नेता सभ मोटा के बनभौषा बनल अछि जनता दिनदुखी छैथेही । हुनका सभ के लेल नए कोनो राहत नए कोनो सुविधा । तराई के आर्थिक मेरुदण्ड कृषि छल , मुद्दा अखनो किसान पानी के लेल दिहबारक पुजा करैत छथि । शिक्षालय त अछि मुद्दा मास्टर साहेब विद्यार्थी के पढबै स बेसी चोरी करैले सिखबैत अछि । ओ नेता छथि कोनो दल के , तेँ स्कूल जेवाक जिम्मेदारी हुनक विल्कुले नए छैक । गरिब, बेसहारा, दुखिया, मुहदुबरा के बेटाबेटी पढाई सँ बञ्चित अछि । स्वास्थलय अछि मुद्दा स्वास्थ्यकर्मी नए । कमसे कम छ वरिष के अवधि मे एही सभ मे किछु परिवर्तन होमा चाही , नए भेल ।
दिनेश यादव
आजुधरि नेपालकक जनता के पाला मात्र थोपल गेल राजनीतिक दल आ ओकर नेता सँ पडल अछि । एतह केँ कोनो राजनीतिक दल जनता के बीच सँ, जनता के मुद्दा के साथ आ जनता के लेल नए उभरल अछि । अधिकांश दल पहिले प्रमुख दुई राजनीतिक पार्टी कांग्रेस आ एमाले, बाद मे माओवादी भीतर के उथल–पुथल केँ देन रहल अछि । चाहे मधेसवादी दल होए या आन कोनो राजनीतिक पार्टी । तराई कांग्रेस होए या नेपाल सद्भावना पार्टी, मधेसी जनअधिकार फोरम होए या तराई मधेस लोकतान्त्रिक पार्टी , यी सबटा पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष सभ अतित में कांग्रेस या एमाले के राजनीतिक विद्यार्थीँसंगैह सक्रिय कार्यकर्ता आ नेता छलाह । बेदानन्द झा, गजेन्द्रनारायण सिंह आ महन्थ ठाकुर होए या उपेन्द्र यादव , यी सब गोटा दुइएटा पार्टी मे पहिने आबद्ध छल । मुद्दा बाद मे मधेसबादी या मधेसकेन्द्रित राजनीति सँ ओ सभ जुडल । माओवादी पार्टी खुजला के बाद वेहा दुई पार्टी मे सँ किछ लोक माओवादी बनि गेला, बाद मे विद्रोह करैत ओ मधेस केन्द्रित राजनीति मे प्रवेश केलाह अछि । किछु नेता लोक विगत में कांग्रेस के क्रियाशिल सदस्य त किछु गोटा एमाले के संगठित सदस्य रहि कँ राजनीति केने छल । अख्खन ओ सभ दुधाधारी आ सुच्चा मधेसी नेता के रुपमे अपना के परिचय दैति छथि । ‘हम मधेसवादी नेता छि’ कहैत ओ सभ मोँछ पिजबैत ताल सेहो ठोकि रहल छथि । मधेसी जनता केँ बलिदानीपूर्ण योगदान के ओ सभ ‘गुँडखिचडी’ बना, सत्ता मे सेहो गेल, अखनो किछु गोटा सत्ताधीशे छथि । इतिहासे के सब स शक्तिशाली , मालदार आ निर्णायक मन्त्रालय ओ सभ पाबितौ मधेस आ मधेसीया के लेल किछु नए कए सकल । मधेस विद्रोह भेला छ वर्ष बित गेल मुद्दा आन्दोलन स प्राप्त मधेसी पहिचान आ संघियता स आगा मधेसी नेता नए बढि सकल । जहाँ तकि संघियता के मुद्दा अछि , अखनो तेज छुरी के धार पर लटकल अछि । मिलाजुला के एहाँ दुटा सवाल स्थापित अछि अखनी धरि । बाँकी आन मुद्दा सभ मधेसबादी दलसभ सत्ता मे पहुँचला के बादो सम्बोधन नए करा सकल । नागरिकता, समावेशी विधेयक, सेनामा मधेसीया के सामुहिक प्रवेश, हुलाकी सडक आदि मधेसक मुलभूत मुद्दा पहिने जतह अडकल आ लटकल छल, बिना कोनो परिवर्तन के स्थित अछि । सहिद घोषणा, हुनक परिवारके राहत, घाइते सभ के सहयोग त नाम मात्र के भेटल अछि । नेता सभ मोटा के बनभौषा बनल अछि जनता दिनदुखी छैथेही । हुनका सभ के लेल नए कोनो राहत नए कोनो सुविधा । तराई के आर्थिक मेरुदण्ड कृषि छल , मुद्दा अखनो किसान पानी के लेल दिहबारक पुजा करैत छथि । शिक्षालय त अछि मुद्दा मास्टर साहेब विद्यार्थी के पढबै स बेसी चोरी करैले सिखबैत अछि । ओ नेता छथि कोनो दल के , तेँ स्कूल जेवाक जिम्मेदारी हुनक विल्कुले नए छैक । गरिब, बेसहारा, दुखिया, मुहदुबरा के बेटाबेटी पढाई सँ बञ्चित अछि । स्वास्थलय अछि मुद्दा स्वास्थ्यकर्मी नए । कमसे कम छ वरिष के अवधि मे एही सभ मे किछु परिवर्तन होमा चाही , नए भेल । मधेसीया के मुलुभूत सवाल सँबोधन नए करै के अपन गल्ती ओ सर्वोच्च अदालत के दैत आबि रहल अछि । जे सर्वोच्च के प्रधानन्यायाधिश मधेसियाके भाषा, पोशाक, नागरिकता, सेना मे प्रवेश , हुलाकी सडक निर्माण जेहन मुद्दा के किनारा लगा देलक , आई ओहा सर्वोच्च के प्रधानन्यायधिश के प्रधानमन्त्री स्वीकार करबाक स्थिति मे सत्ताधारी मधेसी मोर्चा पहुँचल अछि । सत्ता के उन्माद मे आ प्रभूशक्ति के इशारा मे ओ एतेक तक गिर जाएत से किन्को विश्वास नए छल । अखन त ओ सभ माओवादी के एजेण्डामे एकाकार भ चुकल अछि । पहिले माओवादी , बाद मे एमाले अखन फेर सँ माओवादी के पुच्छरी बनि सत्तारुढ मधेसी मोर्चा सत्ता के जन्मघुँटी पिब रहल अछि ।
ओना, मधेसी दल सभ बुनियादी मुद्दा पर कांग्रेस, एमाले आ माओवादी स अलग रहितौ सियासत के सिद्धान्तक नाम पे बेर–बेर, बहुतो बेर ओकर नेता लोक अपन विचारधारा, सिद्धान्त स भटकैती रहल । जनता के मजबूरी अछि जे ओ सभ अपन–अपन तरिका स कोनो धरानी जीव रहलाह के कारण नेता आ पार्टी दिश ओ कम ध्यान द रहल अछि । जनता के एही बाध्यता केँ कोनो मौजर नए दैति अछि नेता सभ । जनता के जनमत पे नेतासभ सदैब कुठाराघात करैत रहल । जब जनता के पास विकल्प के उम्मीद देखावा मे आबैत अछि त सदखैरि सत्ता सुखभोग केनिहार नेता आ पार्टी सभ ‘चोर चोर मौसेरा भाई ’ के तर्ज पर एकजूट होएत अछि, भल रहल अछि । संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेसी मोर्चा के जन्म के प्रमुख कारण एहा छि । सत्ताधारी मोर्चा त मधेस मुद्दा के काजक्रिया करबाज मे एहेन तरिका स जुटल अछि जे फेर जनता के सडक पे आबि बला परिस्थिति सृजना भँ गेल अछि । जनता आक्रोशित अछि, नेता सभ सँ । नेता जनता के फुसिआबै वाला सूत्र, मन्त्र, तन्त्र आ जन्त्र के खोजी मे अछि । मुद्दा आब सत्ताधीस नेताप्रति के मोह जनता के भंग भँ रहल अछि ।
तें सडक पे चलैनिहार कोनो बाटबटोही के ई नेता सभ के बारे मे जौ धारणा पुछब त , सौ मे सँ नब्बे प्रतिशत ओकरा चोर, बेइमान, गद्दार, मक्कार आ धोखेबाज जेहने अलंकारण स नबाजत भेटत । एही स पैघ दुर्भाग आउर कि भँ सकैत कि जकरा जनता देश आ मधेस के बागडोर सौपैत अछि ओकरेबारे मे एहेन विचार रखति अछि । के पैदा केलक एहन अवस्था ? के अछि एही के लेल जिम्मेबार ? जनता त विल्कुले नए थिक । किएक त, जनता सभ बेर–बेर लोकतान्त्रिक प्रक्रिया मे पुरा उत्साह के साथ सहभागिता जनबैत आबि रहल अछि । मधेस जनविद्रोह मे जनता के पैघ बलिदान से हो ओतबे रहल । मुद्दा ओए विद्रोह के मुर्दा बनएबाक दुस्साह नेता लोक केलक । सभ नेता के ओ परखैत आबी रहल अछि । मुदा, सत्ता चाहे ककरो रहे, अवस्था एकैह रहल अछि । निरीह जनता के खुश करैके लेल कहल जाति अछि कि ओकर भोट मे ताकत अछि । मुदा, कि भोट के इ ताकक जनता के बिना घूस के ओकर मोबाइल चोरी के उजुरी थाना मे ओ दर्ज कए सकैत अछि या हुनक बालबच्चा के जन्म प्रमाणपत्र ओ पावि सकैत अछि ?
मोर्चा बना केँ सत्ता में गेला के बाद मधेसी दल के कारण उल्लेखनिय कोनो उपलब्धि हासिल नए भेल । मुदा किछु छोटमोट कार्य भेल अछि । जेना सडक, अस्पताल आ स्कूलक नामाकरण सहिद के नाम पे भेल । सिंह दरबार मे मधेसिया के भिड बढल । मधेसीसभ हात मे तुनौटि सँ तम्बाखु निकाएल सिंहदरबार मे मौलेत बड बेसी भेटत । मधेसिया के नेतृत्व मे खुजल किछु गैर सरकारी संस्था सभ के देशी÷विदेशी सहयोग भेटल । ओहू बहाने किछु गोटा मोटा गेल अछि आ मोटा रहल अछि । कार्यकर्ता सभ मन्त्रि क्वाटर मे खुलेआम जेबाक अवसर पाबलक । किछु मधेसीया मन्त्री के गाडि , संस्थान के जीप के स्वछन्द तरिका सँ प्रयोग कएबाक अवसर प्राप्त केलक । ओ सभ अखन अप्पन गदहा जन्म छुटएबाक फिराक मे अछि ........। छ वरिश मे मधेसिया के मधेस आन्दोलन के बाद प्राप्त भेल उपलब्धि सभ छी इ । कि एहाँ मधेस जनविद्रोह के जनादेश छल ? किन्नौह नए । किएक त गामक निमुखा आम मधेसी जनता के एही सँ कोनो फाइदा नए भेल ।
कुर्सी के गुमान मे चुर नेतासभ जनता के पसिना के कसौटि के भोजपत्रके ओ विसरी रहल अछि । गरिब के घरक आँशु जे आगि बनि धुधँुवा रहल अछि ओकरा कम आंकबाक चेष्टा नेता लोकनी नए करथि त बेहतर रहत । जनता कोनो राजा या रानी के डमरु नए थिक आ नए थिक ओ दरबारक नर्तकी के घुन्घरु । सत्ताधीस सभहक तुला के बट्टा से हो नए थिक जनता, कोठा के तबायफ के दुपटा बुझ्नाए जका गल्ति नेता सभ नए करता त उत्तम रहत । मधेसी जनता अग्निवंशक परम्परा के मशाल थिक , श्रमिक हात से उठल कोदारी थिक जनता । तेँ नेता सभ के इ बुझैटा पडत जे हुनका सभहक कुर्सि बेसी टिकाऊ नए अछि । मन्त्रि परिषद् मे सहभागी लोक के हाल–चाल बहुत घिनौना बनल अछि , कुर्सी के निचा बैइमान विछौना के ओ नए देख सकि रहल अछि । मधेसक नेता सभ घडियाल बनि बैसल अछि , कोशी कमला सुखल अछि, देश मधेसके खा चुकल अछि तहियौ ओ सत्ता के भुखा अछि ।www.saharatimes.com.np
दिनेश यादव
आजुधरि नेपालकक जनता के पाला मात्र थोपल गेल राजनीतिक दल आ ओकर नेता सँ पडल अछि । एतह केँ कोनो राजनीतिक दल जनता के बीच सँ, जनता के मुद्दा के साथ आ जनता के लेल नए उभरल अछि । अधिकांश दल पहिले प्रमुख दुई राजनीतिक पार्टी कांग्रेस आ एमाले, बाद मे माओवादी भीतर के उथल–पुथल केँ देन रहल अछि । चाहे मधेसवादी दल होए या आन कोनो राजनीतिक पार्टी । तराई कांग्रेस होए या नेपाल सद्भावना पार्टी, मधेसी जनअधिकार फोरम होए या तराई मधेस लोकतान्त्रिक पार्टी , यी सबटा पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष सभ अतित में कांग्रेस या एमाले के राजनीतिक विद्यार्थीँसंगैह सक्रिय कार्यकर्ता आ नेता छलाह । बेदानन्द झा, गजेन्द्रनारायण सिंह आ महन्थ ठाकुर होए या उपेन्द्र यादव , यी सब गोटा दुइएटा पार्टी मे पहिने आबद्ध छल । मुद्दा बाद मे मधेसबादी या मधेसकेन्द्रित राजनीति सँ ओ सभ जुडल । माओवादी पार्टी खुजला के बाद वेहा दुई पार्टी मे सँ किछ लोक माओवादी बनि गेला, बाद मे विद्रोह करैत ओ मधेस केन्द्रित राजनीति मे प्रवेश केलाह अछि । किछु नेता लोक विगत में कांग्रेस के क्रियाशिल सदस्य त किछु गोटा एमाले के संगठित सदस्य रहि कँ राजनीति केने छल । अख्खन ओ सभ दुधाधारी आ सुच्चा मधेसी नेता के रुपमे अपना के परिचय दैति छथि । ‘हम मधेसवादी नेता छि’ कहैत ओ सभ मोँछ पिजबैत ताल सेहो ठोकि रहल छथि । मधेसी जनता केँ बलिदानीपूर्ण योगदान के ओ सभ ‘गुँडखिचडी’ बना, सत्ता मे सेहो गेल, अखनो किछु गोटा सत्ताधीशे छथि । इतिहासे के सब स शक्तिशाली , मालदार आ निर्णायक मन्त्रालय ओ सभ पाबितौ मधेस आ मधेसीया के लेल किछु नए कए सकल । मधेस विद्रोह भेला छ वर्ष बित गेल मुद्दा आन्दोलन स प्राप्त मधेसी पहिचान आ संघियता स आगा मधेसी नेता नए बढि सकल । जहाँ तकि संघियता के मुद्दा अछि , अखनो तेज छुरी के धार पर लटकल अछि । मिलाजुला के एहाँ दुटा सवाल स्थापित अछि अखनी धरि । बाँकी आन मुद्दा सभ मधेसबादी दलसभ सत्ता मे पहुँचला के बादो सम्बोधन नए करा सकल । नागरिकता, समावेशी विधेयक, सेनामा मधेसीया के सामुहिक प्रवेश, हुलाकी सडक आदि मधेसक मुलभूत मुद्दा पहिने जतह अडकल आ लटकल छल, बिना कोनो परिवर्तन के स्थित अछि । सहिद घोषणा, हुनक परिवारके राहत, घाइते सभ के सहयोग त नाम मात्र के भेटल अछि । नेता सभ मोटा के बनभौषा बनल अछि जनता दिनदुखी छैथेही । हुनका सभ के लेल नए कोनो राहत नए कोनो सुविधा । तराई के आर्थिक मेरुदण्ड कृषि छल , मुद्दा अखनो किसान पानी के लेल दिहबारक पुजा करैत छथि । शिक्षालय त अछि मुद्दा मास्टर साहेब विद्यार्थी के पढबै स बेसी चोरी करैले सिखबैत अछि । ओ नेता छथि कोनो दल के , तेँ स्कूल जेवाक जिम्मेदारी हुनक विल्कुले नए छैक । गरिब, बेसहारा, दुखिया, मुहदुबरा के बेटाबेटी पढाई सँ बञ्चित अछि । स्वास्थलय अछि मुद्दा स्वास्थ्यकर्मी नए । कमसे कम छ वरिष के अवधि मे एही सभ मे किछु परिवर्तन होमा चाही , नए भेल । मधेसीया के मुलुभूत सवाल सँबोधन नए करै के अपन गल्ती ओ सर्वोच्च अदालत के दैत आबि रहल अछि । जे सर्वोच्च के प्रधानन्यायाधिश मधेसियाके भाषा, पोशाक, नागरिकता, सेना मे प्रवेश , हुलाकी सडक निर्माण जेहन मुद्दा के किनारा लगा देलक , आई ओहा सर्वोच्च के प्रधानन्यायधिश के प्रधानमन्त्री स्वीकार करबाक स्थिति मे सत्ताधारी मधेसी मोर्चा पहुँचल अछि । सत्ता के उन्माद मे आ प्रभूशक्ति के इशारा मे ओ एतेक तक गिर जाएत से किन्को विश्वास नए छल । अखन त ओ सभ माओवादी के एजेण्डामे एकाकार भ चुकल अछि । पहिले माओवादी , बाद मे एमाले अखन फेर सँ माओवादी के पुच्छरी बनि सत्तारुढ मधेसी मोर्चा सत्ता के जन्मघुँटी पिब रहल अछि ।
ओना, मधेसी दल सभ बुनियादी मुद्दा पर कांग्रेस, एमाले आ माओवादी स अलग रहितौ सियासत के सिद्धान्तक नाम पे बेर–बेर, बहुतो बेर ओकर नेता लोक अपन विचारधारा, सिद्धान्त स भटकैती रहल । जनता के मजबूरी अछि जे ओ सभ अपन–अपन तरिका स कोनो धरानी जीव रहलाह के कारण नेता आ पार्टी दिश ओ कम ध्यान द रहल अछि । जनता के एही बाध्यता केँ कोनो मौजर नए दैति अछि नेता सभ । जनता के जनमत पे नेतासभ सदैब कुठाराघात करैत रहल । जब जनता के पास विकल्प के उम्मीद देखावा मे आबैत अछि त सदखैरि सत्ता सुखभोग केनिहार नेता आ पार्टी सभ ‘चोर चोर मौसेरा भाई ’ के तर्ज पर एकजूट होएत अछि, भल रहल अछि । संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेसी मोर्चा के जन्म के प्रमुख कारण एहा छि । सत्ताधारी मोर्चा त मधेस मुद्दा के काजक्रिया करबाज मे एहेन तरिका स जुटल अछि जे फेर जनता के सडक पे आबि बला परिस्थिति सृजना भँ गेल अछि । जनता आक्रोशित अछि, नेता सभ सँ । नेता जनता के फुसिआबै वाला सूत्र, मन्त्र, तन्त्र आ जन्त्र के खोजी मे अछि । मुद्दा आब सत्ताधीस नेताप्रति के मोह जनता के भंग भँ रहल अछि ।
तें सडक पे चलैनिहार कोनो बाटबटोही के ई नेता सभ के बारे मे जौ धारणा पुछब त , सौ मे सँ नब्बे प्रतिशत ओकरा चोर, बेइमान, गद्दार, मक्कार आ धोखेबाज जेहने अलंकारण स नबाजत भेटत । एही स पैघ दुर्भाग आउर कि भँ सकैत कि जकरा जनता देश आ मधेस के बागडोर सौपैत अछि ओकरेबारे मे एहेन विचार रखति अछि । के पैदा केलक एहन अवस्था ? के अछि एही के लेल जिम्मेबार ? जनता त विल्कुले नए थिक । किएक त, जनता सभ बेर–बेर लोकतान्त्रिक प्रक्रिया मे पुरा उत्साह के साथ सहभागिता जनबैत आबि रहल अछि । मधेस जनविद्रोह मे जनता के पैघ बलिदान से हो ओतबे रहल । मुद्दा ओए विद्रोह के मुर्दा बनएबाक दुस्साह नेता लोक केलक । सभ नेता के ओ परखैत आबी रहल अछि । मुदा, सत्ता चाहे ककरो रहे, अवस्था एकैह रहल अछि । निरीह जनता के खुश करैके लेल कहल जाति अछि कि ओकर भोट मे ताकत अछि । मुदा, कि भोट के इ ताकक जनता के बिना घूस के ओकर मोबाइल चोरी के उजुरी थाना मे ओ दर्ज कए सकैत अछि या हुनक बालबच्चा के जन्म प्रमाणपत्र ओ पावि सकैत अछि ?
मोर्चा बना केँ सत्ता में गेला के बाद मधेसी दल के कारण उल्लेखनिय कोनो उपलब्धि हासिल नए भेल । मुदा किछु छोटमोट कार्य भेल अछि । जेना सडक, अस्पताल आ स्कूलक नामाकरण सहिद के नाम पे भेल । सिंह दरबार मे मधेसिया के भिड बढल । मधेसीसभ हात मे तुनौटि सँ तम्बाखु निकाएल सिंहदरबार मे मौलेत बड बेसी भेटत । मधेसिया के नेतृत्व मे खुजल किछु गैर सरकारी संस्था सभ के देशी÷विदेशी सहयोग भेटल । ओहू बहाने किछु गोटा मोटा गेल अछि आ मोटा रहल अछि । कार्यकर्ता सभ मन्त्रि क्वाटर मे खुलेआम जेबाक अवसर पाबलक । किछु मधेसीया मन्त्री के गाडि , संस्थान के जीप के स्वछन्द तरिका सँ प्रयोग कएबाक अवसर प्राप्त केलक । ओ सभ अखन अप्पन गदहा जन्म छुटएबाक फिराक मे अछि ........। छ वरिश मे मधेसिया के मधेस आन्दोलन के बाद प्राप्त भेल उपलब्धि सभ छी इ । कि एहाँ मधेस जनविद्रोह के जनादेश छल ? किन्नौह नए । किएक त गामक निमुखा आम मधेसी जनता के एही सँ कोनो फाइदा नए भेल ।
कुर्सी के गुमान मे चुर नेतासभ जनता के पसिना के कसौटि के भोजपत्रके ओ विसरी रहल अछि । गरिब के घरक आँशु जे आगि बनि धुधँुवा रहल अछि ओकरा कम आंकबाक चेष्टा नेता लोकनी नए करथि त बेहतर रहत । जनता कोनो राजा या रानी के डमरु नए थिक आ नए थिक ओ दरबारक नर्तकी के घुन्घरु । सत्ताधीस सभहक तुला के बट्टा से हो नए थिक जनता, कोठा के तबायफ के दुपटा बुझ्नाए जका गल्ति नेता सभ नए करता त उत्तम रहत । मधेसी जनता अग्निवंशक परम्परा के मशाल थिक , श्रमिक हात से उठल कोदारी थिक जनता । तेँ नेता सभ के इ बुझैटा पडत जे हुनका सभहक कुर्सि बेसी टिकाऊ नए अछि । मन्त्रि परिषद् मे सहभागी लोक के हाल–चाल बहुत घिनौना बनल अछि , कुर्सी के निचा बैइमान विछौना के ओ नए देख सकि रहल अछि । मधेसक नेता सभ घडियाल बनि बैसल अछि , कोशी कमला सुखल अछि, देश मधेसके खा चुकल अछि तहियौ ओ सत्ता के भुखा अछि ।www.saharatimes.com.np
No comments:
Post a Comment