Thursday, 28 December 2017

मैथिली सम्मेलन राजबिराज घोषणापत्रक त्रुटि


  • By Dinesh Yadav
मिथिला क्षेत्र में तेरहम विद्या कें चर्चा खुबे होयत छैक , शायद ओहे कारण १३ टा बूँदा में घोषणापत्र जारी भेल, ई हमर एकटा अनुमान मात्र । ओना १३ दिनधरि श्राद्धक काजक्रिया सेहों मिथिला में होइते छैक । जेना जे होए, घोषणापत्र में हमर व्यक्तिगत दृष्टिकोण सँ देखल गेल त्रुटिसभ प्रस्तुत 
अए :– 

  • बुंदा १ मे आयोजक सभ अपन कर्तव्य कें निर्वाह केनै छथि । ‘मिथिला प्रदेश’ घोषणा होय या नय, मुदा दस्ताबेजिकरण करबाक लेल ई विषय कें एक नम्बर में प्राथमिकता में राखि विशुद्ध प्रचार रणनीति कें पुष्टि करति अछि । 
  • बुँदा २ कें भाषा अस्पष्ट छैक । भोजपुरी के सम्मानजनक अधिकार के बात कयल गेल अछि, मुदा प्रदेश २ के आन भाषा (थौर,उर्दू, मगही, बज्जिका,मारबाडी, बंगाली, हिन्दी आदि) के उल्लेख नए केनाए के अर्थ आन भाषा के अस्तित्व नय स्वीकार केनाए । एहीं बुँदा के ई सभस पैघ त्रुटि अछि । 
  • बुँदा ३ में, प्रदेश १ कें सन्दर्भ में बहुत पैघ महात्वाकांक्षी कें रुपमें आयोजक सभ प्रकट भेल छैक । ऐहो बुंदा के लम्बेतान करबाक लेल आ मांगक लेल मांग करबाक लेल मात्र प्रतित होयत छैक । 
  • बुँदा ४ सं ८ धरि, एकैह टा प्रसंग कें आ विषयवस्तु में घोषणापत्र ओझरायल बुझाएत अछि । घोषणापत्र लम्बा कएला सँ मांग सम्बोधन होयत छैक से बात नए । भेग बात सभ सेहों एहीं बुँदा में समटल छैक , जकर आवश्यकता तत्काल नए छलए ।      
  • बुंदा ९ के सन्दर्भ में, जे संस्था नेपालीय मैथिली भाषी कें बीच में अई सम्मेलन के सर्वमान्य नय बना सकल ओं नेपालमें मैथिली अकादमी स्थापना केर माग केने अछि । घोषणापत्र जारी कएनिहार आ तयार कएनिहार सभ मैथिली के नाम पर धुरन्धर विद्वान छयथि, बहुत अनुभवी सेहों छयथि । कि मात्र अकादमी स्थापना सँ मैथिली , भाषा, साहित्य, कला आ लोकसंस्कृति केर संरक्षण ,सम्बद्र्धन एवं प्रवद्र्धन भँ जेतयह ? नव बोरा में पुरनका चउर रखला सँ नयाँ नय होइत छैक । अकादमी स्थापनाक लेल आधारभूत मान्यता आ सर्वमान्य सिद्धान्त के पहिले प्रतिपादन करी, तहन एहीं दिश बढी त निक  । 
  • बुंदा १० में, शोध–वृतिक घोषणा करबाक मांग आयल अछि । ओहूना ई एकटा भेग विषय छैक । ओहूमे नेपालक राष्ट्रीय अभिलेखागारमे संरक्षित मैथिलीक प्राचीन पाण्डुलिपि सभहक अध्ययन एवम् अनुशन्धानक लेल मात्र ई घोषणा सान्दर्भिक नए छैक । एहीं के लेल कोषक स्थापना कें मांग किछु पोसपुत्र सभ के पोशेबाक काम बाहेक आर किछु भँ नए सकैत अए । मैथिली में मास्टर्स पढिनिहार विद्यार्थी सभ कें शोधपत्र कें लेल प्रोत्साहित कएला सँ सेहो बहुत रास बात आबि सकैत छैक । तेँ ई बूँदा सेहो उचित नय । 
  • बूंदा एघार में, मिथिलाक्षर(तिरहुता लिपि) कें संरक्षणक बात अए । लोपोन्मुख अई लिपि कें लेल मैथिली अभियानी सभ(जे सभ मैथिली के नाम पर पुरस्कार ग्रहण आ तामाशा देखा रहल छयन्हि) आगा आबय पडत । ओहूना ई २१ सम् सताब्दी में एहीँ लिपि स मिथिला आ मैथिली कँे बड पैघ उपलब्धि प्राप्त भँ जेतयह से हमरा नय बुझमामें अए । तेँ योहों विषय माँग के लेल मात्र मांग जका सार्वजनिक भेल अए ।   
  • बूंदा १२ में, मैथिली चलचित्र में सरकारी अनुदानक बात कहल गेल अछि । सरकारी अनुदान भेटत त चलचित्र बनाएब, से बात आब समय सान्र्दभिक नए । ई माग किछुक कलाकारिता के ठिक्केदार सभहक भँ सकैत छय । हाँ, मिथिला क्षेत्रक नाघ, नटुवा, लोकगाथा में आधारित चलचित्र आ सामग्री सभ के अनुदान भेटबाक माग अबैत त निक रहैत । ओहूना युटुभ के जामाना में , नीजि लगानी मे बहुत रास शिक्षाप्रद सामाग्री सभ मैथिली में बनले छए आ बनि सेहो रहल अई । मैथिली सिनेमा कें व्यवसायिक बनाबाक हेतू प्रयास में जोड दयतौंह त निक रहैत । 
  • बूंदा १३ में, मिथिलाक लोकगाथा सभक बात सकारात्मक अए । विद्युतीय अभिलेखीकरण, पर्यटकीयकरण एही क्षेत्रक लेल निक माग अए । सबस पैघ आ महत्वपूर्ण बात केँ अन्तिम में रखनाई के अर्थ भेल जे घोषणापत्र पर काज कएनिहार सभ प्राथमिकता के नए बुझि, अपन–अपन दोकान आ व्यापार के चम्काबै कें फेरी मे छथि,से बुझमामें आयल । 
     अन्तमें, सम्मेलन शुरु होय सँ पहिने आयोजक सभ कें लेल हमर एघार बुँदा सुझाबपत्र एवं जिज्ञासापत्र सार्वजनिक भेल छल, हमर जिज्ञासापत्रक एकोह टा बुँदा मे छलफल नए भेल, एहीँप्रति हमर खेद आ दुःख अए । पाठक सभकें जानकारी कें लेल ओं बुँदा सभ फेर स दोहरा रहल छि - मैथिली हमर माई कें बोली छी । तें #मिथिला आ #मैथिली कें हरेक गतिविधि कें अंशियार हमहूँ छी आ रहब । हमर गृह जिल्ला सप्तरी में मैथिली #सम्मेलन भँ रहल अछि, एहीं सें पैघ खुशी आ प्रसन्नता हमरा लेल आर किछु भइए नय सकैये । आयोजक कें धन्यवाद आ शुभकामना । सम्मेलन में सहभागी आदरणीय(?) मैथिली अभियानी(?) आ आयोजक सभ सँ हमर किछु जिज्ञासा अए :–


  1. मैथिली विश्व कें प्राचिनतम भाषा में से एक अए । मुद्दा ई भाषा अखनों ‘त्रिया चरित्र’ के अवस्था सँ किएक गुजरी रह अछि ? 
  2. बड पुरान भाषा मुद्दा नेपालीय मैथिली क्षेत्र सँ आजूधरि दलित रचनाकार आ साहित्यकार सभ कें दिबिया नेस कें खोजबाक अवस्था किएक छैक ? 
  3. मैथिली भाषा के कला आ सांस्कृति के रखबाला में सभ सँ बेसी दलित अए, मद्दा हुनका सभहक बेसी सक्रियता आ सहभागिता रहैय बाला नाच, नटुवा,बाजा, ढोल,पीपही आ सांस्कृतिक गतिविधि ‘डायनोसर’ किएक बनि गेल ? 
  4. मिथिला कें #कुमरबृजभान, #दिनाभद्री,#अल्हा–रुदल, डफरा बौसली......कतह आ किएक हरा गेल ? ओं संस्कृति अभिजात वर्गक नए छलैह तेँ हरा गेलैए ने ?
  5. किछु जाति विशेषक पहिरन ‘पाग’ मिथिला कें धरोहर कोना के भँ गेलैह ? #पाग के सम्बन्ध में हमरा पास संग्रहित तथ्य आ प्रमाण सभ त ई राजस्थानक पहिरनक होबाक पुष्टि करतै छैक ।
  6. मिथिला आ मैथिली कें बात अबिते किछु ‘नटवरलाल’ आ किछु ‘गिरगिट’ सभ मात्र किएक ‘फ्रन्ट’ पर देखवा में अबैत छैक ? 
  7. मैथिली भाषा नेपालक स्कूल सभ में #पाठ्यक्रम बनल बहुत दिन भँ गेल, मुद्दा ओही पाठ्यक्रमक समिक्षा आम–#मिथिलाजन सँ आजुधरि किएक नए भेल ?
  8. मिथिला साहित्य या भाषा में नेतृत्वदायी भूमिका मे सदैब एकल अभिजात वर्ग आ जाति विशेषक हालीमुहाली किएक छैक ? आ ई कतेक दिन रहत ?
  9. मिथिला क्षेत्र में शान्तिदूत #Budha क चर्चा किएक नए भेल आ आजुधरि एही विषय मे आबाजक उठान किएक नए भँ रहल अछि ?
  10. मिथिला आ मैथिली के नाम पर करोड के करोड बजेट निकासा होएत छैक, तईयों मिथिला आ मैथिली किएक हक्कन पारी कें कानि रहल अछि ?
  11. सिल्पी समुदाय कें आगा देखा कें कथित अभिजात वर्ग आ एकेहटा जाति विशेष कें बौआ(?) सभ मिथिला आ मैथिली के कहियाधरि लुटैत रहत ?
हमर ई जिज्ञासा पर सकारात्मक बहस करबाक न्यौता मिथिला अभियानी(?) , अनुरागी आ सम्मेलन में सहभागि सभ गोटा कें दैति छी । धन्यवाद ?

 राजबिराज घोषणापत्र 2017(22-23 December)




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