Sunday, 28 January 2018

मिथिला मेँ जकडल समस्या समाधानक विन्दू


मिथिला में जकडल समस्या समाधान मिथिला आ मैथिली में जकडल समस्याक सभ केँ सुधार करबाक हेतू ऐतह किछु विन्दु सभ परोस रहल छि –
१.सभ सँ पहिने ‘मैथिल’ शब्द आ ‘पाग’ के जबरजस्ती लधबाक प्रवृति केँ हटाएल जाए या निरुत्साहित कएल जाए । किएक त, ई दुटा उपक्रम सीमित जाति केँ मात्र छैक, तेँ एही ‘ट्याग’ के समग्र मिथिला आ मैथिलीभाषी के थिकैह सेँ प्रचार बन्द होए ।

२.मिथिला आ मैथिली साहित्य मेँ कथित उच्च जाति केँ मात्र स्तुतिगानक चर्चा बन्द होए । आन जाति केँ एही क्षेत्र मेँ वर्षौ सँ भँ रहल अछूत व्यवहारक निषेध होए ।

३.कोनो भी भाषा आ साहित्य मेँ समालोचना(क्रिटिसिज्म) अनिवार्य होएत छैक । मैथिली मात्र ऐहन भाषा अछि जएमें गणेश परिक्रमा आ व्यक्तिवादी चालिसा हाबी छैक, एकर अन्त्य करबाक प्रयास विशुद्ध रुप सँ आ जातिपाति सँ उपर उठि केँ कएल जाए ।

४.मैथिली भाषा केँ नामपर होमे बला नियुक्ति, सुविधा, पुरस्कार आ लाभ पद कें लेले कथित उच्च जाति कें आलाबा आन लोक केँ सेहो बाट क्लियर कएल जाए ।

५.मिथिला आ मैथिली मेँ बहुत रास विकृति आ विसंगि कें बढाबा दएनिहार लोकनि केँ सभ सँ पहिने  दण्डित कएल जाय या आममाफी मांगबाक लेल बाध्य कएल जाए ।

६.एकैहटा सीमित जाति केँ भेष, भुषा, संस्कृति आ रहनसहन केँ बेसी सँ बेसी भँ रहल प्रचार कें तत्काल बन्द कएल जाए ।

७.मिथिला क्षेत्रक महान विभूति सभ केँ पहिचान करैत हुनका लोकनि के द्वारा अतित मेँ मैथिली भाषा में देल गेल योगदानक चर्चा आ बहस कोनो भी संकिर्णता सँ उपर उठि केँ होए । संगैह हुनका सभहक बारे में वृहत अनुशन्धान करबाक मार्ग प्रशस्त कएल जाए ।

१०.मिथिला क्षेत्र कें लोकगाथा, लोकबाजा, लोकसंस्कृति, लोकदेवता, लोकनृत्य आदि केँ संरक्षणक लेल एकटा पैघ अभियान आ अनुशन्धान जरुरी छैक, एही दिस सभ गोटा केँ ध्यानाकर्षण होए ।

११.प्राचिनकालक ग्रन्थ पोथी सभ में उल्लेख कएल गेल विरोधाभासपूर्ण सामग्री केँ संशोधन करएत मिथिला क्षेत्र केँ सम्पूर्ण भाषाभाषी कें अभिमत लँ के एकटा अधिकार सम्पन्न आयोग बनौत, जहीँ में सम्झए के लेल योग्य सामग्री सहितक मार्ग निर्देशन तयार होए ।

१२.मैथिली केँ बहुत रास भाषिका दुलर्भ भँ गेल अछि, ओकर फेर सँ खोजी करैत सर्वमान्य भाषिक दस्ताबेज तयार कएल जाए ।

उपर देल गेल हमर किछु सुझाब मात्र अए, एहीं में सुधारक गुन्जाईस सेहो छैक । तेँ विद्वान मित्र लोकनि कें एहीँ मेँ बृहत छलफल केँ लेल आमन्त्रित कए रहल छि । आ एहीँ संँ एकटा ठोस निस्कर्ष निकलए से अपेक्षा अछि । धन्यवाद । 

Tuesday, 23 January 2018

‘मातृभाषा’ के ‘मातृशक्ति’ कहनाए कट्टरबाद थिक


  • दिनेश यादव (DINESH YADAV)
‘मातृभाषा’ आ ‘मातृशक्ति’ दुई पृथ्थक बात होएत छैक । ‘मातृभाषा’ (माय केँ बोली) कोनो भी व्यक्ति केँ लेल संचार केँ प्रथम माध्यम होइत छैक । ‘मातृशक्ति’ (नारी आ देवीभक्ति सँ जुडल) महिमा मण्डन आ स्तुतिगान सँ सम्बन्धित छैक । अंग्रेजी मेँ ‘मातृभाषा’ केँ ‘मदर टङ’ आ ‘मातृशक्ति’ केँ ‘मेटरनल पावर’ के रुप मेँ परिभाषा कयल छैक । हमरा बिचार सँ एतह ‘मदर’ आ ‘मेटरनल’ के अर्थ फरिछाबे पडत से नय बुझाएत अछि । हाँ, ई कही दि जे एकटा माय (मदर) सँ जुडल अछि दोसर मामा (मेटरनल अंकल) सँ जुडल बात छैक । मिथिला मेँ
 ‘माय’ आ ‘मामा’ फरक बात छैक । एशिया केँ विभिन्न भाषा साहित्य मेँ (खास कँके नेपाली, मैथिली, भोजपुरी, हिन्दी लगायत ) ‘मातृशक्ति’ केँ प्रयोग काली/दुर्गा, मातृभूमि आ नारीशक्ति केँ रुप मेँ कएल छैक । लेकिन ‘मातृभाषा’ के ‘मातृशक्ति’ के रुप मेँ कतौह प्रस्तुति नए देखबा मेँ आएल अछि । जौ कियो साहित्यकार ‘मातृभाषा’ के ‘मातृशक्ति’ केँ रुप मेँ व्याख्या करैत छथि, त ओ बलजोरी मात्र कए रहल अछि, बलजोरी मेँ सभकुछ माफ होएत छैक ।

कोनो अमुक भाषा केँ ‘मातृशक्ति’ कहनिहार सभ ‘अतिबादी’ या ‘पृथ्थकतावादी’ मेँ सँ एक भँ सकैत अछि । भाषा मेँ अतिबादी केँ अर्थ– हम जे कहैत छि सेहा होयत आ हम जेना बजैत छी सेहा बजु आ हम जे कहब सेहा सुनु, हम जे प्रयोग करैत छि सेहा उपयोग करु......। एही कोटी मेँ रहनिहार सभ भाषा केँ नाम पर ठिकेदारी, सिण्डिकेट आ दुकानदारी मेँ संलग्न रहैत छैक । तहिना एही कोटी मेँ रहनिहार सभ कोनो अमुक भाषा (जकर प्रयोग ककेँ अपन रोजीरोटी आ गास, बास आ कपासक जोरजाम मे लागल छथि) के ‘कैपिटलिज्म’ के रुप मेँ विस्तारवादी आ साम्राज्यवादी सोच रखैत छथि । किएक त हुनका लोकनि के अमुक भाषा केँ भजन, किर्तन आ स्तुतिगान करबाक लेल टाका भेटैत छहनि । हुनका सभ बाहेक आन केँ एही दिस विल्कुल ध्यान नए रहैत छैक । तेहिना भाषा केँ नाम पर ‘पृथ्थकतावादी’ सोच रखनिहार सभ एक भूगोल, एक क्षेत्र, एक समुदाय, एक वर्ग आ एक कलस्टर केँ तोडबाक फिराक मेँ रहैत छथि ।(उदाहरण के लेल कि मिथिला राज भँजेतैह त मधेस के
रातारात काया पलट भँ जाएत या मैथिली भाषा केँ सभ गोटा स्वीकारी लेताह त, रोजगारी आ विकास उत्कर्ष मेँ पहुँच जेतैह ? दुई अवस्था मेँ कोनो भूगोल मेँ आ समुदाय मेँ खास फरक नए पडत । हाँ किछु मुठीभर लोक सभ केँ चाँदी कटाई के जरिया जरुर बनि सकैत छैक) । आजुके ई ‘ग्लोबल भिलेज’ क युग मेँ मात्र एकैहटा अमुक भाषा केँ प्रचार करबाक अर्थ, आन भाषा केँ अस्तित्व अस्विकार केनाय अछि । ओहूना नेपाल एकटा बहुभाषिक देश अए, एतह एकेटाह भाषा आ संस्कृति लागू केनाए के मतलब आन केँ वहिष्कार केनाए बराबर अछि । 

नेपाल मेँ सभ केँ अपन–अपन मातृभाषा केँ रक्षा करबाक लेल अग्रसर होनाई सकारात्मक बात छैक, ई एकटा अधिकार सेहो अछि । मुदा दीर्घकालिन सोच के गिरबी रखैत कोनो एकैहटा भाषा केँ नाम पर समाज केँ विभाजित आ ध्रुविकृत केनाए दुर्भाग्य आ दुखद बात थिक । भाषा त कोनो एकटा समान भुगोल आ संस्कृति के जोडबाक माध्यम होबाक चाहीँ, तोडबाक बात त शासक आ शोषक करैत छैक । जौ कियो अपने केँ एहीँ कोटी केँ लोक मानैत छि तँ हमर ई बात हुनका लोकनि केँ लेल नए छैक । नेपाल केँ सन्दर्भ मेँ पहाड मेँ ‘नेपाली’ आ मधेस मेँ ‘हिन्दी’ सम्पर्क के भाषा छैक आ रहत (नोटः हमर माय केँ बोली मैथिली रहितौह, हम समग्र समूदाय केँ जोडबाक लेल छाती पर पाथर राखि केँ ई बात लिख रहल छि) । एकर अर्थ ई किन्नौह नय लगाबी जे एही सँ अमुक भातृभाषा(मैथिली,भोजपुरी,मगही,थारु...) केँ अस्तित्व समाप्त भँ जेतैह । जे सभ ई बात कहैत छथि ओ सभटा मातृभाषा प्रेमी नए, मातृभाषा केँ छनछनी कमेबाक फिराक बला सभ छथि । ओहुना शासक सभ कहियो भाषा केँ नाम पर त कहियो संस्कृति केँ नाम पर एकिकृत आ संगठित समाज केँ विभाजित करबाक सोच मेँ हमेशा रहैत छैक । ई बात बुझबाक जरुरी अछि ।

पुनः ‘मातृशक्ति’ तरफ ल चलैत छि । भाषा जौ ‘मातृशक्ति’ रहितिए त मिथिला क्षेत्र मेँ दहेज, डायन, विधवा, एकलनारी आ बेटी केँ नाम पर एतेक बेसी ‘मातृ’ सभ के उत्पीडन आ विभद केँ सामना नए कर पडतिए । भाषा जौ ‘मातृशक्ति’ रहितिए त मिथिलानगरी मेँ पुरनका सत्ता केँ किछु मतियार सभ ओए ‘सत्ताजाति’ के ‘सत्तापुरुष’ जकाँ जबरजस्ती अपन संस्कृति आ पहिरन केँ  ‘मिथिला के कथित शान’ केँ रुप मेँ सभ केँ माथ पर भारी(पाग) नए लाधि देतिअए । जौ भाषा ‘मातृशक्ति’ रहितिअए त कुमरबृज भान, अल्हारुदल,गोपीचन्द,सलेह नाच, कठपुतली नाच,डम्फा बसुली नाच, खदन चिडइया नाच, लोकगाथा, लोकनृत्य.......सभ नई बिला जाइतिए । मातृशक्ति केँ ई अर्थ किन्नौह नए जे, एकैहटा जाति विशेष केँ पहिरन सभ के माथा पर लगा दिअउनि, एकैहटा जाति विशेषक पर्व/तौहार केँ समग्र मिथिला क्षेत्र के नरनारी के मौलिक पर्व केँ रुप मेँ प्रचार कएदिअउनि, होली के नाम पर आयातित संस्कृति(महामुर्ख सम्मेलन) के अपना लिए.....।


अंग्रेजी साहित्य में सेहोँ भाषा केँ रुप मेँ सोह्रेआना ‘मातृ शक्ति’ कँ प्रयोग नए कएल गेल छैक । हाँ, कतौह–कतौह भाषा सँ मिलए बला दुइटा शब्द (सिन्क्रोनिक आ डायक्रोनिक) के प्रयोग कयल गेल भेटैत छैक । ओहो भाषिक विश्लेषण के रुप मेँ मात्र । ‘सिन्क्रोनिक एप्रोच’ मेँ कोनो एकटा भाषा के इतिहास केँ चर्चा नए कए वर्तमान अवस्था केँ जिक्र करबाक बात छैन । एही में वर्तमान समय में कोनो भाषा कें विशिष्ट विन्दू के चर्चा होबाक बात उल्लेख छैक । ‘डाइक्रोनिक एप्रोच’ में ऐतिहासिक भाषिक पर जोड दैति छैक । एही में विभिन्न कालखण्ड मेँ परिवर्तित भाषा केँ केन्द्र मेँ राखल गेल छैक । मुदा ‘मातृभाषा’ के ‘मातृशक्ति’ के रुप मेँ स्पष्ट रुप सँ उल्लेख केल कतौह नए भेटैत छैक । एहीँ विषय केँ हम एकटा अनुशन्धान केँ रुप मेँ लँ रहल छि । जौँ किनको पास एही विषय मेँ थप जानकारी हुए त अबगत कराबी, सदैब अभारी रहब । अखन हम ऐतबे कहब ‘मातृभाषा’ विल्कुले ‘मातृशक्ति’ नए थिक । भाषा केँ कट्टरपन्थी सभ केँ द्वारा अविष्कार कएल गेल ई विश्लेषण थिक ।          

Thursday, 18 January 2018

हाई रिजोल्युसन टिभीदेखि आखाँमा लगाउने माक्ससम्म बाजरमा

सिईएस २०१८ 


  • दिनेश यादव (काठमाडौं)

अमेरिकाको नेभादा प्रान्तस्थित लस भेगासमा हालै सम्पन्न कन्ज्युमर इलेक्ट्रोनिक शो (सिईएस) मा नयाँ–नयाँ प्रविधिहरुको प्रदर्शन गरिएको छ । प्रदर्शित प्रविधिहरु धेरैका लागि काल्पनिक लागेपनि ती सबै वास्तविक हुन । अधिकांश उत्पादनहरु नौलो र आश्चर्यजनक खालका थिए । नयाँ प्रविधियुक्त स्मार्टफोनदेखि भविष्यमा ल्याइने पछिल्ला अविष्कारलाई समेत सिईएसमा प्रदर्शन गरिएको थियो ।  ‘एलजी ८ के रेजोल्युसन ओलेड टीभी’, ‘सामसङ १४६ इन्च माईक्रो–एलइडी टिभी’, ‘एसर स्वीफ्ट ७’ र निद्रा लगाउने ‘स्मार्ट स्लिप माक्स’
 केही चर्चित प्रदर्शनहरु हुन । एलजीले सिइएस शुरु हुनु भन्दा धेरै पहिले आफ्नो महत्वाकांक्षी उत्पादनको घोषणा गरिसकेकाले धेरै दर्शकहरु यता झुमिएका थिए । मेलामा प्रर्दशन गरिएको ‘एलजी ८ के रिजोल्युसन ओलेड टिभी’ को पर्दा ८८ इन्चको रहेको छ । यसलाई हालसम्मकै सबैभन्दा बढी रिजोल्युसन भएको डिस्प्ले भनेर दाबी गरिएको छ । यो टिभीको रिजोल्युसन ७६८० गुना ४३२० पिक्सेलसम्म रहेको छ । यसको डिस्प्लेमा ३३ लाख पिक्सलसम्म प्रयोग गर्न सकिनेछ । 

त्यसैगरि, सामसङको १४६ इन्च माइक्रोलेड(माईक्रोएलईडी) टिभी संसारमै पहिलो ‘१४६ मोडयुलर माइक्रोलेड स्क्रिन’ मेलामा प्रदर्शन गरियो । यो टिभीको नाम ‘द वाल’ राखिएको छ । स्क्रिनलाई कयौ एकाईसंग जोडेर ठूलो बनाउन सकिने विशेषता यसमा छ । सामसंगले यो उत्पादनको स्क्रिन जति सुकै ठूलो बनाएपनि क्वालिटीमा खासै प्रभाव नपर्ने जनाएको छ । ‘माइक्रोलेड प्यानल टेक्नोलजी’ को प्रयोग यसमा गरिएको छ । यो प्रविधि ओलेड (ओएलईडी) झै काम गर्छ, यसमा रहेको पिक्सल प्रविधिले आफै प्रकास उत्पन्न गर्न सक्छ । यो आफै ‘अन र अप’ हुन्छ । यसमा रहेको कन्ट्रास्टले पिक्चर क्वालिटीलाई राम्रो बनाउने दाबी कम्पनीको छ ।  एलजी र सामसङपछि ‘एसर’ले पनि आफूलाई प्रविधिमा पछाडि पार्न चाहेन । उसले संसारकै सबैभन्दा पातलो ल्याप टप ‘एसर एकेए स्वीफ्ट ७’ सार्र्वजनिक गर्यो । ल्यापटपको मोटाई मात्र ८ दशमलव ९८ एमएम रहेको छ । यो ल्यापटप प्रोसेसर इन्टेल आई ७ मा आधारित छ । यसमा ‘४ जी एलटीई’ कनेक्सनको सुविधा पनि छ । यो ल्यापटपको ब्याट्री फूल चार्ज भएपछि १० घन्टासम्म निरन्तर चल्ने दाबी कम्पनीको छ । यसमा २५६ जीबिको पीसिएलई एसएसडी स्टोरेज सुविधा छ , यो आठ जीबि एलपीडीडीआर ३ मेमोरीका साथ काम गर्छ । स्वीफ्ट ७ मा १४ इन्चको फुल एचडी आईपीएस ५ डिस्प्ले छ । स्विफ्ट ७ मा कर्निंग गोरिल्ला ग्लास एनबीटी टच स्क्रिन र टचप्याड सुविधा पनि रहेको कम्पनीले जनाएको छ । 

यसैगरि ‘सीईएस २०१८’ को अर्को आकर्षणमा युएसबी ड्राइभ बनाउने कम्पनी ‘स्यानडिस्क २’ ले एक टेराबाइट(टीबी) स्टोरेज स्पेस भएको विश्वकै सबैभन्दा सानो पेन ड्राइभ रहयो । यो सामान्य युएसबी फ्ल्यास ड्राइभ भन्दा अलिक फरक खालको छ । ‘युएसबी–सी’ प्रविधिमा काम गर्ने यो पेन ड्राइभलाई प्रयोगकर्ताले बिना कुनै ओटीजी केबल सिधै आफ्नो स्मार्टफोनमा जोड्न सक्छन् । यो पेन ड्राइभबाट प्रयोगकर्ताले आफ्नो स्मार्टफोनको स्टोरेज मेमोरीलाई एक टेराबाइटसम्म बढाउन सक्ने सुविधा छ । साथै यसलाई आफ्नो फोनमा जोडेपछि त्यसमा कुुनै पनि डेटा द्रुत गतिमा प्रयोगकर्ताको डिभाईसमा स्टोर हुन्छ । यसो त, स्यान्डडिस्कले मेलामा प्रदर्शन गरेको ‘युएसबी–सी फ्ल्यास ड्राइभ’ हाल एउटा प्रोटोटाइप मोडेल मात्रै  हो । त्यसैले यसलाई बाजरमा ल्याउने डेट र मूल्य कम्पनीले तोकेको छैन । 
मेलामा अवलोकनकर्ताहरुका लागि आश्चर्यजनक डिभाईस मध्ये ‘औलालाई फोनको रुपमा काम गर्न सकिने’ प्रविधि पनि रहयो । सिंगल कम्पनीले रिस्टब्याण्ड नामबाट यो प्रविधिको प्रदर्शन गरेको थियो । यो रिस्टब्याण्ड ब्ल्युटूथ मार्फत फोनमा आफै जोडिने खालको डिभाइस हो । यसको कनेक्सन हुनेबितिकै प्रयोगकर्ताको औलाले फोन रिसिभरका रुपमा काम गर्न थाल्छ । यसका लागि हेडफोनको पनि आवश्यकता पर्दैन । यो प्रविधिमा अडियोको भाईब्रेसन्स प्रयोगकर्ताको नाडीमा कम्पन उत्पन्न गर्छ र यसैको आधारमा उसको औलाबाट फोनमा आएको कल रिसिभ गर्न सक्छ । यो ग्याजेट पुरै रुपमा साउन्ड भाईब्रेसन्समा काम गर्छ । यसका साउण्ड क्वालिटी पनि राम्रो रहेको दाबी गरिएको छ । 
त्यस्तै, ‘सिईएस २०१८’ मा एउटा यस्तो भर्चुअल रियलिटी(भीआर) ग्याजेट पनि प्रदर्शन गरियो, जसले गेमिङ संसारलाई रोमाञ्चक बनाई दिन्छ । चिनियाँ स्टार्टअपले प्रदर्शन गरेको  ‘८ के भर्चुअल रियलिटी(भिआर) हेडसेटलाई परिस्कृत गरि उक्त ग्याजेट सार्वजनिक गरिएको हो । अघिल्लो वर्ष नै सिईएसमा यसको पुरानो भर्सन सार्वजनिक भएको थियो । यो डिभाइसले प्रयोगकर्तालाई ३८४० गुणा २१६० पिक्सलको डिस्प्ले र २ सय डिग्रीको फिल्ड भ्युको अनुभव प्रदान गर्छ । ‘पिम्याक्स’ कम्पनीको यो हेडसेट टीटीएक्स १०७० कार्डसंगै ‘४के’ को अनुुभव यसबाट प्रयोगकर्ताले लिन सक्छन् । यसलाई ‘८ के’ सम्म बढाउन सकिने प्रविधि समेत जडान गरिएको छ । यो हेडसेटले अति साना वस्तुलाई समेत हेर्न सहयोग गर्छ । यति मात्रै हैन, भिडियो गेमका पारखीहरुका लागि यसले पुरै खेलको रोमाञ्चक र वास्तविक अनुभव गराउन सक्छ ।  
एउटा जापानी स्टार्टअप कम्पनीले मेलामा अनौठो खालको फरक ग्याजेट सार्वजनिक गर्यो , जसले प्रयोगकर्ताको शरिरलाई नै गेमिंग ग्योजेट बनाई दिने क्षमता राख्छ । यसो त ,यो एक प्रकारको सुट हो, जसमा विभिन्न प्रकारको डिभाइस जडान गरिएका छन् । यसलाई लगाउने बित्तिकै भर्चुअल संसारमा बनेको गेममा प्रयोगकर्ता आफै सहभागी हुने गर्छन । यसलाई प्रयोगकर्ताले घरभित्र र बाहिर घन्टौंसम्म उपयोग गर्न सक्ने छन् । यो सुट लगाउने बित्तिकै प्रयोगकर्ताले आफूलाई खेलको एउटा अभिन्न हिस्सा बन्न पुग्नेछन् र खेलको भरपुर मजा लिन सक्ने छन् । यसैगरि, एचटीसीले पनि सिईएसमा आफ्नो नयाँ भीआर हेडसेट सार्वजनिक गर्यो । यो सेट हाई रिजोल्युसन डिस्प्लेसंगै बिल्ट इन हेडफोनसहित छ । यसमा डुएल ओलेड डिस्प्ले २८८० गुणा १६०० पिक्सेलको छ । यसको पिक्सल घनत्व ६५१ पीपीआई रहेको छ ,जसले गेमिङ्गको अनुभवलाई रोमाञ्चक बनाई दिन्छ ।  पछाडिको हेडसेटको तुलनामा यसलाई बढी आरामदायक बनाइएको छ । सिईएसमा एउटा अर्को भीआर हेडसेट पनि सार्वजनिक भएको थियो , जसले खेलाडीलाई खेलको मजा मात्रै दिइदैन उसलाई तन्दुरुस्त बनाउनमा पनि काम आउछ । ‘ब्ल्याक बक्स’ नामले प्रस्तुत यो भीआर हेडसेट फुल बडी वर्कआउटका लागि बनाइएको छ । यो हेडसेटले बिस्पोक रेसिस्टेट ट्रेनिङ मेसिनलाई उपयोग गर्छ । सिईएसमा भिआर र फिटनेसको यो फरक मिश्रणको रुपमा प्रस्तुत गरिएको थियो । यो ‘ब्ल्याक बक्स’ भीआरले प्रयोगकर्तालाई आफै फिट बनाउनका लागि स्ट्रयान्थ प्रदान गर्नुका साथै उसलाई उत्प्रेरित समेत गर्न सक्ने खालको छ । भिआरको संसारमा यसले फरक खालको अनुभव प्रदान गर्ने दाबी निर्माता कम्पनीको छ । 

मेलामा एउटा टचस्क्रिन पेन्ट पनि प्रदर्शन गरियो । हिजोआज मानिसलाई हरेक कुरामा टचस्क्रिन चाहिएकाले यो पेन्ट त्यही प्रविधिमा आधारित रहेको छ । यसको प्रयोग गरेलगतै यो स्वचालित रुपमा टचस्क्रिनमा परिणत हुन्छ । यसलाई पहिले मेलोन विश्वविद्यालयका अनुधन्धानकर्मीले निर्माण गरेका थिए । यो पेन्टमा इलेक्ट्रिक फिल्ड टेमोग्राफीको उपयोग गरिएको छ । यसमा सानो इलेक्ट्रोड्सलाई आपसमा जोडेर कुनै सतह (प्लास्टिक, ड्रायवल) र अन्य कुनै वस्तुलाई टचस्क्रिनमा परिणत गर्ने खुबी रहेको छ । यसलाई आफ्नो औलाले चलाउन सकिन्छ । औलाको गतिविधिका आधारमा यसले विभिन्न जानकारीहरु दिने गर्छ ।  
‘सिईस २०१८’ स्मार्ट स्लिप माक्स अर्को आकर्षण थियो । यो माक्स नाकमा लगाउने हैन, आखाँमा लगाउने डिभाइस हो । ड्रिमलाइट कम्पनीद्वारा प्रदर्शन गरिएको उक्त माक्सलाई प्रयोगकर्ताले आफ्नो आखाँमा लगाएपछि यसले उसको आखाँसम्म कुनैपनि प्रकारको प्रकास पुग्न दिदैन । यसमा स्पिकर्स, इन्फ्रारेड सेन्सर र अप्टिकल हर्ट रेट मनिटर समेत जडान गरिएको छ , यसलाई एलईडी प्यानेलका साथ बजारमा ल्याइने भएको छ । एलईडी प्यानेल्समा स्लिम प्रोग्राम पनि जडान गरिएको छ, जसले १५ मिनेटसम्म प्रयोगकर्ताको आखाँमाथि सुन्तला रंगको प्रकास उत्पन्न गर्छ ।  यसबाट प्रयोगकर्ताको शरीरमा मेलेटोनिनको स्रावलाई उत्तेजित हुन्छ र केही बेरपछि पुरै संसार विर्सेर गहिरो निद्रा लाग्छ । यसमा निद्राबाट ब्युझिनका लागि समय सेट गर्नु पर्छ , प्रयोगकर्ता उठने बेला मास्कले आखामा हरियो रंगको प्रकास प्रदान गर्छ । यो डिभाइसमा विभिन्न प्रकारको संगीत समेत सुनने व्यवस्था छ । यति मात्रै हैन यसमा जडान गरिएको मनिटर र एक्सेलेरोमिटर तथा गायरोस्कोपबाट प्रयोगकर्ताको निद्रालाई ट्रयाक गर्न पनि सहयोग पुग्छ । यसमा प्रयोग गरिएको एपले प्रयोगकर्तालाई कति बेरसम्म सुत्यो भनेर जानकारी पनि दिनेछ । (#MyStory, Published on Kantipurdaily.com dated 2 Magh 2074)

https://www.kantipurdaily.com/technology/2018/01/16/20180116160929.html

Monday, 15 January 2018

मैथिली भाषा केँ मानक आ मानकीकरण मेँ खोट

मिथिला मेँ फरक मत 
  -दिनेश यादव  
भाषा केँ सन्दर्भ मेँ मानक आ मानकीकरण फरक होएत छैक, एहीँ दुनुँ केँ उपयोग बर्चस्पवादी जाति, सम्प्रदाय आ लोक सभ करैत छन्हि, राज्य केँ पुर्ण समर्थन एहीँ मेँ रहैत छैक । मुठिभर लोकसभ एहीँ के अपनबैत बाँकी सभ केँ मुर्ख बनबैत छैक । एकटा उदाहरण : बिहार मेँ बिपिएसी केँ परीक्षा मेँ मैथिली भाषा मेँ डिस्टिंक्सन अनिनिहार सभ मात्र बैसबाक बात पूर्व मुख्यमन्त्री जग्गनाथ मिश्र केने रहैत । ओकर लाभ गैर–ब्राह्मण केँ कहियौ नय भेटलय, लालुजी एलाह एही विषय पर अध्ययन भेल, तक्करवाद ओकरा करेक्सन कएल गेल रहैय । कोनो भी भाषा मेँ जन–जिभहक/जनबोली के स्वीकारोक्ति सभ प्रकार के लडाई केँ अन्तय कए दय छैक । मैथिली भाषा केँ सन्दर्भ मेँ सेहोँ एकर प्रयोग होबाक चाही । जौं कथित मिथिला अभियानी सभ हिया केँ चौडा बनबति ई बात स्वीकारी लेत त मानक÷मानकीकरणक विवादे नय रहि जायत । चिनियाँ भाषा मेँ त ब्याकरणेँ नय होयत छैक, तईयो चीन प्रगति के सिखर पर अइछे । भाषा केँ नाम पर अपन–अपन परियोजना कोना केँ चलय तय दिस बहुत लोकन्हि केँ दृष्टि छन्हि, तेँ विवाद अए ।
 दोसर बात, ‘मैथिल’ शब्द समग्र मिथिलावासी केँ प्रतिनिधित्व करय बाला शब्द नय छि । गैर–ब्राह्मण जेँ कियो अई शब्दक प्रयोग करैत, छि  ओ बलजोरी मात्र अए । एकर करेक्सन करबाक आ होबाक चाही । यी शब्द गैर–ब्राह्मण सँ जुडल पेट वर्ड नय छियै । (उदाहरण :मैथिल ब्राह्मण आ कायस्थ त होएत छैक , मुदा आन जाति केँ साथ ई शब्द नय जोडल जायत छैक ) । जेना ‘कमरेड’ शब्द कम्युनिष्ट सभहक पेट वर्ड छैक, तहिना ‘मैथिल’
शब्द केँ प्रयोग ओही रुप मेँ भँ रहल अए (मैथिल मण्डल, मैथिल यादव, मैथिल पासमान..नए होयत छैक, जौ कियो एकर प्रयोग करैति छथि त बलजोरी, ओना बलजोरी मेँ सभकिछु छुट ?) ‘मैथिल’ न त भाषिक पहचान छि, न त क्षेत्रिय पहचान छि , ई मात्र जातिय पहचान अए । केवल ब्राह्मण आ कायस्थ ‘मैथिल’ थिकैह । ‘मैथिल’ महासभा जे ‘मैथिल’ सबहक सभस ताकवर आ पैघ सभा रहैत छलैय, जकर संरक्षक दरभंगा के महाराज स्वंम छलाह, ओहीं सभा मेँ मात्र ब्राह्मण आ कायस्थ सहभागी केँ अधिकारी रहैत छलाह, ओहीँ में आन जाति केँ प्रवेश निषेध रहैय , कतबो धुरन्धर विद्वान या धनवान रहितौ आन जाति ओही सभा मेँ प्रतिबन्धित रहैय । आब दरभंगा राजा,महाराजा त छैथ नए, त ओ सभ नयाँ नारा केँ अविष्कार केलैथि स्‘हम सभ मैथिल छी’ । तेँ कहिओ ओ सभ जबर्जस्ती ‘पाग’ लगा दैति छैथ त कहियो ‘मैथिल’ के बिल्ला भिडा दैति छैक । (अई विषय पर थप जानकारी केँ लेल संगैह देल गेल सन्दर्भ सामग्री के देखल जाय)
मैथिली संस्कृति स्वयं समृद्ध आ पुरान छै, एहीँ मेँ कोनो दू मत किनको भइये नेँ सकैत अछि । मुद्दा ‘पाग’ समग्र मिथिला के शान कोना के आ कहिया भँ गेलैह, से पत्ता नए । राजस्थान सँ आयातित ‘पाग’ केँ प्रचलन समग्र मैथिली भाषी मेँ नए छैक, छियई । ओना जिनका–जिनका लगेबाक छन्हि लगाऊ । गैर–ब्राह्मणक पुर्खा केँ सान
‘पगडी’ आ ‘मुरेठा’ रहैय, विवाह मेँ मौरक चलन त अइछे, बहुसंख्यक मैथिली भाषी सभहक एहा पहिचान रहैय आ छैक । मुद्दा मिथिला क्षेत्र हरेक कार्यक्रम मे किछु ब्राह्मणवादी सभ ‘खास जाति आ वर्गक’ पहिरन के सभहक शान के रुपमेँ प्रचार मेँ लागल अछि । ई प्रचार शैली अनुचित मात्र नए, भत्र्सनायोग्य छैक । एकरा गैर–ब्राह्मणक ‘संस्कृति पर प्रहार’ आ ‘संस्कृति, पहिरन थोपबाक’ रुप मेँ लेबाक चाहि । एकर  विरोध सेहोँ जोडदार रुप सेँ होए । ओहुना नेपालीय मैथिली सभहक लेल आब ई पहिचानक धरोहर नए रहै गेलय । किएक त, भारत मेँ पाग पर डाक टिकट सेँ जारी भँ गेल छैक । कोनो दोसर देशक पहिचान एक आब स्वीकार करी से अनुचित अए, उटपटाङ बात सेहोँ अए । नेपालीय मैथिली भाषी क्षेत्र केँ सप्तरी केँ सिडिओ कार्यालय मेँ पाँच टका दकेँ खसवादी टोपी जबर्जस्ती अतित मेँ ओतहुका लोक सभ लगएने रहय, दौरा–सुरुवालक दबाब त ओकरा सभ पर वर्षौं सँ जारी अइछे, पागक भारी सेहो कोना कँे ओ सभ मथा पर ढोहत ? (अई विषय पर थप जानकारी केँ लेल संगैह देल गेल सन्दर्भ सामग्री के देखल जाय) ।  खेतिहार सँ लकेँ मजदुर सभ केँ पहुँच मेँ रहैबला पगडी के मिथिला केँ धरोहर नए माएन केँ सम्भ्रान्त जाति विशेष केँ पहिरहनक प्रचार मेँ ब्राह्मणवादी सभ किएक छैक ? अई प्रश्न केँ जबाफ विल्कुल सरल आ सहज छैक ः अपन संस्कृति आ पहिरनक अस्तित्व जोगाबी, ताहीँ लेल प्रचार करी ।
सन्दर्भ सामग्री :
१. जनसत्ता राष्ट्रिय दैनिक, नयाँ दिल्ली, नोभेम्बर २०१५
२ इलिट एन्ड डेभलपमेन्ट, पृष्ठ २००

Sunday, 14 January 2018

तिला संक्रांति

मैथिली लघुकथा 
  • दिनेश यादव 

अही बेरक तिला संक्राति मे हम झापा जिला के माईधार सप्तरीक अप्पन गाम फकिरा होयत  मधुवनी फुरफरास नजिक सांगी के यात्रा करैत दरभंगा के मिर्जापुर तक पहुँचलौं एतबे नय मधुवनी के सहारघाट नजि बसबरिया गाम मे सेहो हम पहुँचलौ एक्के दिन मे एतेक यात्रा कोना सम्भव होयत मुद्दा हम सम्भव बनेलौ, अप्पन मन दौडा , स्मृति के पन्ना पलटा के स्कुलिया जीवन कलेज होइत अखनी धरि उपर देल गेल स्थान हम जुडल छि सन् १९८४ के जाड मे कन्काई माई धार मे स्नान करबाक प्रतियोगिता होय या अप्पन जन्मस्थल फकिरा के पुरैनी पोखरी मे भफियाइत पानी मे हेलबाक बाजी होय , सबटा बुझायत अछि जेना काइल्हे भेल छल  दरभंगा के टावर चोक के टेला पर के घिउवरी मिठाई, नजदीक रहल लस्सी के दोकन पे रंगीन लस्सी पिबाक बात एक्के दिन उमा टाकिज  लहेरियासरायक लाइटहाउस मे देखल गेल सिनेमा खुब मोन पडल, आजु एतह, काठमाडौस्थित निवास मे २०१२ के तिलासंक्राति मे बासमति, चननचुर कान्छी मन्सुली चउरक छनौट मे हमरा कनियाँ के बड परेशानी भेल बौआ कहैत छल बासमति, हम कहैत छलौह चननचुर मुद्दा हमर ननकिरबा भतिजक जिद छल कान्छी मन्सुली फजगज जारी छल , ओही बीच कनिया कहली जे खिचडी छी , जायछी हम तीनु चाउर फेट बनाबैले हुनक यी छनौट हमरा उत्तम लागल खिचडी पकौलैति, बड टेस्टी बनल , मुद्दा खिचडी मे घि , पापड , कसौनी आमक आचार जौ नय होयत कि मज्जा ? अही सब चीजबीजक खोजी भेल हमरा मालुम छल घि हमर स्वास्थ्य के कारण कनिया कहत नय अछि मुद्दा आन परिकार हम सेहो बञ्चित गेलौ दीर्घकालिन रोग से ग्रस्त यी शरीर दु दिन पछाडि रहल सर्दी जुकाम बोकार के कारण हमरा फकिरा, दरभंगा, मधुवनी फुलपरास धरि पहुँचा देलक दरभंगा के तिलासंक्राति मे झन्झारपुर नजिक खैरा तिलैय के विश्वनाथ मामा, मधुवनी घोघडीयाहा #हुलासपट्टी के राजकुमार रोशन भैया के साथ विशेष छल करीब दु दशक गेल मुद्दा आइयौ नय तिला संक्राति हम विसरी रहल छी ओतबे काहा मधुवनी पिपरौन के मनोजकुमार झा के घर से आएल तिल, मुरही चुराक लाय अखनो मोन पडैए सहर्सा के संगी जितेन्द्र चौधरी के तिलकौरक चटनी दरभंगा मनहरणलाल मोहल्ला के मिथलेश भैया के कनियाक हात के तिलवा मिठाई जी पानी निकबाक लेल काफी अछि दिन छल बिना मिठाई हम रही नय सकैत छलौ, आजुक दिन अछि , हम मिठा छु नय सकैत छि चिनिया मिमारी जे गेल हमरा तिलबा लाय हमरा लेल सपना बनल अछि , मिठा के बाते छोडी दिऔ बस देख के सन्तोष मानबाक स्थिति मे हम पहुँच गेल छि घि खेला चारी बरिष गेल , सख्खर के नजिक जेबाक वर्जित अछि धन्य हमर ननकिरबा भतिज जे हमर कनिया से चोरा के एकटा मुरही के लाय हमरा देलक मुद्दा बात खोलि देलक, बाल स्वभाव जे छल कनिया हमरा पर बरसी ऊठल हम मोहनविक्रम सिंह के एक पोथि नेपाली राष्ट्रियता, विगत, वर्तमान भविष्य के कोठा पे चली गेलौ कान्तिपुर एबाक काल मात्र निचा उतरौ कपडा पहिन अफिस दिस प्रस्थान भेलौ राति ११ बजे लौटब ताबे धरि खिचडी, लाय सब समाप्त चुलक रहत ...(स्न २०१२ जनवरी १५ मेँ लिखल गेल ई लघुकथा ।)

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