< अउर उदाहरणक सुझाव जँ आगू अउर शब्दक लिंग-निरपेक्ष रूप वा वैकल्पिक प्रयोगक विचार करब, त' निम्नलिखित विचार क' सकैत छी: - वकिल (वकील): 'वकिलनी'क बदला 'वकिल' लिंग-निरपेक्ष। - कर्मचारी: 'महिला कर्मचारी'क बदला केवल 'कर्मचारी'। -पत्रकार: 'पत्रकारनी'क बदला 'पत्रकार'। नेपालमे लिंग-निरपेक्ष शब्दक प्रयोग लैंगिक समानताक लेल महत्वपूर्ण छै, आ 'शिक्षक', 'अध्यक्ष', 'डाक्टर', 'प्रहरी', 'नेता' जकां शब्द एकर उदाहरण छै। मैथिलीमे 'सराइन' जकां नव शब्द रचनात्मक छै, मुदा एकर प्रयोग लेल सामाजिक आ औपचारिक संदर्भमे विचार जरूरी छै।
Sunday, 28 September 2025
नेपालक संदर्भमे 'सर' के स्त्रीलिङ्ग 'सराइन' कतेक उचित वा अनुचित ?
मैथिली भाषाके चर्चित लेखक,साहित्यकार एवं विद्वान प्रा.परमेश्वर कापडी अपन फेसबुक स्टेटसमे 'सर'शब्दक स्त्रीलिङ्ग 'सराइन' लिखने छथि । मैथिलीमे हुनक अही शब्दक प्रस्ताव नेपालीय मैथिली संदर्भमे व्यापक आ फराक अनुमोदन अपेक्षित अछि । मुदा अखुनका परिवेशमे अहि तरहे शब्द 'लैङ्गिक विभेदजन्य'अछि। पहिने हुनकर स्टेटस देखल जाए, ओ लिखैत छथि - "हमरो घरमे मैथिलीक बड़ मान । क्याम्पसमे अदहास' अधिक अङरेजिए शब्दके बाजि, प्राज्ञिकता झारत । त' ओहि हिसाबे हम 'सर'! सब सरे कहि सम्बोधैत अछि ।
आब 'सर' के स्त्रीलिङ्ग भेल 'सराइन'! तैं ई हमर सराइन, हमर घरनी! जेना-- मास्टरके स्त्रीलिङ्ग मास्टरनी.। तहिना डागडरके डागडरनी, सिंहके सिंहनी!...."
प्रा.कापडीके ई शब्दक चयन वा अविष्कार वा प्रस्ताव कून भूगोलक लेल ( प्राचीन मिथिला वा विभाजित मिथिला ?) अछि ? से नहि जाइन । मुदा नेपालक संदर्भमे अनुचित अछि ! विशेष रूपसँ नेपालक राष्ट्र भाषा आ सामाजिक प्रयोगके संदर्भमे, लिंग-आधारित शब्द-रचनाक प्रति संवेदनशीलता बढ़लछ, कियाकि लैंगिक विभेद (gender discrimination) कम करबाक लेल लिंग-निरपेक्ष (gender-neutral) शब्दक प्रयोग प्रोत्साहित कएल जाइछ । किछु शब्द जे परंपरागत रूपसँ पुरुष वा स्त्री लिंगक लेल अलग-अलग प्रयोग होइत छल, आब लिंग-निरपेक्ष रूपमे एकरूपताक प्रयास आ व्यवहारमे सेहो देखल गेल अछि । उदाहरण स्वरूप, 'शिक्षक' (पुरुष) आ 'शिक्षिका' (स्त्री)क बदला केवल 'शिक्षक'क प्रयोग सर्वलैंगिक रूपमे कएल जाइछ , जे लैंगिक समानताक पक्षमे एक महत्वपूर्ण कदम मानल जाइतछ।
नेपालमे लिंग-निरपेक्ष शब्दक प्रयोग आ उदाहरण
नेपालमे, विशेष रूपसँ औपचारिक, शैक्षिक आ सरकारी संदर्भमे, लिंग-आधारित शब्दक प्रयोग कम करबाक लेल नीति आ सामाजिक जागरूकता बढ़लछ । निम्नलिखित उदाहरण एकर स्पष्टता दैतछ:
1. शिक्षक/शिक्षिका:
-पहिलेक प्रयोग: 'शिक्षक' पुरुष शिक्षकक लेल, आ 'शिक्षिका' स्त्री शिक्षकक लेल ।
-आधुनिक प्रयोग: आब 'शिक्षक' लिंग-निरपेक्ष रूपमे प्रयोग होइत छै। उदाहरण:
- "रमिता शिक्षक छथि" (स्त्री शिक्षकक लेल सेहो 'शिक्षक')।
- कारण: 'शिक्षिका'क प्रयोग लिंग-आधारित भेदभावक संकेत दै सकैत छै, तें एकर प्रयोग कम कएल जा रहल छै।
- वर्जित: 'शिक्षिका' लिखनाय वा बोलनाय औपचारिक दस्तावेजमे कम प्राथमिकता देल जाइत छै।
2. अध्यक्ष/अध्यक्षा:
-पहिलेक प्रयोग: 'अध्यक्ष' पुरुषक लेल, 'अध्यक्षा' स्त्रीक लेल।
- आधुनिक प्रयोग: केवल 'अध्यक्ष' लिंग-निरपेक्ष रूपमे। उदाहरण:
- "सुनीता अध्यक्ष छथि।"
- नेपाल सरकारक दस्तावेज आ मिडियामे 'अध्यक्षा'क प्रयोग कम देखल जाइत छै।
- वर्जित: 'अध्यक्षा'क प्रयोग लैंगिक समानताक नीति अंतर्गत कम प्रचलित छै।
3. डाक्टर:
- पहिलेक प्रयोग: कखनो कखनो क्षेत्रीय स्तर पर 'डाक्टरनी' स्त्री चिकित्सकक लेल प्रयोग होइत छल।
- आधुनिक प्रयोग: 'डाक्टर' लिंग-निरपेक्ष छै। उदाहरण:
- "डा. राधा डाक्टर छथि।"
- कारण: 'डाक्टरनी' जकां शब्द लिंग-आधारित भेद देखाबैत छल, तें एकर प्रयोग कम कएल गेल छै।
4. प्रहरी (पुलिस):
- पहिलेक प्रयोग: 'प्रहरी' पुरुषक लेल, आ कखनो 'महिला प्रहरी' स्त्रीक लेल।
- आधुनिक प्रयोग: 'प्रहरी' सर्वलैंगिक। उदाहरण:
- "सीता प्रहरी छथि।"
- 'महिला प्रहरी'क प्रयोग सेहो कम कएल जाइत छै, कियाकि 'प्रहरी' अपनेमे लिंग-निरपेक्ष छै।
5. नेता/नेत्री:
- पहिलेक प्रयोग: 'नेता' पुरुषक लेल, 'नेत्री' स्त्रीक लेल।
- आधुनिक प्रयोग: 'नेता' लिंग-निरपेक्ष रूपमे प्रयोग होइत छै। उदाहरण:
- "पुष्पा कमल दाहाल नेता छथि।"
- 'नेत्री'क प्रयोग आब कम प्रचलित छै, विशेष रूप स औपचारिक लेखनमे।
लिंग-निरपेक्ष शब्दक प्रयोगक कारण
- लैंगिक समानता: लिंग-आधारित शब्दक प्रयोग लैंगिक भेदभावक संकेत दै सकैत छै, जे नेपालक संविधान (2072) आ लैंगिक समानताक नीतिसँ मेल नहि खाइछ।
-आधुनिकताक प्रभाव: वैश्विक स्तर पर लिंग-निरपेक्ष भाषाक प्रचलन (जेना अंग्रेजीमे 'doctor', 'teacher') सँ प्रभावित होइत, नेपाली भाषामे सेहो एकर अनुकरण भँ रहलछ ।
- सामाजिक स्वीकार्यता: लिंग-आधारित शब्दक प्रयोग कम करब स समाजमे समानताक भावना बढ़ैछ।
मैथिली संदर्भमे टिप्पणी
मैथिली, जे नेपालक मधेश क्षेत्रमे व्यापक रूपसँ बोलल जाइछ, मे सेहो लिंग-निरपेक्ष शब्दक प्रति रुझान बढ़लछ, मुदा लोक-प्रयोगमे 'सराइन' जकां नव शब्द रचनात्मकतासँ बनलछ । प्रा.कापडीद्वारा उल्लेखित 'सर' सँ 'सराइन' बनओल गेल प्रसंग मैथिलीके जीवंत परंपराक हिस्सा भँ सकैछ, मुदा नेपालक लैंगिक समानताक नीतिक संदर्भमे, एकर प्रयोगक लेल सामाजिक स्वीकार्यता आ औपचारिक मान्यता जरूरी छै । जँ 'सर' आ 'सराइन'क बदला 'अध्यापक' जकां लिंग-निरपेक्ष शब्द प्रयोग कएल जाय, त' लैंगिक विभेदक प्रश्न कम उठत। उदाहरण:
"हमर अध्यापक डा. यादव छथि।" (पुरुष वा स्त्री, दुनु लेल)
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विद्वान भर्सेज विद्वान ! ! @रामलखन झा, झंझारपुर, मधुवनी ।
ReplyDeleteThanks
ReplyDeleteसही बात ! @वंशीधर झा, कोइलख मधुवनी
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteसठियाएल बुढवा, लैङ्गिक भाषागत विभेदमे उतरल ! विद्वानक काज ई नहि भेल । दिनेशजी निक दनक देलैथ । #मनोहर दास, राजबिराज !
ReplyDeleteपरमेशरजीके दुईब-धान चढाऊ ! कियैक त ओ आब विद्वान नहि रहि गेलाह ! अंटसंट लिखैत रहैत अछि । ई बुढबाके विश्राम अति आवश्यक भ गेल अछि । @शोभाकान्त महाराज, बढकी टोल साँगी, फूलपरास, मधुबनी ।
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