लघुकथा, हाइकुसहित करीब आधा दर्जन पुस्तक प्रकाशन के लिए पाण्डुलिपी तयार हैं। अपनी कार्य व्यस्तता के कारण प्रकाशन नही कर पाया हूँ। पूर्व मे विज्ञान विषय के अध्यापक के नाता से मैने नेपाल के अंग्रेजी माध्यम मे पठन-पाठन हो रहे पाठशालाओं मे वर्ग 4 से 10 तक ‘साइन्स एंड टेक्नोलजी’ शीर्षक मे नेपाल सरकार से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम मे आधारित पाठ्यपुस्तक प्रकाशित हैं। नेपाल के करीब 10 हजार पाठशालाओं मे यह पढाया जाता है।
मेरी साहित्य भूख ने मुझे साहित्य सिर्जना मे आगे बढ्ने के लिए हमेशा हौशला प्रदान किया हैं। इसमे साहित्यपीडिया डॉट कॉम को विशेष श्रेय जाता हैं। इस मंच ने मुझे कविता संग्रह प्रकाशन हेतु मुझे जो अवसर प्रदान किया है, उसके लिए साहित्यपीडिया परिवार प्रति विनम्र आभारी और अनुग्रहित हूँ। कोटि-कोटि साधुवाद भी देना चाहता हूँ।
अन्तमें, हिन्दी मेरी सम्पर्क भाषी होने के कारण मेरी रचनाओं में त्रुटि भी हो सकती हैं। इसके लिए मुझें एक हिन्दी भाषी प्रेमी के रुप मे स्वीकार कर क्षमा करते हुए हिन्दी साहित्य मे योगदान करने के लिए सभी सुधि पाठकवर्ग प्रेरित और हौशला प्रदान करेगें-मेरी अपेक्षा हैं। प्रबुद्ध पाठकवर्ग के सुझाब, सल्लाह और प्रतिक्रिया के लिए मै सदैव प्रतिक्षारत हूँ। क्योंकी आप लागों के इस पवित्र कार्य से ही मै भविष्य मे अपने को परिस्कृत और रुपान्तरित कर पाऊँगा।
- दिनेश यादव कलंकी, शिवनगर, सुम्लाङकोट मार्ग काठमाण्डू महानगरपालिका-14 काठमाण्डू (नेपाल)
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प्रेरक है 'आप की बात' ! (●मनिक चन्द्र, रेवाड, राजस्थान)
ReplyDeleteआप नेपाल से हो , क्या नेपाल मे भी हिंदी बोली जाती है ? आपकी हिंदी अच्छी ही नही सशक्त भी हैं । आप अपने सृजन कार्य मे सक्रिय रहे । ढेर सारे हार्दिक मंगलमय शुभकामनाएँ । ■शिल्पी बब्बर, नोएडा-इण्डिया ।
ReplyDeleteKya Baat Hain ! Jabardast Prastuti Bhaijan ! ◇Bhagvat Sisaitiya, Aazamgagh,UP (India)
ReplyDeleteकविता को सबसे गहन साहित्य विधा कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह मौलिक भाषा, शैली, लय, प्रस्तुति और बिंबों के साथ अपने हर पाठ में अलग तरह से खुलती है। अलग मनःस्थिति में मानस पर अलग छाप छोड़ती है और प्राचीन होने पर भी नित नवीन होती रहती है । ■दीपाश्री, नालंदा, भारत ।
ReplyDeleteअतुकांत कविता ने जहां बहुत लोगों को अपनी बात काव्य शैली में कहने का अवसर दिया वहीं कविता को विभिन्न विचारों से और समृद्ध करता रहा हैं। कविता का वितान फूला-फला तो कई शैलियों में काव्य सृजन होने लगा। ¤सुकुमार सूर्यदर्शन, दलसिंहसराय (भारत)
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