नेता आगा जनता पाछा
देश आ मधेस आब अप्पन स्थिति आ दिशा मे बहुत पैघ एवं क्रान्तिकारी बदलाब के चाहना रखने अछि । ओतह के जनता खुद्रा मे नए होलसेल मे अपन अधिकारक सुनिश्चिता चाहैत अछि । किछु माह पहिलधरि संविधानसभा छल त आशा आ भरोसा से हो छल , मुदा आब त ओहो नए रही गेल । ऐहन स्थिति मे जनता जनार्दन निराश आ कुन्ठित त बनले अछि , नेतासभ पर स भरोसा आ विश्वास सेहो उठि गेल अछि । जनता सभ कह लागल अछि, ‘ परिवर्तनक लेल उत्कर्ष बलिदान आब अक्षम नेतृत्व÷नेता के कारण मटियामेट भ गेल , उपलब्धि शून्य मे पहूँच गेल ......। ’ हुनका लोकनि के इ प्रतिनिधिमुलक आक्रोश उचित मात्र नए सान्दर्भिक थिक । खास ककेँ पुरातनवादी सोच आ परम्परावादी मानसिकता के जंंजिर मे जकड्ल आ बा“धल एतेह के नेता लोकनी के कारण इ स्थिति आएल अछि । मुद्दा अखनो देरि नए भेल अछि । जौ पवित्र उदेश्य आ लक्ष्य के साथ प्रयास कएल जाय त स्थिति साकारात्मक भ सकैत अछि । लेकिन एही अभियान मे युवा के सक्रिय भूमिका जरुरी अछि । किछु युवाजन जागरुक भँ एही दिश विडा उठावा मे प्रयासरत छैक, जे एकटा सकारात्मक सन्देश संचार क रहल अछि ।
पहिले सत्ता के लेल मोर्चा आब अधिकार के लेल एकता के बात सेहो ओही सन्दर्भ मे शुरु भेल अछि । किछु युवा सभ के एही अभियान मे जुडनाए ओकरे पुष्टि करैत अछि । किएत राष्ट्रिय सहमति के नाम पर चारि वरिष धरि भेल झुठमुठ के नाटक सँ सिर्जित संकट सँ मुक्ति चाहैत अछि, जनता । सत्ता, भत्ता आ कुर्सी मे जकैडि के आब अधिकार नए भेटत , से बात जनता सभ आब निक जका बुझि गेल अछि । स्वार्र्थी नेता सँ देश के लोकतान्त्रिक दशा मे परिवर्तन किन्नौह नए भँ सकैत अछि । ताहीलेल उच्च सोच आ महान जोश के साथ देशक राजनीति के सही दिसा देबाक बात आब जरुरी भय गेल । शुरुआत फेर शून्य सँ कर पडत । किएक तँ जनता केँ स्वाभिमान, देश केँ स्वाधिनता आ भूगोल के स्वतन्त्रता पर खग्रास ग्रहण लगेनिहार नेता लोकनी सँ आब काम नए चलत । असल नेतृत्वक खोजी जरुरी भँ गेल , ओ नेतृत्व युवा करैति से चाहना जन–जन के अछि ।
बहुत पहिने अंग्रेजी साहित्य मेँ कतौह हम पढ्ने छलौह कि सत्ताधारी होनाए के मतलब एक जनाना होनाए जेहेन बात अछि । यदि देश आ भूगोल, राज्यसत्ता आ नेतृत्वपर जौ अहाँ अपन उपस्थिति एहसास कर चाहैत छि तँ जनता के सबटा लालसा ओतेह गिरबी लगि जायत अछि । देशक नेता आब ‘नेटा’ बनि चुकल अछि । ‘नेटा’ के जौ साफसुधरा नए करब त ओ मुखडे बिगाडि देत । अख्खन देशक मुखडा विगरल अछि , ‘नेटा’ के कारणे । सत्ता के मद मे ओ सब एनाके चुर अछि जे ओ कुर्सी छोडबाक बात केनाए बहुत दूर छोडि देने अछि । ठग सभहक झुण्ड बना के ओ देश के लुटि रहल अछि , जनता के बन्धक बना के छद्मभेद मे विभिन्न नाम सँ राष्ट्रक सम्पति पर डकैति डालि रहल अछि । जौ हुन्का सभहक बस चले त स्कूलक विद्यार्थी जका सभ के मुर्गी बना केँ उपर सँ लाल कैर्ची बर्साव मे सेहो ओ सभ पछा नए रहत से बुझा रहल अछि । खास ककेँ मधेसिया नेतृत्व, नेता आ कार्यकर्ता सभ के मनोभाव, मनोगति आ मनोविज्ञान अख्खन ऐहने बनल अछि , एही मामिला मे सत्ताधारी आ प्रतिपक्षक भूमिका एके खेत केँ मुरैह जका देखा रहल अछि । हाँ फरक एतबे अछि जेँ प्रतिपक्ष सत्ता केँ लेल भुखाएल अछि तँ सत्ताधारी धनार्जनक लेल बकुलम ध्यायनम् मे अछि ।
जौ मधेस पर केन्द्रित भँ बात करी तँ मधेसी नेता सभ नेतृत्व हकवाक स्थिति मे अखनौधरि नए पहुँचल अछि । पंचायतकाल मे राजा के गुलामी, प्रथम जनआन्दोलनके वाद हासिल प्रजातन्त्र मे कांग्रेस, एमाले के आज्ञापालक के भूमिका मे ओ रहल छल । २०६३÷०६४ के जनआन्दोलन आ मधेस विद्रोह के सफलताक बाद ओ सभ विदेशी शक्ति के भक्त बनि बैसल अछि । तेँ मधेसी लोकतान्त्रिक मोर्चा के नाम पर ओ सब सत्ताधारी बनि मालदार मन्त्रालय मे कब्जा जमोने अछि । देश÷मधेस मे घनघोर अन्हरिया राति मे चन्द्रमा के दर्शन दुर्लभ जका भ चुकल अछि । कियो दिनकर बनत से सपनो मे नए सोचु । एकरा एना के कहियो जे देश बहुत गहिरगर खाडि मे गिर चुकल अछि । अहाँ हमरा बीच के लोक आब इँ नए मानत जे नेता के अवसर आ पद नए भेटलैह । पिछला किछु वर्ष सँ मधेसी नेतासभ सदैब निर्णाय भूमिका मे रहल, मुद्दा हात लागि शुन्य के स्थिति अछि , इँ बहुत पैघ दुर्भाग्य थिक । उपप्रधान एवं गृहमन्त्री विजयकुमार गच्छदार, भौतिक योजना तथा निर्माण मन्त्री ह्रदयेश त्रिपाठी, सूचनामन्त्री राजकिशोर यादव, उद्योगमन्त्री अनिलकुमार झा, सिंचाई मन्त्री महेन्द्रराय यादवलगायत के कार्यकाल मे कतेक एहन मौका आयल जख्खन ओ अन्तरआत्माके आबाज स निर्णय लेबा मे चुकल अछि । ओही स्थिति मे समुच्चा देश के दशा और दिशा के ओ ठीक क सकैत छल । मुद्दा हुनका सभ के अपने पद के लायक योग्यता पर शंका रहल हेता । ताही लेल ओ सभ ओएहा केलक जे हुनका सभहक पाछा के ‘आला कमान’ विदेशी शक्ति ओकरा कहलक । लाज भ रहल अछि ऐहन ‘मौगा’ नेता सभ स , जे महत्वपूर्ण पद पे सुशोभित होइतो मोमक गुडिया बनि बैसल रहल, बैसल छथि । पद आ कुर्सी मे चिप्कल अछि । और बचल खुचल अहंकार के नशा मे चूर भ सबटा बन्टाधार करबा मे आतुर अछि । यदि इ बात नए रहैत त मधेसक मूलभूत मुद्दा सभ के आजुधरि किएक सम्बोधन नए भेल ? संविधानसभा आ मन्त्री परिषद् मे अच्छा खासा उपस्थिति भेला के बाबजूद किएक संंविधानसभा के विगटन कएल गेल ? किएक देशक राजनीति के अस्थिरता दिश धकेल देलक ओ सब ?
यदि इ बात सभ नए रहैत त कामचलाउ सरकार आजुधरि किएक सत्ता छोडबाक स्थिति मे नए पहुँचल अछि ? मधेसी सभ के नागरिकता, सैनिक भर्ना, समावेशिक विधेयक सभ आजुधरि किएक मूर्तरुप नए लेलक ? किएक मधेसक किसान सभ के हक अधिकारक दिश काज नए ओ केलक ? रक्षामन्त्री मधेसी , मुदा सेना मे मधेसी के पहूँच आजुधरि सम्मानजनक किएक नए भेल ? किएक अपनो मन्त्रालय स सेना मे मधेसिया के सम्मानजनक उपस्थिति करबाक दिशा मे ओ सक्षम नए भेलाह ? पिछला बेर मुख्य सचिव पद मे किएक मधेस क्षेत्रक प्रतिनिधि उमाकान्त झा के नियुक्ति नए दिआ सकल ? तराई–मधेस मे कृषि क्षेत्र मे लगनिहार सभ के उत्थान आ प्रगति के दिस एकोटा कारगर निर्णय ओ सब किएक नए क सकल ? निर्माण आ विकास, उद्योग आ स्वास्थ्य क्षेत्र मे ओ सभ मधेस के अग्रस्थान मे किएक नए पहुँचेबाक कार्य केलक ? निर्माण तथा यतायात मन्त्री मधेसी मुदा समग्र मधेस मे निर्माण लगभग नए के बराबर अछि । उद्योग मन्त्री मधेसी मुदा मधेस क्षेत्र स उद्योग विस्थापित भ रहल अछि । सिंचाई मन्त्री मधेसी , मुदा सिंचाइ क्षेत्र मे मधेस पाछा ..........ः? ऐहने बहुतो प्रश्न सभ के ढेरी स एहा बुझवा मे अबैति अछि जे ओ सब सत्ता मे पहुँचबाक लेल मात्र ललायित छल आ अखनो अछि । ओही लेल ओ मोर्चा बनबैत अछि मुद्दा सत्तासिन भेला के बाद मुद्दा सभ बिसरी जाएत अछि । अखन मधेस मे एकेटा पार्टी के बात एकटा सत्ताधारी दल क रहल अछि । जौ अलग–अलग पार्टी छैक त विचारो पृथ्थक रहतै ने । फेर कोनो के एकता भ सकैति अछि , इ बात बुझितौ बुझि पचा के किछु नेता आगा बढि रहल अछि । हमरा बिचार स इ त सकारात्मक बात थिक मुद्दा एकता सम्भवक विल्कुले नए अछि । हमरा क्षमा करब , जौ ऐहने ‘मौगा’ नेता आ ‘अक्षम’ मधेसी मन्त्री सभहक सिट सुरक्षित करबाक लेल जौ एकता आ मोर्चा होएत त पहिले के स्थिति ठीक छल कमसे कम सभ नेपाली एक छल , कतौह मधेसी, पहाडी , हिमाली बाला बात नए , आब मौगाा मधेसी नेतासभ के कारण जनता के धैर्यता के बाँध टुटि गेल अछि , व्यक्तिगत गुणदोष के बजाय सारा मधेसी पड जे अख्खन दोसारोपण भ रहल अछि इ सब मधेसक मौगासभहक कारणे ।
कोनो देश आ समाज के विकासक के लेल साढे चारि बरिष कम समय नए होयत छैक । मुदा ओ बहुमुल्य समय बर्बाद केलक नेता सभ । ताही कारणेँ अखनो मधेसी परनिर्भर अछि , दोसर के आगा हाथ पसारबाक स्थिति मे अछि । एही के लेल जिम्मेबार के ? हम आ हमर सरकार ? एही विषय मे कियो जनता नए बोलत । किएत एही के ले जनता सेहो ओतबे जिम्मेबार अछि । मुद्दा अहा हम असानी स कहि दैति छि जे सरकार आ सरकार मे बैसवाला सभ दोषी अछि । लेकिन विकास कार्यसभ मे जतेक भूमिका सरकार के रहैत अछि ओतबे जनता के । अधिकार के लडाई आजुधरि नेता नए जनता लडैत रहल , इतिहास साक्षी अछि । नेता के नेतृत्व चाही , जनता के अधिकार भाड मे जाए । विल्कुले मतलब नए रही जाएत अछि नेता सभ के सत्ता मे पहुँचला के बाद, जन–जन के मुद्दा ।
जनता करत त कि करत ? अप्पन अधिकार के रक्षा हेतु धरना, प्रदर्शन करैत अछि, अनसन मे बैसैत अछि , आन्दोलन करैत अछि त माग पुरा केनाए के बदलता पुलिसक लाठी बजरैत अछि ? धरनास्थल मे बम फुटैत अछि, पुसिसक गोली ठिका ठिका के मथा , छाति आ पेट जेहन सम्बेदनशिल अंग के चोथराभोटरी निकाएल दैत अछि । गृहमन्त्री मधेसी अछि मुदा निर्दोष मधेस के हत्या अखनो नए बन्द भ सकल अछि । एही विषय पर जौ गहनता के साथ विचार करब त, एकर दोषी हमसभ खुद छि , किएत हमरे चुनलाहा भ्रष्ट आ तानाशाही सभ सरकार मे अछि । मुद्दा अख्खन त निर्वाचित प्रतिनिधियो नए छैक । एहन स्थिति मे जनता के परेशानी अउर बढि जाएत अछि । एकटा हिन्दी कवि जी के इ कथनी सान्दर्भिक अछि ः हमे फ्रिक ये नही कि देश कैसे चल रहा है, ‘हमे फ्रिक इस बात कि है कि कही ये यूही ना चलता रहे ’
अन्त्य मे, देश के भ्रष्टाचार मुक्त , तकनीकी युक्त , आधुनिक कृषि प्रणाली, सब के पहूँच मे स्वाथ्य आ शिक्षा , सब के मानवअधिकार के ग्यारेन्टी संगैह आर्थिक विषमता के दूर करैत सम्पन्न राष्ट“ बनेबाक दिस अग्रसर होनाए सबगोटा के अन्तिम ध्येय आब बनबाक चाही ।
कि एतके विपक्ष अपन कर्तव्य आ कार्य सफलतापूर्वक क रहल अछि , शायद नए । ओहो सभ कोनो चालाक नढिया (स्यार) जका ताक पे अछि कि कहिया कौवा के मूह स सत्ता रुपी रोटी छुटत आ ओही पर ओ काबिज भ जाए ? सत्ता त आबैत जाति रहैवाला बात थिक । लोकतन्त्र मे सत्ता ककरो बपौती नए अछि । इ बात के बुझैत सबगोटा के आगा बढ पड्त । तबे अधिकार भेटत । आब संविधानसभा के चुनाव नए संसदीय चुनाव दिस नेता सभ के अग्रसर होमे पडत । तब्बे जा के एही देशक तमान नागरिक के मुलभूत अधिकार भेटत । तबे देश आ मधेसक दशा और दिशा मे परिवर्तन होयत ।
समाप्त